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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Debate on gazette in Jama Masjid case file for order hearing to be held on January 3 in Badaun

Badaun: जामा मस्जिद के मुकदमें में गजट को लेकर हुई बहस, आदेश के लिए लगी फाइल, तीन जनवरी को होगी सुनवाई

Wed, 07 Dec 2022 07:52 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला संवाद, बदायूं
अमर उजाला संवाद, बदायूं Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 07 Dec 2022 07:52 PM IST
सार

बुधवार को इंतजामिया कमेटी ने उस पर एतराज दाखिल करते हुए कहा कि बौद्ध अनुयायियों की ओर से प्रार्थना दाखिल कराने में हिंदू पक्ष की साजिश है। यह दोनों पक्ष आपस में मिले हुए हैं। हिंदू पक्ष ने अपना पक्ष कमजोर होने के कारण बौद्ध अनुयायियों को तैयार कर प्रार्थना पक्ष दाखिल कराया है। जामा मस्जिद न हिंदुओं की संपत्ति है और न ही बौद्ध अनुयायियों की संपत्ति है। 

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Debate on gazette in Jama Masjid case file for order hearing to be held on January 3 in Badaun
बदायूं जामा मस्जिद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बदायूं शहर की जामा मस्जिद के मुकदमें की बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान न्यायालय में इंतजामिया कमेटी ने बौद्ध अनुयायियों के प्रार्थना पत्र पर एतराज दाखिल किया। इंतजामिया कमेटी ने कहा कि हिंदू पक्ष और बौद्ध अनुयायी दोनों ही आपस में मिले हुए हैं। इससे बौद्ध अनुयायियों का प्रार्थना पत्र निरस्त होने के योग्य है। इसके अलावा न्यायालय में गजट को लेकर बहस हुई। अब फाइल आदेश के लिए चली गई है। तीन जनवरी को अगली सुनवाई होगी।

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बुधवार सुबह 11 बजे अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश पटेल न्यायालय पहुंचे। उनके बाद इंतजामिया कमेटी के वकील असरार अहमद न्यायालय में हाजिर हुए। इस दौरान उन्होंने बौद्ध अनुयायियों के प्रार्थना पत्र पर एतराज दाखिल किया। दरअसल, पिछली सुनवाई पर 29 नवंबर को बौद्ध अनुयायियों के वकील मोहर सिंह शाक्य ने एक प्रार्थना दाखिल कर सबको चौंका दिया था। उसमें कहा गया था कि राजा महीपाल का किला बौद्ध अनुयायियों की संपत्ति है और उसका निर्माण सम्राट अशोक ने कराया था। वकील मोहर सिंह ने इसके कुछ साक्ष्य होने का दावा भी किया था। उस दिन केवल प्रार्थना पत्र दाखिल हुआ था।

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बुधवार को इंतजामिया कमेटी ने उस पर एतराज दाखिल करते हुए कहा कि बौद्ध अनुयायियों की ओर से प्रार्थना दाखिल कराने में हिंदू पक्ष की साजिश है। यह दोनों पक्ष आपस में मिले हुए हैं। हिंदू पक्ष ने अपना पक्ष कमजोर होने के कारण बौद्ध अनुयायियों को तैयार कर प्रार्थना पक्ष दाखिल कराया है। जामा मस्जिद न हिंदुओं की संपत्ति है और न ही बौद्ध अनुयायियों की संपत्ति है। यह आठ सौ साल से जामा मस्जिद शम्सी है। इसमें पांचों वक्त की नमाज पढ़ी जा रही है। वादी पक्ष ने केवल राजनीतिक चमक दिखाने के लिए यह दावा किया है।

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बुधवार को मुकदमें की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने बौद्ध अनुयायियों के प्रार्थना पत्र और इंतजामिया कमेटी के एतराज पर अभी कोई विचार नहीं किया है। न्यायालय में केवल यूनियन ऑफ इंडिया, वक्फ बोर्ड, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुख्य सचिव और पुरातत्व विभाग को पक्षकार बनाए जाने पर जोर दिया गया है। इसी के तहत बुधवार को सुनवाई हुई। मुकदमें की फाइल आदेश के लिए चली गई है। न्यायालय ने अगली सुनवाई तीन जनवरी की तारीख तय की है।


सुनवाई के दौरान पुलिस सुरक्षा में रहेंगे मुकेश पटेल

अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश पटेल ने पिछले दिनों पुलिस अधिकारियों को तहरीर दी थी, जिसमें उन्होंने खुद को खतरा जताते हुए सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की थी। इस पर अधिकारियों की ओर से मुकेश पटेल को सुरक्षा के तौर पर एक सिपाही दिया गया है। यह सिपाही पेशी के दौरान मुकेश पटेल को गांव लेकर आएगा और पेशी के बाद घर छोड़कर आएगा।


 

पहले तो हमें इंतजामिया कमेटी के एतराज की कॉपी नहीं मिली है। अगर वह कह रहे हैं कि बौद्ध अनुयायी और हिंदू पक्ष आपस में मिले हुए हैं तो हम उन्हें बता दें कि हमें आपस में मिलने की जरूरत क्या है। बौद्ध अनुयायी भी इसी समाज से हैं। जब इंतजामिया कमेटी के पास कुछ नहीं है तो वह उल्टे सीधे आरोप लगा रहे हैं। हमारे पास पर्याप्त साक्ष्य हैं। हम कहीं पर कमजोर नहीं है। उनके एतराज का जवाब हम देंगे। हमारी लड़ाई इंतजामिया कमेटी से है। पहले वह हमें कॉपी उपलब्ध कराएं। वेदप्रकाश साहू, वकील हिंदू महासभा

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