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जिला अस्पताल में एंटीबायोटिक दवाएं खत्म

Thu, 08 Sep 2016 11:21 PM IST
ब्यूरो /बदायूं
ब्यूरो /बदायूं Updated Thu, 08 Sep 2016 11:21 PM IST
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ज्यादातर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक दवाएं जिला अस्पताल में खत्म हो गई हैं। यह स्थिति तब है जब जिले में संक्रामक रोगों का सीजन चल रहा है। अब तक जिले में 42 लोगों की संक्रामक बीमारियों से मौत हो चुकी है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज 1200 से 1400 मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन अस्पताल में दवाओं का टोटा है। 
संक्रामक रोगों के सीजन में जिला अस्पताल की लापरवाही उजागर हो गई है। जिले में अगस्त के पहले सप्ताह में संक्रामक रोगों का प्रकोप शुरू हुआ था। स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां जरूर कीं, लेकिन जरूरी दवाएं खरीदना मुनासिब नहीं समझा। जिला अस्पताल में खानापूरी के लिए डायरिया और डेंगू वार्ड बना दिए गए। जिन डॉक्टर को जिम्मेदारी दी गई वह मुख्यालय पर ही नहीं रहते। पिछले दिनों डीएम सीपी त्रिपाठी ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया तो पांच डॉक्टर समेत 11 लोग गैरहाजिर मिले। संक्रामक रोगों केसीजन में जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों को असरदार दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में मरीजों को निजी डॉक्टर और झोलाछाप की शरण में जाना पड़ रहा है। जिला अस्पताल प्रशासन एंटीबायोटिक दवाओं की किल्लत के बीच मौन साधे हुए है। 
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सीएमएस का डॉक्टरों पर नियंत्रण नहीं
बदायूं। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके गुप्ता का डॉक्टरों और स्टाफ भी नियंत्रण खत्म हो गया है। ओपीडी में रोज 1200 से 1400 मरीज आ रहे हैं, लेकिन यहां से डॉक्टर नदारद रहते हैं। कई डॉक्टर तो बरेली में निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं। डीएम आदेश दिया दिया था कि सभी डॉक्टर मुख्यालय पर रहेंगे। इस आदेश का भी पालन नहीं हो रहा। कहने को तो जिला अस्पताल में तीन फिजीशियन हैं, लेकिन ओपीडी में यह कभी कभार ही नजर आते हैं। सीएमएस का नियंत्रण न होने से अस्पताल स्टाफ और डॉक्टर बेलगाम हैं।
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डेली डायरी में डॉक्टर कर रहे खेल
बदायूं। शासन ने डॉक्टरों के लिए डेली डायरी मेंटेन करना जरूरी कर दिया है। सभी डॉक्टर को इसमें रोज के सरकारी कार्यों का जिक्र करना होता है। यह भी लिखना होता है कि उन्होंने कितने मरीज देखे, कितने ऑपरेशन और पोस्टमार्टम किए। इसी डेली डायरी के आधार पर डॉक्टरों को वेतन मिलता है। अस्पताल के तमाम डॉक्टर डेली डायरी में भी फर्जीबाड़ा कर रहे हैं। 


वर्जन-
शासन की मंशा बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं है। जिला अस्पताल में दवाओं की किल्लत के बारे में सीएमएस से बात की जाएगी। अगर कोई डॉक्टर काम में मनमानी कर रहे हैं या फिर मुख्यालय पर नहीं रहते उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।-डॉ. सुबोध शर्मा, एडी हेल्थ
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