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धर्मस्थल की दीवार गिराकर  बनाया रास्ता, तनाव

Sun, 03 Jul 2016 11:19 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Sun, 03 Jul 2016 11:19 PM IST
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The wall of the shrine built by knocking the way, stress
धर्मस्थल की दीवार गिराकर  बनाया रास्ता, तनाव - फोटो : अमर उजाला
अलापुर थाने के गांव बिसनपुरी म्याऊं का मामला
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मौके पर पहुंचे एसडीएम, सीओ काम रुकवाया

 अलापुर थाना क्षेत्र के म्याऊं के मजरा बिसनपुरी में एक व्यक्ति ने अपने प्लाट के लिए रास्ता बनाने के लिए धर्मस्थल की दीवार गिरा दी। इस बारे में लोगों को पता लगा तो गुस्सा दौड़ गया। गांव में तनाव की खबर पर एसडीएम ओपी तिवारी और सीओ श्योराज सिंह अलापुर पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। फिलहाल काम रुकवा दिया गया है। दोनों पक्षों की लिखित सहमति ली गई है कि कोई निर्माण कार्य नहीं करेंगे। ईद निपटने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 
अलापुर थाने के गांव बिसनपुरी निवासी रामासरे ने करीब 14 साल पहले म्याऊं निवासी एक व्यक्ति से कुछ जमीन खरीदी थी। कीमत देने के बाद भी जमीन का बैनामा नहीं कराया गया। आरोप है कि बैनामा न होने का फायदा इस व्यक्ति ने उठाया। जमीन की कीमत बढने पर उसने फिर से कब्जा कर लिया। विवाद होने पर प्रशासनिक अफसर भी पहुंचे। बैनामा न होने की वजह से खरीददार रामआसरे की एक न चली।
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जमीन बेचने के बाद उस पर कब्जा करने वाले ने हाल ही में यहां निर्माण शुरू करा दिया। इस प्लाट के पास ही एक मंदिर बना हुआ है। शनिवार रात में प्लाट तक रास्ता निकालने के लिए मंदिर की दीवार ही ढहा दी और रात में ही करीब डेढ़ फीट ऊंचा कच्चा रास्ता भी बना लिया। सुबह होने पर गांव के लोगों को इस बारे में पता लगा। इससे गांव में तनाव का माहौल बन गया। सैकड़ों लोग मौके पर जमा हो गए। खबर मिलने पर एसडीएम ओपी तिवारी और सीओ श्योराज सिंह अलापुर पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। निर्माण कार्य रुकवा दिया गया है। निर्माण करा रहे व्यक्ति का कहना है कि उसकी मंशा धार्मिक स्थल पर कब्जे की नहीं है। सिर्फ प्लाट तक ट्रैक्टर-ट्रॉली पहुंच सके इसके लिए अस्थाई रास्ता बनाया गया। एसडीएम ओपी तिवारी का कहना है कि दोनों पक्षों से सहमति ले ली गई है। कोई नई परंपरा शुरू नहीं होने दी जाएगी। ईद के बाद पैमाइश कराकर कार्रवाई की जाएगी। तब तक मौके पर यथास्थित रखी जाएगी। लेखपाल चंद्र प्रकाश का कहना है कि जिस स्थान पर मंदिर है वह स्थान खतौनी में ग्राम समाज के बंजर के नाम से दर्ज है। हालांकि, खसरा में यह रकवा धर्मस्थल के नाम से दर्ज है।
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