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युवक ने सल्फास खाकर दी जान

Sun, 17 Jul 2016 12:08 AM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Sun, 17 Jul 2016 12:08 AM IST
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पत्नी से चल रहे विवाद पर पंकज ने उठाया आत्मघाती कदम 
 पत्नी से विवाद के बाद अपने बेटों से नहीं मिल पाने से कुंठित युवक ने शुक्रवार को सल्फास खा ली। इलाज के दौरान उसकी बरेली के निजी अस्पताल में मौत हो गई। मौत को गले लगाने से एक दिन पहले वह ससुराल गया था लेकिन पत़्नी ने तीनों बेटों को उसके पास तक नहीं पहुंचने दिया। मृतक के पिता ने बहू समेत उसके भाइयों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोतवाली में तहरीर सौंप दी है।
आत्महत्या का मामला मोहल्ला साहूकारा का है। मोहल्ले के राजवीर सिंह का 32 वर्षीय पुत्र पंकज पेशे से फोटोग्राफर था। वह बृहस्पतिवार को घर से ससुराल बदायूं में विजयनगर कॉलोनी निवासी परमेश्वरी के घर जाने की कहकर निकला था। आरोप है कि पंकज से ससुराल में उसकी पत़्नी लक्ष्मी ने न तो बात की और न ही तीनों बेटों से पंकज को मिलने दिया। शाम को घर लौटकर पंकज ने परिवार के लोगों के सामने अपनी पीड़ा बयां की। शुक्रवार दोपहर में वह फिर घर से निकल गया। 
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रास्ते में पंकज ने कहां जाकर सल्फास खा ली, यह तो घरवालों को भी नहीं पता लेकिन भाई बंटी को जब पता लगा कि पंकज बेहोशी की हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पड़ा है तो घरवालों के साथ वह अस्पताल पहुंच गया। घरवाले पहले उसे जिला अस्पताल फिर बरेली लेकर चले गए। पंकज ने इलाज के दौरान शुक्रवार रात में दमतोड़ दिया। मृतक के पिता राजवीर ने बताया कि पंकज की पत़्नी करीब तीन साल से मायके में ही रहती है। पिछले महीनों उसने पंकज के खिलाफ हर्जाना का दावा भी ठोंक दिया था। जबकि पंकज उसे अपने रखने की कोशिश में जुटा रहा। उसके तीन बच्चों में सबसे बड़ा केशव सात साल का है। उसने बहू समेत उसके भाइयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने केे लिए कोतवाली पुलिस को तहरीर भी सौंप दी है। इधर, कोतवाल गोपींचद्र यादव ने बताया कि आत्महत्या के बारे में पुलिस को कोई सुचना नहीं है।
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...तो बच जाता पंकज
उझानी। पंकज ने शुक्रवार दोपहर में सल्फास खाई थी। इसके बाद वह उल्टियां करते हुए खुद ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचा था लेकिन अस्पताल में उसे ढंग से ट्रीटमेंट नहीं मिल पाया। घरवालों को भी करीब दो घंटा बाद भनक लग पाई थी। तब तक वह अस्पताल में ही पड़ा उल्टियां करता रहा। घरवाले उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे तब तक काफी देर हो चुकी थी। जानकारों की मानें तो अस्पताल में उसे बेहतर इलाज मिल जाता तो वह बच सकता था। 
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