{"_id":"56fec51c4f1c1b2d45f00105","slug":"strict-court-so-cat-summoned","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोर्ट सख्त, एसओ बिल्सी को तलब किया","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कोर्ट सख्त, एसओ बिल्सी को तलब किया
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2016 12:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पूछा, क्यों न दी जाए तीन महीने की सजा
बिना पड़ताल फर्जी रोपकार पर छोड़ दिए वारंटी
फर्जी रोपकार की बिना पड़ताल किए ही एसओ बिल्सी ने नरेशपाल यादव ने दहेज उत्पीडन के वारंटियों को थाने से छोड़ दिया। मामला जब कोर्ट के संज्ञान में आया तो कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। एसीजेएम द्वितीय संगीता कुमारी ने इस मामले में एसओ बिल्सी को व्यक्तिगत रूप से 14 अप्रैल को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। एसओ से यह भी पूछा है कि क्यों न उनको तीन महीने की सजा सुनाई जाए। कोर्ट ने फर्जी रोपकार बनाने के मामले में एक वकील और उसके मुंशी को भी फटकार लगाई है।
मुजरिया थाने के गांव मिश्रीपुर मकुइया निवासी सूरजपाल ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत सतीश, परमेश्वरी और उर्मिला के खिलाफ दहेज उत्पीडन का परिवाद दाखिल किया था। कोर्ट ने आरोपियों को तलब किया। जब आरोपी कोर्ट में हाजिर नहीं हुए तो इनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया। वारंट जारी होने के बाद थाना पुलिस जब आरोपियों को गिरफ्तार करने पहुंची तो आरोपियों ने पुलिस को रोपकार हाजिरी दिखाकर बताया कि उन्होंने अपने वकील द्वारा कोर्ट में आपत्ति दाखिल कर दी है। कोर्ट ने वारंट स्थगित कर दिया है। यह रोपकार फर्जी था। थाने के मुंशी उमेश ने रोपकार की बिना पड़ताल किए वारंट और रोपकार कोर्ट को वापस कर दिया।
शुक्रवार को वादी सूरजपाल ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर वारंट जारी होने के बाद भी पुलिस पर आरोपियों को गिरफ्तार न करने का आरोप लगाया। कोर्ट ने जब पत्रावली देखी तो पता लगा कि आरोपियों के वकील के मुंशी ने फर्जी रोपकार बनाकर भेज दिया था। इसी रोपकार के आधार पर पुलिस ने हिरासत में लिए गए वारंटियों को छोड़ दिया था। इस पर न्यायिक मजिस्ट्रेट ने वकील और उनके मुंशी को तलब सख्त लहजे में हिदायत दी। कोर्ट ने एसओ बिल्सी नरेशपाल यादव को 14 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश देने के साथ उनसे यह भी पूछा है कि बिना रोपकार की पड़ताल के आरोपियों को छोड़ने पर क्यों न उनको तीन महीने की सजा दी जाए। दो अन्य मामलों में कोर्ट ने इंस्पेक्टर दातागंज और सहसवान को भी तलब किया है।
बिना पड़ताल फर्जी रोपकार पर छोड़ दिए वारंटी
फर्जी रोपकार की बिना पड़ताल किए ही एसओ बिल्सी ने नरेशपाल यादव ने दहेज उत्पीडन के वारंटियों को थाने से छोड़ दिया। मामला जब कोर्ट के संज्ञान में आया तो कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। एसीजेएम द्वितीय संगीता कुमारी ने इस मामले में एसओ बिल्सी को व्यक्तिगत रूप से 14 अप्रैल को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। एसओ से यह भी पूछा है कि क्यों न उनको तीन महीने की सजा सुनाई जाए। कोर्ट ने फर्जी रोपकार बनाने के मामले में एक वकील और उसके मुंशी को भी फटकार लगाई है।
मुजरिया थाने के गांव मिश्रीपुर मकुइया निवासी सूरजपाल ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत सतीश, परमेश्वरी और उर्मिला के खिलाफ दहेज उत्पीडन का परिवाद दाखिल किया था। कोर्ट ने आरोपियों को तलब किया। जब आरोपी कोर्ट में हाजिर नहीं हुए तो इनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया। वारंट जारी होने के बाद थाना पुलिस जब आरोपियों को गिरफ्तार करने पहुंची तो आरोपियों ने पुलिस को रोपकार हाजिरी दिखाकर बताया कि उन्होंने अपने वकील द्वारा कोर्ट में आपत्ति दाखिल कर दी है। कोर्ट ने वारंट स्थगित कर दिया है। यह रोपकार फर्जी था। थाने के मुंशी उमेश ने रोपकार की बिना पड़ताल किए वारंट और रोपकार कोर्ट को वापस कर दिया।
विज्ञापन
शुक्रवार को वादी सूरजपाल ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर वारंट जारी होने के बाद भी पुलिस पर आरोपियों को गिरफ्तार न करने का आरोप लगाया। कोर्ट ने जब पत्रावली देखी तो पता लगा कि आरोपियों के वकील के मुंशी ने फर्जी रोपकार बनाकर भेज दिया था। इसी रोपकार के आधार पर पुलिस ने हिरासत में लिए गए वारंटियों को छोड़ दिया था। इस पर न्यायिक मजिस्ट्रेट ने वकील और उनके मुंशी को तलब सख्त लहजे में हिदायत दी। कोर्ट ने एसओ बिल्सी नरेशपाल यादव को 14 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश देने के साथ उनसे यह भी पूछा है कि बिना रोपकार की पड़ताल के आरोपियों को छोड़ने पर क्यों न उनको तीन महीने की सजा दी जाए। दो अन्य मामलों में कोर्ट ने इंस्पेक्टर दातागंज और सहसवान को भी तलब किया है।
विज्ञापन