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‘दिया जनम तो पालो बाबू जी, मुझे नाले में न डालो बाबू जी’
अमर उजाला ब्यूरो/ कादरचौक
Updated Sun, 02 Apr 2017 11:17 PM IST
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कवि सम्मेलन
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‘दिया जनम तो पालो बाबू जी,
मुझे नाले में न डालो बाबू जी’
मंजिल लोहाठेरी की याद में रमजानपुर में हुआ कवि सम्मेलन-मुशायरा
ग्राम रमजानपुर में मशहूर शायर मंजिल लोहाठेरी की याद में एक शाम कौमी एकता के नाम कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया गया। दूरदराज से आए कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। संरक्षक नूर ककरालवी के सानिध्य में कवि सम्मेलन-मुशायरे की शुरुआत नात शरीफ से हुई।
अभिषेक अनंत ने कहा-
मैं हूं अम्मा के कलेजवा का टुकड़ा, जरा देखो मेरा प्यारा-प्यारा मुखड़ा, दिया जनम तो पालो बाबू जी, मुझे नाले में न डालो बाबू जी।
षट्वदन शंखधार ने कहा-
इतना प्यार नहीं करना तुम, मेरा मन पागल हो जाए, संभव है सागर से मिलकर खारा गंगाजल हो जाए।
अतुल श्रोतीय अतुल ने कहा-
अजब दुनियां के मंजर देखता हूं, शजर सूखे, बुझे घर देखता हूं।
खालिद चगताई ने कहा-
कोशिशें नाकाम होती है जहां,कायनात काम आती है वहां मौजें गुरुदें पाक की
खलिद नदीम ने कहा-
ऐ चारा गरमरीज काकराना है, गर इलाज उसकी दवा में खाके दरे मुस्तफा मिला।
सुहैल आजम ने कहा-
मजा हो ऐ कोशिशे दिल जो हिंद में करमे, उठी है झूम के काली घटा मदीने में।
पवन शंखधार ने कहा-
छोटी छोटी बखरिन हम तरस गए घाम को, लागत नाय शहर मेे अच्छो हमें भेज देउ गांव को।
जिलाधिकारी पवन कुमार की गजल की पंक्ति डॉ. सोहराव ककरालवी ने पढ़ी-
मजहब, दौलत, जात, घराना, सरहद, गैरत खुद्दारी, एक मुहब्बत की चादर को कितने चूहे कुतर गए, हीरे भी क्यों शर्मिंदा हों नई कहानी लिखने से, जब इस दौर के सब ही रांझे अहिले संग से मुकर गए।
खार शेखूपुरी ने कहा-
गर्दिशे वक्त में फिर बात करूंगा तुझसे,
पहले बिगड़े हुए हालात संभल जाने दे।
इसके अलावा सुरेंद्र नाज, चांद ककरालवी, डॉ. अखलाख, रागिव सुहैल, आलम नूर ककरालवी, रहमत अली, डॉ शकील, शफील अहमद समेत अनेक मशहूर शायरों और कवियों ने अपने कलाम पेश किए। अंत में आयोजक डॉ. रहमत अली ने पिता मंजिल लोहाठेरी की याद में गजल पेश कर सभी का आभार व्यक्त किया।
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मुझे नाले में न डालो बाबू जी’
मंजिल लोहाठेरी की याद में रमजानपुर में हुआ कवि सम्मेलन-मुशायरा
ग्राम रमजानपुर में मशहूर शायर मंजिल लोहाठेरी की याद में एक शाम कौमी एकता के नाम कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया गया। दूरदराज से आए कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। संरक्षक नूर ककरालवी के सानिध्य में कवि सम्मेलन-मुशायरे की शुरुआत नात शरीफ से हुई।
अभिषेक अनंत ने कहा-
मैं हूं अम्मा के कलेजवा का टुकड़ा, जरा देखो मेरा प्यारा-प्यारा मुखड़ा, दिया जनम तो पालो बाबू जी, मुझे नाले में न डालो बाबू जी।
षट्वदन शंखधार ने कहा-
इतना प्यार नहीं करना तुम, मेरा मन पागल हो जाए, संभव है सागर से मिलकर खारा गंगाजल हो जाए।
अतुल श्रोतीय अतुल ने कहा-
अजब दुनियां के मंजर देखता हूं, शजर सूखे, बुझे घर देखता हूं।
खालिद चगताई ने कहा-
कोशिशें नाकाम होती है जहां,कायनात काम आती है वहां मौजें गुरुदें पाक की
खलिद नदीम ने कहा-
ऐ चारा गरमरीज काकराना है, गर इलाज उसकी दवा में खाके दरे मुस्तफा मिला।
सुहैल आजम ने कहा-
मजा हो ऐ कोशिशे दिल जो हिंद में करमे, उठी है झूम के काली घटा मदीने में।
पवन शंखधार ने कहा-
छोटी छोटी बखरिन हम तरस गए घाम को, लागत नाय शहर मेे अच्छो हमें भेज देउ गांव को।
जिलाधिकारी पवन कुमार की गजल की पंक्ति डॉ. सोहराव ककरालवी ने पढ़ी-
मजहब, दौलत, जात, घराना, सरहद, गैरत खुद्दारी, एक मुहब्बत की चादर को कितने चूहे कुतर गए, हीरे भी क्यों शर्मिंदा हों नई कहानी लिखने से, जब इस दौर के सब ही रांझे अहिले संग से मुकर गए।
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खार शेखूपुरी ने कहा-
गर्दिशे वक्त में फिर बात करूंगा तुझसे,
पहले बिगड़े हुए हालात संभल जाने दे।
इसके अलावा सुरेंद्र नाज, चांद ककरालवी, डॉ. अखलाख, रागिव सुहैल, आलम नूर ककरालवी, रहमत अली, डॉ शकील, शफील अहमद समेत अनेक मशहूर शायरों और कवियों ने अपने कलाम पेश किए। अंत में आयोजक डॉ. रहमत अली ने पिता मंजिल लोहाठेरी की याद में गजल पेश कर सभी का आभार व्यक्त किया।
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