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Budaun News: 54 शोधपत्रों पर हुआ विमर्श, आज होगा समापन
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राजकीय डिग्री कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का तीसरा दिन अतिथियों ने अपने-अपने विषय के बारे
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बदायूं। राजकीय महाविद्यालय के वनस्पति विज्ञान व प्राणी विज्ञान विभाग की ओर से चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन अकादमिक विमर्श का दौर जारी रहा। इसमें 54 शोधपत्रों पर देश-विदेश के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने चर्चा की। शेष शोधपत्रों पर विमर्श के लिए प्राचार्य डॉ. श्रद्धा गुप्ता ने सम्मेलन को एक दिन और बढ़ाने की घोषणा की। अब समापन 31 अगस्त को होगा।
यूएई के प्रो. डॉ. मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि एपिब्रैसिनोलाइड और मेलाटोनिन का संयुक्त प्रयोग मटर के पौधों को सूखा और लवणीयता जैसे तनाव से बचाने में सहायक है। चीन के प्रो. डॉ. अनायत रसूल मीर ने सरसों के पौधों पर किए शोध प्रस्तुत करते हुए कहा कि आईएए और मेलाटोनिन का बाहरी प्रयोग कॉपर टॉक्सिसिटी से रक्षा करता है।
सऊदी अरब के वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद महमूद ने मृदा स्वास्थ्य में नेमाटोड्स की भूमिका पर प्रकाश डाला और उन्हें जैव संकेतक बताया। नाइजीरिया के वैज्ञानिक चार्ल्स ओलुवासेन आदेतुंजी ने कहा कि नवीनतम बायोटेक्नोलॉजी और जीनोमिक उपकरण कृषि व पशुपालन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। वहीं आयोजन समिति की संयोजक डॉ. प्रियंका सिंह ने कहा कि सम्मेलन युवा शोधार्थियों के लिए सशक्त मंच है। वहीं, डॉ. गौरव कुमार सिंह ने इसे विज्ञान और समाज के बीच की खाई को पाटने वाला प्रयास बताया। समन्वयक डॉ. सचिन कुमार ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार जताया।
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यूएई के प्रो. डॉ. मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि एपिब्रैसिनोलाइड और मेलाटोनिन का संयुक्त प्रयोग मटर के पौधों को सूखा और लवणीयता जैसे तनाव से बचाने में सहायक है। चीन के प्रो. डॉ. अनायत रसूल मीर ने सरसों के पौधों पर किए शोध प्रस्तुत करते हुए कहा कि आईएए और मेलाटोनिन का बाहरी प्रयोग कॉपर टॉक्सिसिटी से रक्षा करता है।
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सऊदी अरब के वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद महमूद ने मृदा स्वास्थ्य में नेमाटोड्स की भूमिका पर प्रकाश डाला और उन्हें जैव संकेतक बताया। नाइजीरिया के वैज्ञानिक चार्ल्स ओलुवासेन आदेतुंजी ने कहा कि नवीनतम बायोटेक्नोलॉजी और जीनोमिक उपकरण कृषि व पशुपालन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। वहीं आयोजन समिति की संयोजक डॉ. प्रियंका सिंह ने कहा कि सम्मेलन युवा शोधार्थियों के लिए सशक्त मंच है। वहीं, डॉ. गौरव कुमार सिंह ने इसे विज्ञान और समाज के बीच की खाई को पाटने वाला प्रयास बताया। समन्वयक डॉ. सचिन कुमार ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार जताया।
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