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Budaun News: जिले में अब तक शुरू नहीं हो सकी कुत्तों की नसबंदी, बढ़ रही परेशानी
Tue, 19 May 2026 11:50 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 19 May 2026 11:50 PM IST
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शहर में सड़कों पर घूमते कुत्ते। संवाद
- फोटो : लंदन में अमल क्लूनी महिला सशक्तिकरण पुरस्कार से सम्मानित हुईं रिसिया की नैना।
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बदायूं। जिले में कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू नहीं हो सका है। नवंबर से प्रस्ताव और तैयारियां चल रही हैं, लेकिन नगर निकाय अभी तक एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर के लिए उपयुक्त जगह तक तय नहीं कर सके हैं। इससे नसबंदी अभियान शुरू होने में लगातार देरी हो रही है।
शहर और कस्बों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आए दिन लोगों पर कुत्तों के हमला करने और काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने वाले मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। पहले जिला अस्पताल में रोजाना 180 से 190 के करीब कुत्ते आते थे, लेकिन अब इसकी बढ़कर 200 से अधिक हो गई है। इसके बावजूद नसबंदी योजना कागजों से बाहर नहीं निकल पा रही है।
पिछले दिनों शासन स्तर से कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए एबीसी सेंटर स्थापित कर नसबंदी कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए नगर निकायों को जमीन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन छह महीनों बाद भी उपयुक्त स्थान का चयन नहीं हो पाया है। अधिकारियों का कहना है कि एबीसी सेंटर के लिए ऐसी जगह की जरूरत है जहां कुत्तों को रखने, ऑपरेशन और देखभाल की समुचित व्यवस्था हो सके। जमीन चयन की प्रक्रिया चल रही है और जगह तय होने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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एबीसी सेंटर के लिए पांच माह पहले की गई है डेढ़ एकड़ जमीन की मांग
-नगर पालिका को अपने क्षेत्र में एबीसी सेंटर खोलने की जगह नहीं मिली। इसके बाद नगर पालिका की ओर से पांच माह पहले एसडीएम को पत्राचार किया गया। इसमें उन्होंने डेढ़ एकड़ जमीन की मांग की है। लेकिन पांच माह बाद भी नगर पालिका और तहसील प्रशासन के लिए जगह नहीं मिल सकी है।
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ऐसे करें प्राथमिक उपचार
धोना : घाव को तुरंत खूब सारे साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। इससे वायरस (लार) निकल जाता है।
खून रोकना : यदि खून बह रहा हो तो साफ कपड़े से हल्का दबाव डालकर खून रोकें।
एंटीसेप्टिक : धोने के बाद घाव पर एंटीसेप्टिक लोशन (जैसे बीटाडीन) लगाएं।
ढकना : घाव को एक साफ पट्टी या कपड़े से ढक दें।
घरेलू उपचार से बचें : हल्दी, मिर्च पाउडर या कोई घरेलू पेस्ट न लगाएं। इससे संक्रमण बढ़ सकता है।
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यह है उपचार
-रैबीज रोग की रोकथाम के लिए अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इससे बचाव हो सकता है। नियमानुसार, पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवां 28 दिन के बाद लगाया जाता है।
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हर दिन 1400 रैबीज के मरीज
-जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर भी हालात चिंताजनक हैं। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 800 मरीज एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 1400 प्रतिदिन तक पहुंच गई है। ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई अभिभावकों ने बताया कि गांवों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और वे झुंड में हमला कर देते हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है।
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ये हो चुकी हैं घटनाएं
- 21 अप्रैल को 2026 को बिसौली में शादी समारोह के दौरान 100 से अधिक लोगों को कुत्ते ने काटा।
- 15 जनवरी 2026 को कादरचौक कस्बा व लभारी में एक कुत्ते ने अलग-अलग स्थानों पर हमला करते हुए बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों समेत कुल 18 लोगों को काटा।
- 18 मार्च 2025 को अथइया गांव में कुत्ते ने एक ही घंटे के दौरान बच्चों समेत पांच लोगों को काटा।
- 15 मार्च 2025 को अथइया गांव में कुत्ते ने तीन जानवरों को काटा।
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अभी तक जगह नहीं मिल सकी है। इसके लिए तहसील प्रशासन के साथ मिलकर जगह देखी जा रही है।
-विनय कुमार मणि त्रिपाठी, ईओ नगर पालिका बदायूं
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शहर और कस्बों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आए दिन लोगों पर कुत्तों के हमला करने और काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने वाले मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। पहले जिला अस्पताल में रोजाना 180 से 190 के करीब कुत्ते आते थे, लेकिन अब इसकी बढ़कर 200 से अधिक हो गई है। इसके बावजूद नसबंदी योजना कागजों से बाहर नहीं निकल पा रही है।
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पिछले दिनों शासन स्तर से कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए एबीसी सेंटर स्थापित कर नसबंदी कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए नगर निकायों को जमीन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन छह महीनों बाद भी उपयुक्त स्थान का चयन नहीं हो पाया है। अधिकारियों का कहना है कि एबीसी सेंटर के लिए ऐसी जगह की जरूरत है जहां कुत्तों को रखने, ऑपरेशन और देखभाल की समुचित व्यवस्था हो सके। जमीन चयन की प्रक्रिया चल रही है और जगह तय होने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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एबीसी सेंटर के लिए पांच माह पहले की गई है डेढ़ एकड़ जमीन की मांग
-नगर पालिका को अपने क्षेत्र में एबीसी सेंटर खोलने की जगह नहीं मिली। इसके बाद नगर पालिका की ओर से पांच माह पहले एसडीएम को पत्राचार किया गया। इसमें उन्होंने डेढ़ एकड़ जमीन की मांग की है। लेकिन पांच माह बाद भी नगर पालिका और तहसील प्रशासन के लिए जगह नहीं मिल सकी है।
ऐसे करें प्राथमिक उपचार
धोना : घाव को तुरंत खूब सारे साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। इससे वायरस (लार) निकल जाता है।
खून रोकना : यदि खून बह रहा हो तो साफ कपड़े से हल्का दबाव डालकर खून रोकें।
एंटीसेप्टिक : धोने के बाद घाव पर एंटीसेप्टिक लोशन (जैसे बीटाडीन) लगाएं।
ढकना : घाव को एक साफ पट्टी या कपड़े से ढक दें।
घरेलू उपचार से बचें : हल्दी, मिर्च पाउडर या कोई घरेलू पेस्ट न लगाएं। इससे संक्रमण बढ़ सकता है।
यह है उपचार
-रैबीज रोग की रोकथाम के लिए अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इससे बचाव हो सकता है। नियमानुसार, पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवां 28 दिन के बाद लगाया जाता है।
हर दिन 1400 रैबीज के मरीज
-जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर भी हालात चिंताजनक हैं। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 800 मरीज एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 1400 प्रतिदिन तक पहुंच गई है। ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई अभिभावकों ने बताया कि गांवों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और वे झुंड में हमला कर देते हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है।
ये हो चुकी हैं घटनाएं
- 21 अप्रैल को 2026 को बिसौली में शादी समारोह के दौरान 100 से अधिक लोगों को कुत्ते ने काटा।
- 15 जनवरी 2026 को कादरचौक कस्बा व लभारी में एक कुत्ते ने अलग-अलग स्थानों पर हमला करते हुए बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों समेत कुल 18 लोगों को काटा।
- 18 मार्च 2025 को अथइया गांव में कुत्ते ने एक ही घंटे के दौरान बच्चों समेत पांच लोगों को काटा।
- 15 मार्च 2025 को अथइया गांव में कुत्ते ने तीन जानवरों को काटा।
अभी तक जगह नहीं मिल सकी है। इसके लिए तहसील प्रशासन के साथ मिलकर जगह देखी जा रही है।
-विनय कुमार मणि त्रिपाठी, ईओ नगर पालिका बदायूं