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छह महीने बाद नाटकीय ढंग से मिली अगवा किशोरी
बदायूं, ब्यूरो
Updated Tue, 21 Feb 2017 11:31 PM IST
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परिवार के लोग विधानसभा के सामने कर चुके आत्मदाह की कोशिश
पिता ने आरोपियों को बचाने में लगाया था राज्यमंत्री पर आरोप
अपहरण के मामले में तीन आरोपियों में एक अब भी फरार
मूसाझाग थाने के गांव किसरुआ से छह महीने पहले अगवा किशोरी मंगलवार को नाटकीय ढंग से घर पहुंच गई। बकौल पुलिस उसे पुलिस ने बदायूं के रोडवेज बस अड्डे से बरामद किया। बुधवार को मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत उसके बयान दर्ज कराए जाएंगे। पुलिस का दावा है कि किशोरी खुद ही नोएडा से बदायूं आई थी। किशोरी के पिता और दूसरे परिजन बेटी को तलाशने में पुलिस की लापरवाही को लेकर लखनऊ में तीन बार विधानसभा के सामने आत्मदाह की कोशिश कर चुके हैं। अपहरण के तीन आरोपियों में से एक आरोपी धीरपाल अब भी फरार है। दो को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है।
किशोरी के पिता ने आरोप लगाया था कि जिले से प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री ओमकार सिंह यादव के दबाव में पुलिस उसकी बेटी का पता नहीं लगा रही है। उसका कहना है कि फरार आरोपी धीरपाल राज्यमंत्री का रिश्तेदार है इसलिए वह उसकी मदद कर रहे हैं। जबकि राज्यमंत्री ओमकार सिंह इस मामले से ही अनिभिज्ञता जताते हुए आरोप को निराधार और गलत बताते रहे हैं।
किसरुआ गांव के एक व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि उसकी 17 वर्षीय बेटी को 13 अगस्त 2016 को गांव के ही धीरपाल, धीरा (सगे भाई) और अशोक ने अगवा कर लिया था। तीनों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने अशोक और धीरा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था लेकिन धीरपाल फरार है। पुलिस किशोरी का भी पता नहीं लगा सकी थी। पिता ने बेटी की बरामदगी को लेकर 16 दिसंबर को पहली बार विधानसभा के सामने आत्मदाह की कोशिश की तो शासन से लेकर जिले तक की पुलिस में हड़कंप मच गया। इसके बाद किशोरी की तलाश के लिए चार टीमें लगाई गईं लेकिन किशोरी का पता नहीं चला तो 31 दिसंबर को फिर पीड़ित परिवार लखनऊ पहुंचा। विधानसभा के सामने पिता ने फिर आत्मदाह की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने किसी तरह से उसको बचाया। भरोसा दिया गया कि बेटी को पुलिस जल्द खोज लेगी।
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आश्वासन के बाद भी पिता को जब इंसाफ मिलता नजर नहीं आया तो उसने 2 जनवरी को परिवार के साथ विधानसभा के सामने खुद को आग लगा ली। इसमें उसकी पत्नी झुलस गई। छह महीने तक पूरे मामले में बार-बार नाटकीय मोड़ आते रहे। सोमवार को पुलिस की एक टीम ने किशोरी को रोडवेज के पास से कब्जे में ले लिया। किशोरी का कहना है कि उसे अगवा कर ले जाया गया था। आरोपी धीरपाल ने उसे नोएडा, शिमला समेत कई स्थानों पर रखा। रविवार को वह नोएडा से छिपते-छिपाते बदायूं पहुंची। यहां रोडवेज बस अड्डे के पास से पुलिस ने उसे पकड़ लिया। किशोरी फिलहाल महिला थाने में है। बुधवार को मजिस्ट्रेट के सामने उसके बयान दर्ज कराए जाएंगे।
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मामले में दो आरोपियों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। एक फरार आरोपी के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की जा चुकी है। किशोरी लनोएडा से रोडवेज बस से बदायूं आई थी। पुलिस की एक टीम ने उसे रोडवेज अड्डे से दोपहर में कब्जे में ले लिया। अब उसके बयान दर्ज कराए जाएंगे।
-अनिल कुमार यादव, एसपी सिटी
पिता ने आरोपियों को बचाने में लगाया था राज्यमंत्री पर आरोप
अपहरण के मामले में तीन आरोपियों में एक अब भी फरार
मूसाझाग थाने के गांव किसरुआ से छह महीने पहले अगवा किशोरी मंगलवार को नाटकीय ढंग से घर पहुंच गई। बकौल पुलिस उसे पुलिस ने बदायूं के रोडवेज बस अड्डे से बरामद किया। बुधवार को मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत उसके बयान दर्ज कराए जाएंगे। पुलिस का दावा है कि किशोरी खुद ही नोएडा से बदायूं आई थी। किशोरी के पिता और दूसरे परिजन बेटी को तलाशने में पुलिस की लापरवाही को लेकर लखनऊ में तीन बार विधानसभा के सामने आत्मदाह की कोशिश कर चुके हैं। अपहरण के तीन आरोपियों में से एक आरोपी धीरपाल अब भी फरार है। दो को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है।
किशोरी के पिता ने आरोप लगाया था कि जिले से प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री ओमकार सिंह यादव के दबाव में पुलिस उसकी बेटी का पता नहीं लगा रही है। उसका कहना है कि फरार आरोपी धीरपाल राज्यमंत्री का रिश्तेदार है इसलिए वह उसकी मदद कर रहे हैं। जबकि राज्यमंत्री ओमकार सिंह इस मामले से ही अनिभिज्ञता जताते हुए आरोप को निराधार और गलत बताते रहे हैं।
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किसरुआ गांव के एक व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि उसकी 17 वर्षीय बेटी को 13 अगस्त 2016 को गांव के ही धीरपाल, धीरा (सगे भाई) और अशोक ने अगवा कर लिया था। तीनों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने अशोक और धीरा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था लेकिन धीरपाल फरार है। पुलिस किशोरी का भी पता नहीं लगा सकी थी। पिता ने बेटी की बरामदगी को लेकर 16 दिसंबर को पहली बार विधानसभा के सामने आत्मदाह की कोशिश की तो शासन से लेकर जिले तक की पुलिस में हड़कंप मच गया। इसके बाद किशोरी की तलाश के लिए चार टीमें लगाई गईं लेकिन किशोरी का पता नहीं चला तो 31 दिसंबर को फिर पीड़ित परिवार लखनऊ पहुंचा। विधानसभा के सामने पिता ने फिर आत्मदाह की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने किसी तरह से उसको बचाया। भरोसा दिया गया कि बेटी को पुलिस जल्द खोज लेगी।
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आश्वासन के बाद भी पिता को जब इंसाफ मिलता नजर नहीं आया तो उसने 2 जनवरी को परिवार के साथ विधानसभा के सामने खुद को आग लगा ली। इसमें उसकी पत्नी झुलस गई। छह महीने तक पूरे मामले में बार-बार नाटकीय मोड़ आते रहे। सोमवार को पुलिस की एक टीम ने किशोरी को रोडवेज के पास से कब्जे में ले लिया। किशोरी का कहना है कि उसे अगवा कर ले जाया गया था। आरोपी धीरपाल ने उसे नोएडा, शिमला समेत कई स्थानों पर रखा। रविवार को वह नोएडा से छिपते-छिपाते बदायूं पहुंची। यहां रोडवेज बस अड्डे के पास से पुलिस ने उसे पकड़ लिया। किशोरी फिलहाल महिला थाने में है। बुधवार को मजिस्ट्रेट के सामने उसके बयान दर्ज कराए जाएंगे।
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मामले में दो आरोपियों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। एक फरार आरोपी के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की जा चुकी है। किशोरी लनोएडा से रोडवेज बस से बदायूं आई थी। पुलिस की एक टीम ने उसे रोडवेज अड्डे से दोपहर में कब्जे में ले लिया। अब उसके बयान दर्ज कराए जाएंगे।
-अनिल कुमार यादव, एसपी सिटी