{"_id":"614f7ab38ebc3efad63cf517","slug":"daughter-day-badaun-news-bly4608708182","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस पर विशेष : हर मुश्किल में काम आती हैं बेटियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस पर विशेष : हर मुश्किल में काम आती हैं बेटियां
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बदायूं। जिले में कई ऐसी होनहार बेटियां हैं, जो कोरोना काल में किसी अपने की मौत के बाद आर्थिक रूप से टूटे परिवार का सहारा बनीं हैं तो अनेक अपने हुनर की बदौलत परिवार की आजीविका चलाने के साथ-साथ पढ़ाई भी कर रहीं हैं। यही नहीं कुछ बेटियों ने तो मेहनत के दम पर मुकाम भी हासिल किया है। इनमें से कुछ बेटियों का जिक्र हम यहां कर रहे हैं।
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मां कोरोना में चल बसीं, बीमार पिता का बेटियां ही सहारा
शहर के सैय्यदबाड़ा निवासी किशनलाल बतरा की बेटियां मेहनत और कमर्ठता की मिसाल हैं। किशनलाल पहले शराब दुकान के कर्मचारी थे। करीब पंद्रह साल पहले एक एक्सीडेंट में उनकी आंखें चली गईं। इसके बाद से वह घर पर ही हैं। कई साल से उनकी बड़ी बेटी सिमरन और छोटी गौरी ट्यूशन पढ़ाकर घर का खर्च चला रहीं हैं। इस साल 16 मई को मां ममता की कोरोना से राजकीय मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। पिता का इलाज करा रहीं बेटियों ने कोरोना से मां की जान बचाने में अपनी मेहनत की सारी कमाई लगा दी पर उन्हें नहीं बचाया जा सका। अब परिवार तंगी के दौर से गुजर रहा है पर बेटियां किसी की मोहताज नहीं है। ट्यूशन पढ़ाने के साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हैं तो पिता का भी इलाज करवा रहीं हैं। किशनलाल कहते हैं कि उनकी बेटियां किसी तरह बेटों से कमतर नहीं हैं।
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पिता कोरोना में गुजर गए तो स्तुति ने संभाल ली दुकान
शिवपुरम निवासी दीपक डुडेजा जिला अस्पताल के सामने दीपक किराना स्टोर नाम से छोटी सी दुकान चलाते थे। इस साल कोरोना संक्रमण ने उन्हें गिरफ्त में ले लिया तो पत्नी एकता ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराकर इलाज कराया। हालत बिगड़ने पर उन्हें बरेली रेफर किया गया। 21 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। अब परिवार की जिम्मेदारी संभालना कठिन काम हो गया। ऐसे में एकता ने घर संभाला तो उनकी बेटी स्तुति संबल बनी। बारह साल की स्तुति केदारनाथ इंटर कॉलेज में सातवीं की छात्रा हैं। सुबह एकता दुकान खोल लेती हैं तो स्तुति पढ़ाई से लौटकर दोपहर में दुकान पर आ जाती है। मां एकता बताती हैं कि बेटी को इतने कम समय में दुकान की हर चीज के बारे में अच्छी तरह जानकारी हो गई है। वह पूरी तरह दुकान संभाल रही है और घर के कामकाज में भी उनकी मदद करती है। छोटे भाई ओम को पढ़ाने की जिम्मेदारी भी स्तुति की है। उन्हें बेटी पर गर्व है।
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चाट गोलगप्पे बनाती है फिर स्कूल जाती है टॉपर बीना
कादरचौक क्षेत्र के भूड़ा गांव की बीना पढ़ाई में अव्वल होने के साथ ही साथी बच्चों के बीच भी मिसाल है। चार बहनों में वह दो से छोटी है। बीना की मां की मौत कुछ साल पहले हो गई थी। बीना का इकलौता और सबसे छोटा भाई दिव्यांग है, उसकी आंत में भी छेद था। भूमिहीन पिता लालाराम चाट का ठेला लगाते हैं। बीना रात को ठेले के लिए चाट और गोलगप्पे बनाती है ताकि परिवार का भरण पोषण हो सके। स्कूल के प्रधानाध्यापक राजीव कुमार ने भी बीना का सहयोग किया। यह वजह रही कि बीना हमेशा स्कूल की टॉपर रही। उसने मीना मंच में ब्लॉक स्तरीय परीक्षा में भी उत्कृष्ट स्थान पाया। भाई की बीमारी के कारण एक साल तक दिल्ली रहकर उसका इलाज कराया, जिससे उसकी पढ़ाई रुक गई। भाई अब स्वस्थ है, बीना दोबारा स्कूल जाने लगी है। बीना अभिभावक संघ से जुड़कर शिक्षा के लिए बच्चों को प्रेरित करती है।
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अवंतिका और अनामिका हैं परिवार की शान
व्यापारी नेता नवनीत गुप्ता की बेटियां अनामिका और अवंतिका वार्ष्णेय परिवार की शान हैं। अनामिका वार्ष्णेय मदर एथेना स्कूल में टॉपर रहीं। इंटर में बायो विषय में जिला टॉपर रहने के बाद अब सैफई मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कर रही हैं। उनसे प्रेरणा लेकर छोटी बहन अवंतिका वार्ष्णेय ने बिजनेस स्टडी में जिला टॉप करके हाल ही में चार्टर्ड एकाउंटेंट में फाउंडेशन लेवल पास किया है और दिल्ली में अध्ययनरत हैं। मां दर्शना वार्ष्णेय और पिता नवनीत को बेटियों पर गर्व है।
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इस्लामनगर की सृष्टि ने सीए कर बढ़ाया मान
इस्लामनगर। कस्बा निवासी रेडीमेड वस्त्र विक्रेता ललतेश गुप्ता की बेटी सृष्टि गुप्ता ने भी अपने पिता का मान बढ़ाया है। दिल्ली में रहकर उसने सीए की परीक्षा पास की है। सृष्टि ने हाईस्कूल व इंटर में भी चंदौसी के स्कूल में टॉप किया था। संवाद
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पीलीभीत में जज बनकर नाम कर रहीं बिल्सी की निधि
बिल्सी। मोहल्ला संख्या पांच निवासी तेजेंद्र सागर के परिवार में जन्मीं निधि सागर ने नगर का नाम रोशन किया है। निधि ने 2018 की लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शामिल होकर पीसीएस जे उत्तीर्ण की। वह वर्तमान में पीलीभीत में सिविल जज जूनियर डिवीजन के पद पर तैनात हैं। उनका मानना है कि मेहनत का फल जरूर मिलता है। छात्र छात्राओं को स्कूली पढ़ाई के वक्त से ही लक्ष्य निर्धारित करके उसे साधने का प्रयत्न करना चाहिए। संवाद
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मां कोरोना में चल बसीं, बीमार पिता का बेटियां ही सहारा
शहर के सैय्यदबाड़ा निवासी किशनलाल बतरा की बेटियां मेहनत और कमर्ठता की मिसाल हैं। किशनलाल पहले शराब दुकान के कर्मचारी थे। करीब पंद्रह साल पहले एक एक्सीडेंट में उनकी आंखें चली गईं। इसके बाद से वह घर पर ही हैं। कई साल से उनकी बड़ी बेटी सिमरन और छोटी गौरी ट्यूशन पढ़ाकर घर का खर्च चला रहीं हैं। इस साल 16 मई को मां ममता की कोरोना से राजकीय मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। पिता का इलाज करा रहीं बेटियों ने कोरोना से मां की जान बचाने में अपनी मेहनत की सारी कमाई लगा दी पर उन्हें नहीं बचाया जा सका। अब परिवार तंगी के दौर से गुजर रहा है पर बेटियां किसी की मोहताज नहीं है। ट्यूशन पढ़ाने के साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हैं तो पिता का भी इलाज करवा रहीं हैं। किशनलाल कहते हैं कि उनकी बेटियां किसी तरह बेटों से कमतर नहीं हैं।
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पिता कोरोना में गुजर गए तो स्तुति ने संभाल ली दुकान
शिवपुरम निवासी दीपक डुडेजा जिला अस्पताल के सामने दीपक किराना स्टोर नाम से छोटी सी दुकान चलाते थे। इस साल कोरोना संक्रमण ने उन्हें गिरफ्त में ले लिया तो पत्नी एकता ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराकर इलाज कराया। हालत बिगड़ने पर उन्हें बरेली रेफर किया गया। 21 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। अब परिवार की जिम्मेदारी संभालना कठिन काम हो गया। ऐसे में एकता ने घर संभाला तो उनकी बेटी स्तुति संबल बनी। बारह साल की स्तुति केदारनाथ इंटर कॉलेज में सातवीं की छात्रा हैं। सुबह एकता दुकान खोल लेती हैं तो स्तुति पढ़ाई से लौटकर दोपहर में दुकान पर आ जाती है। मां एकता बताती हैं कि बेटी को इतने कम समय में दुकान की हर चीज के बारे में अच्छी तरह जानकारी हो गई है। वह पूरी तरह दुकान संभाल रही है और घर के कामकाज में भी उनकी मदद करती है। छोटे भाई ओम को पढ़ाने की जिम्मेदारी भी स्तुति की है। उन्हें बेटी पर गर्व है।
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चाट गोलगप्पे बनाती है फिर स्कूल जाती है टॉपर बीना
कादरचौक क्षेत्र के भूड़ा गांव की बीना पढ़ाई में अव्वल होने के साथ ही साथी बच्चों के बीच भी मिसाल है। चार बहनों में वह दो से छोटी है। बीना की मां की मौत कुछ साल पहले हो गई थी। बीना का इकलौता और सबसे छोटा भाई दिव्यांग है, उसकी आंत में भी छेद था। भूमिहीन पिता लालाराम चाट का ठेला लगाते हैं। बीना रात को ठेले के लिए चाट और गोलगप्पे बनाती है ताकि परिवार का भरण पोषण हो सके। स्कूल के प्रधानाध्यापक राजीव कुमार ने भी बीना का सहयोग किया। यह वजह रही कि बीना हमेशा स्कूल की टॉपर रही। उसने मीना मंच में ब्लॉक स्तरीय परीक्षा में भी उत्कृष्ट स्थान पाया। भाई की बीमारी के कारण एक साल तक दिल्ली रहकर उसका इलाज कराया, जिससे उसकी पढ़ाई रुक गई। भाई अब स्वस्थ है, बीना दोबारा स्कूल जाने लगी है। बीना अभिभावक संघ से जुड़कर शिक्षा के लिए बच्चों को प्रेरित करती है।
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अवंतिका और अनामिका हैं परिवार की शान
व्यापारी नेता नवनीत गुप्ता की बेटियां अनामिका और अवंतिका वार्ष्णेय परिवार की शान हैं। अनामिका वार्ष्णेय मदर एथेना स्कूल में टॉपर रहीं। इंटर में बायो विषय में जिला टॉपर रहने के बाद अब सैफई मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कर रही हैं। उनसे प्रेरणा लेकर छोटी बहन अवंतिका वार्ष्णेय ने बिजनेस स्टडी में जिला टॉप करके हाल ही में चार्टर्ड एकाउंटेंट में फाउंडेशन लेवल पास किया है और दिल्ली में अध्ययनरत हैं। मां दर्शना वार्ष्णेय और पिता नवनीत को बेटियों पर गर्व है।
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इस्लामनगर की सृष्टि ने सीए कर बढ़ाया मान
इस्लामनगर। कस्बा निवासी रेडीमेड वस्त्र विक्रेता ललतेश गुप्ता की बेटी सृष्टि गुप्ता ने भी अपने पिता का मान बढ़ाया है। दिल्ली में रहकर उसने सीए की परीक्षा पास की है। सृष्टि ने हाईस्कूल व इंटर में भी चंदौसी के स्कूल में टॉप किया था। संवाद
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पीलीभीत में जज बनकर नाम कर रहीं बिल्सी की निधि
बिल्सी। मोहल्ला संख्या पांच निवासी तेजेंद्र सागर के परिवार में जन्मीं निधि सागर ने नगर का नाम रोशन किया है। निधि ने 2018 की लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शामिल होकर पीसीएस जे उत्तीर्ण की। वह वर्तमान में पीलीभीत में सिविल जज जूनियर डिवीजन के पद पर तैनात हैं। उनका मानना है कि मेहनत का फल जरूर मिलता है। छात्र छात्राओं को स्कूली पढ़ाई के वक्त से ही लक्ष्य निर्धारित करके उसे साधने का प्रयत्न करना चाहिए। संवाद