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‘जवानी में समझा वो बचपन की बातें...’
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बदायूं। न्यू आदर्श कॉलोनी में संस्था गजलिका की ओर से कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम संस्था की ओर से वयोवृद्ध शायर दिलकश बदायूंनी को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने सुनाया कि ‘इत्तेफाकन आ गई हंसी मेरे होंठों पर, एक जमाना चाहिए फिर मुस्कारने के लिए’।
इसी क्रम में ककराला के शायर चांद ककरालवी ने अपनी पंक्तियों पर खूब ताली बटोरीं। उन्होंने पढ़ा कि ‘अकेले हो गए तो जान पाये, दरो दीवार कैसे बोलते हैं।’
बरेली के ताहिर सकरैनी ने सुनाया- ‘मुझे इस बात का सदमा हुआ है, तेरा लहजा बड़ा बदला हुआ है।’
कवि विशाल गाफिल ने सुनाया ‘क्या बंटी घर की रसोई थालियां तक बंट गईं, चूल्हे चम्मच कप कटोरी प्यालियां तक बंट गईं।’
संचालन कर रहे डॉ निशांत असीम ने सुनाया-‘जवानी में समझा वो बचपन की बातें, कि जादू की कोई छड़ी ही नही थीं।’
इस दौरान डॉ. कंचन गुप्ता, डॉ शिखा शाक्य, कुंती यादव, सचिन कुमार आदि मौजूद रहे। संवाद
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने सुनाया कि ‘इत्तेफाकन आ गई हंसी मेरे होंठों पर, एक जमाना चाहिए फिर मुस्कारने के लिए’।
इसी क्रम में ककराला के शायर चांद ककरालवी ने अपनी पंक्तियों पर खूब ताली बटोरीं। उन्होंने पढ़ा कि ‘अकेले हो गए तो जान पाये, दरो दीवार कैसे बोलते हैं।’
बरेली के ताहिर सकरैनी ने सुनाया- ‘मुझे इस बात का सदमा हुआ है, तेरा लहजा बड़ा बदला हुआ है।’
कवि विशाल गाफिल ने सुनाया ‘क्या बंटी घर की रसोई थालियां तक बंट गईं, चूल्हे चम्मच कप कटोरी प्यालियां तक बंट गईं।’
संचालन कर रहे डॉ निशांत असीम ने सुनाया-‘जवानी में समझा वो बचपन की बातें, कि जादू की कोई छड़ी ही नही थीं।’
इस दौरान डॉ. कंचन गुप्ता, डॉ शिखा शाक्य, कुंती यादव, सचिन कुमार आदि मौजूद रहे। संवाद