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बुजुर्ग बोले-परंपरागत तरीकों को भूलती जा रही युवा पीढ़ी
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बदायूं। युवा पीढ़ी त्योहारों के परंपरागत तरीकों को भूलती जा रही है। आपाधापी के जमाने में दिवाली पटाखों और आतिशबाजी दगाने तक ही सीमित होकर रह गई है। इसमें लाखों रुपया बर्बाद होता है। साथ ही वायु और ध्वनि प्रदूषण भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। पुराने जमाने में दीपावली पर दिखावा नहीं होता था। एक सप्ताह तक दिवाली मिलन समारोह होता था। सबके घर आते जाते, प्रेम से मिलते, उठते, बैठते थे। दिवाली को लेकर बुजुर्गों से बात करने पर उन्होंने अपने समय के त्योहार के बारे में बताया।
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आधुनिकता के दौर में काफी कुछ बदल चुका है। त्योहार तो आते हैं, लेकिन जो उत्साह पांच दशक पहले तक था वह अब नहीं है। युवा पीढ़ी तो परंपराएं ही भूलती जा रही है।
-ओमवती पांडेय
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त्योहार का अपना महत्व होता है। दिवाली हो या होली अब परंपरागत तरीकों के स्थान पर आधुनिकता ने जगह बना ली है। आज की पीढ़ी तो पुरानी परंपराओं को महत्व ही नहीं देती।
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-राममूर्ति मिश्रा
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दिवाली की तैयारियां एक महीने पहले शुरू हो जाती थीं, पांच दिन के दीपोत्सव का संयुक्त परिवार में अलग ही महत्व था। अब तो संयुक्त परिवार ही टूटने लगे हैं।
-महेश चंद्र शर्मा
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अब तो हर ओर आधुनिकता हावी है। दिवाली से एक महीने पहले घरों की लिपाई-पुताई चालू हो जाती थी। दीपक मिट्टी के होते थे। पिछले छह-सात दशक में काफी कुछ बदला है।
-झांझन राम
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आधुनिकता के दौर में काफी कुछ बदल चुका है। त्योहार तो आते हैं, लेकिन जो उत्साह पांच दशक पहले तक था वह अब नहीं है। युवा पीढ़ी तो परंपराएं ही भूलती जा रही है।
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-ओमवती पांडेय
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त्योहार का अपना महत्व होता है। दिवाली हो या होली अब परंपरागत तरीकों के स्थान पर आधुनिकता ने जगह बना ली है। आज की पीढ़ी तो पुरानी परंपराओं को महत्व ही नहीं देती।
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-राममूर्ति मिश्रा
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दिवाली की तैयारियां एक महीने पहले शुरू हो जाती थीं, पांच दिन के दीपोत्सव का संयुक्त परिवार में अलग ही महत्व था। अब तो संयुक्त परिवार ही टूटने लगे हैं।
-महेश चंद्र शर्मा
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अब तो हर ओर आधुनिकता हावी है। दिवाली से एक महीने पहले घरों की लिपाई-पुताई चालू हो जाती थी। दीपक मिट्टी के होते थे। पिछले छह-सात दशक में काफी कुछ बदला है।
-झांझन राम