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Budaun News: डॉक्टर फरमाते हैं आराम, प्रशिक्षु फार्मासिस्ट के हवाले इमरजेंसी
Sat, 25 Nov 2023 01:51 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Sat, 25 Nov 2023 01:51 AM IST
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज करते ट्रेनिंग करने वाले लड़के। संवाद
बदायूं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रात दस बजे के बाद कोई चिकित्सक दिखाई नहीं देता है। आसपास बने कक्षों में डॉक्टर आराम फरमाते रहते हैं और कर्मचारी ऊंघते रहते हैं। ऐसे में यहां की व्यवस्था सिर्फ प्रशिक्षु फार्मासिस्टों के हाथ ही रहती है। ये लोग मरीज के चेकअप से लेकर उनको इंजेक्शन तक लगाते हैं। इमरजेंसी में बृहस्पतिवार की रात भी ऐसा ही मामला सामने आया। इसमें डॉक्टर के बिना देखे ही मरीज को रेफर कर दिया गया।
इमरजेंसी में रात 10 बजे के बाद डाॅक्टर और स्टाफ भी आराम के मूड में आ जाते हैं। बृहस्पतिवार की रात 12 बजे इमरजेंसी कक्ष सिर्फ प्रशिक्षु फार्मासिस्ट के हवाले ही दिखाई दिया। घायल ओमप्रकाश का भी इलाज इन्हीं ने किया। रात 12 बजे के बाद इमरजेंसी खाली हो चुकी थी। डाॅक्टर इमरजेंसी में बने निजी कक्ष में लेटे थे तो दूसरी ओर कर्मचारी बैठे-बैठे ऊंघ रहे थे। इमरजेंसी डाॅक्टर कक्ष में डाॅ. एनके सिंह और फार्मासिस्ट तनवीर की ड्यूटी थी।
वर्जन
रात करीब नौ बजे एक सड़क हादसा हो गया था, जिसमें एक युवक की मौत हो गई थी। उसकी शिनाख्त कराने और भीड़ होने की वजह से मोर्चरी तक गया हुआ था। बाकी समय इमरजेंसी रहा हूं। 11 बजे के बाद कोई कभी ही मामला आता है, इसलिए कमरे में बैठ जाते हैं। मरीज आने पर तत्काल देखा जाता है। - डाॅ. एनके सिंह ईएमओ, जिला अस्पताल
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अस्पताल में इंटर्नशिप करने वाले फार्मासिस्टों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अगर उनसे काम नहीं कराया जाएगा तो वह लोग कैसे काम सीखेंगे। वह लोग पढ़ाई करके आए हैं। तीन माह तक उनको ट्रेंड करने का काम जिला अस्पताल कर रहा है। इमरजेंसी में कहीं कोई दिक्कत नहीं होने दी जायेगी। डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
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इमरजेंसी में रात 10 बजे के बाद डाॅक्टर और स्टाफ भी आराम के मूड में आ जाते हैं। बृहस्पतिवार की रात 12 बजे इमरजेंसी कक्ष सिर्फ प्रशिक्षु फार्मासिस्ट के हवाले ही दिखाई दिया। घायल ओमप्रकाश का भी इलाज इन्हीं ने किया। रात 12 बजे के बाद इमरजेंसी खाली हो चुकी थी। डाॅक्टर इमरजेंसी में बने निजी कक्ष में लेटे थे तो दूसरी ओर कर्मचारी बैठे-बैठे ऊंघ रहे थे। इमरजेंसी डाॅक्टर कक्ष में डाॅ. एनके सिंह और फार्मासिस्ट तनवीर की ड्यूटी थी।
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वर्जन
रात करीब नौ बजे एक सड़क हादसा हो गया था, जिसमें एक युवक की मौत हो गई थी। उसकी शिनाख्त कराने और भीड़ होने की वजह से मोर्चरी तक गया हुआ था। बाकी समय इमरजेंसी रहा हूं। 11 बजे के बाद कोई कभी ही मामला आता है, इसलिए कमरे में बैठ जाते हैं। मरीज आने पर तत्काल देखा जाता है। - डाॅ. एनके सिंह ईएमओ, जिला अस्पताल
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अस्पताल में इंटर्नशिप करने वाले फार्मासिस्टों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अगर उनसे काम नहीं कराया जाएगा तो वह लोग कैसे काम सीखेंगे। वह लोग पढ़ाई करके आए हैं। तीन माह तक उनको ट्रेंड करने का काम जिला अस्पताल कर रहा है। इमरजेंसी में कहीं कोई दिक्कत नहीं होने दी जायेगी। डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल

जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज करते ट्रेनिंग करने वाले लड़के। संवाद