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शक्ति स्वरूपा : आस्था का केंद्र है खितौरा का प्राचीन देवी मंदिर
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खितौरा का देवी मंदिर। संवा
- फोटो : BADAUN
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उघैती। गांव खितौरा में प्राचीन देवी मंदिर भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है। मंदिर में तीन देवियों की प्रतिमाएं हैं जहां हर साल नवरात्र पर भक्तों की भारी भीड़ जुटती है।
इस मंदिर में जरीफनगर के गांव कादराबाद की काली देवी, बुलंदशहर के कर्णवास की देवी व अलीगढ़ के बेलौन की भवानी के प्रसिद्ध देवी पीठ का संगम है। हालांकि तीनों देवियों की प्रतिमाएं यहां कितने साल से है, इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। इलाके में किवदंती है कि खितौरा के ठाकुर स्व. डंबर सिंह को एक रात तीन देवियों ने स्वप्न दिया कि वह एक पुराने कुएं में बंद है। सुबह उठकर उन्होंने ग्रामीणों को यह बात बताई तो सभी लोगों ने कुएं की खोदाई शुरू कर दी। अचानक वहां दो मूर्तियां नजर आ गईं। विधि विधान से आसपास की सारी जमीन पर मंदिर बना दिया गया। इसके बाद डंबर सिंह को दोनों प्रतिमाओं ने सपना दिया कि कादराबाद वाली सहेली को भी इस मंदिर में लाओ। तब विधि विधान से कादराबाद से भी देवी प्रतिमा को लाया गया।
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आषाढ़ माह में लगता है मेला
आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष में देवी मंदिर पर लाखों श्रद्धालु देवियों के दर्शन कर जात लगाते हैं। मैया को पूरी साज सज्जा के साथ शृंगार कर नारियल भेंट करते हैं। इन दिनों मंदिर परिसर में मेला लगता है। तीनों देवियों की पूजा अर्चना के लिए पूरी साल भंडारे, कीर्तन जागरण एवं हवन पूजन जैसे अनुष्ठान होते रहते हैं। मान्यता है कि जो भक्त कर्णवास, बेलौन एवं कादराबाद के मंदिरों में देवी के दर्शन करते हैं। उन्हें यहां पर आकर तीनों देवियों के दर्शन करने होते हैं। इसके बाद ही भक्तों की पूजा स्वीकार होती है। संवाद
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इस मंदिर में जरीफनगर के गांव कादराबाद की काली देवी, बुलंदशहर के कर्णवास की देवी व अलीगढ़ के बेलौन की भवानी के प्रसिद्ध देवी पीठ का संगम है। हालांकि तीनों देवियों की प्रतिमाएं यहां कितने साल से है, इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। इलाके में किवदंती है कि खितौरा के ठाकुर स्व. डंबर सिंह को एक रात तीन देवियों ने स्वप्न दिया कि वह एक पुराने कुएं में बंद है। सुबह उठकर उन्होंने ग्रामीणों को यह बात बताई तो सभी लोगों ने कुएं की खोदाई शुरू कर दी। अचानक वहां दो मूर्तियां नजर आ गईं। विधि विधान से आसपास की सारी जमीन पर मंदिर बना दिया गया। इसके बाद डंबर सिंह को दोनों प्रतिमाओं ने सपना दिया कि कादराबाद वाली सहेली को भी इस मंदिर में लाओ। तब विधि विधान से कादराबाद से भी देवी प्रतिमा को लाया गया।
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आषाढ़ माह में लगता है मेला
आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष में देवी मंदिर पर लाखों श्रद्धालु देवियों के दर्शन कर जात लगाते हैं। मैया को पूरी साज सज्जा के साथ शृंगार कर नारियल भेंट करते हैं। इन दिनों मंदिर परिसर में मेला लगता है। तीनों देवियों की पूजा अर्चना के लिए पूरी साल भंडारे, कीर्तन जागरण एवं हवन पूजन जैसे अनुष्ठान होते रहते हैं। मान्यता है कि जो भक्त कर्णवास, बेलौन एवं कादराबाद के मंदिरों में देवी के दर्शन करते हैं। उन्हें यहां पर आकर तीनों देवियों के दर्शन करने होते हैं। इसके बाद ही भक्तों की पूजा स्वीकार होती है। संवाद
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