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हिस्ट्रीशीटर के हत्यारोपी घायल ग्रामीण ने अस्पताल में दम तोड़ा
बदायूं।
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:12 AM IST
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अस्रपताल पहुंचे एसपी।
- फोटो : अमर उजाला
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पुलिस कस्टडी में जिला अस्पताल में चल रहा था तुलसीराम का इलाज
कादरचौक के हिस्ट्रीशीटर वीरसहाय की हत्या में था बेटे समेत नामजद
एसपी सिटी के साथ पुलिस कर्मी अस्पताल पहुंचे, रिश्तेदारों से की बात
कादरचौक निवासी हिस्ट्रीशीटर वीरसहाय की शनिवार शाम को हुई हत्या के दौरान घायल दूसरे पक्ष के तुलसीराम की गिरफ्तारी के बाद हालत बिगड़ गई। कादरचौक थाने से देर रात ही उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार के बाद पुलिस उसे वापस ले गई लेकिन रविवार पूर्वाह्न में उसे फिर लाकर भर्ती कराना पड़ा। इलाज के दौरान तुलसीराम की रविवार शाम को मौत हो गई। पुलिस कस्टडी में इलाज के दौरान हत्यारोपी की मौत की भनक लगते ही एसपी सिटी कमल किशोर के साथ पुलिस अफसर मौके पर पहुंच गए। उन्होंने मृतक के रिश्तेदारों से बात की। रिश्तेदारों ने हालांकि पुलिस पर किसी तरह का आरोप नहीं लगाया है लेकिन अफसर माहौल पर नजर रखे हुए हैं।
कादरचौक के गांव मोहननगला में शनिवार शाम को दो पक्षों में घूरे को लेकर विवाद हो गया। दोनों पक्षों में चाकू भी चले थे, फायरिंग भी हुई थी। गोली लगने से हिस्ट्रीशीटर वीरसहाय की मौके पर ही मौत हो गई थी। दूसरे पक्ष के तुलसीराम (42) के पेट में चाकू लगा था। चूंकि वीरसहाय के बेटे संजीव ने तुलसीराम, उसके बेटे सुधीर, भाई नरोत्तम, भोले और पड़ोसी प्रेमसिंह को नामजद कराया था। पुलिस ने नामजदों में तुलसीराम, सुधीर और प्रेमसिंह को घटना के बाद देर रात ही दबोच लिया था। घायल तुलसीराम की रात में ही हालत बिगड़ गई। पुलिस ने मामला हल्के में लेते हुए उसको जिला अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन हालत में सुधार होने पर वापस कादरचौक थाने ले गए। तुलसीराम की रविवार को फिर हालत खराब हुई तो सिपाही उमेश प्रताप और होमगार्ड महेश उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंच गए।
इलाज के दौरान शाम चार बजे तुलसीराम ने पेट दर्द की शिकायत की। चूंकि उसके पेट में चाकू लगा था, सो डॉक्टर भी उसे बेहतर चिकित्सा मुहैया कराने में जुट गए। डॉ.राजेश कुमार ने बताया कि तुलसीराम ने करीब पांच बजे दमतोड़ दिया। मौत से घबराए सिपाही उमेश ने तुरंत ही थानाध्यक्ष कादरचौक को कॉल कर अवगत करा दिया। देखते ही देखते एसपी सिटी कमल किशोर, सीओ उझानी निर्मल सिंह विष्ट पुलिस फोर्स के साथ अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने मोहननगला के प्रधान अनिल द्विवेदी और मृतक के रिश्तेदार रामपाल से बात की। हालांकि अस्पताल का माहौल देर रात तक सामान्य नजर आया लेकिन पुलिस अफसर हर स्थिति पर नजर रखे रहे। तुलसीराम का शव समाचार लिखे जाने तक पुलिस के कब्जे में था।
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मृतक के बेटे को पुलिस ने सुबह जेल भेजा
बदायूं। हिस्ट्रीशीटर वीरसहाय की हत्या की मामले में गिरफ्तार तुलसीराम, उसके बेटे सुधीर और पड़ोसी प्रेमसिंह से पुलिस ने शनिवार देर रात पूछताछ भी की थी। तुलसीराम घायल था, यह बात थानाध्यक्ष कादरचौक को पता थी। पुलिस ने सुबह प्रेमसिंह और सुुुधीर का चालान कर दिया। जबकि सुधीर के पिता को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने इस बात पर गौर नहीं किया कि वह तुलसीराम की हालत में सुधार होने तक सुधीर का चालान नहीं करती।
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प्रधान बोला, पुलिस ने मौत के बाद दी सूचना
बदायूं। मोहन नगला के प्रधान अनिल द्विवेदी ने बताया कि तुलसीराम घायल था। यह बात पुलिस के अलावा किसी और को पता नहीं थी। पुलिस ने अपनी कस्टडी में अस्पताल लाकर तुलसीराम का इलाज तो कराया लेकिन परिवार वालों समेत किसी रिश्तेदार को वास्तविकता नहीं बताई। पुलिस अगर सुबह ही तुलसीराम की खराब हालत के बारे में बता देती तो रिश्तेदार आकर बेहतर इलाज करा लेते।
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तुलसीराम ने हमले में कराया था तीन लोगों को नामजद
बदायूं। रविवार को इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मृत तुलसीराम ने शनिवार को घटना के बाद तीन लोगों को नामजद कराया था। नामजदों में हिस्ट्रीशीटर वीरसहाय, उसके बेटे संजीव और मदनपाल गांव के ही मैकू शामिल हैं। वीरसहाय की घटना के दौरान ही मौत हो गई थी। पुलिस सूत्रों की माने तो तुलसीराम के आरोपियों पर भी हत्या का मामला तरमीम हो जाएगा।
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मृतक तुलसीराम की हालत रविवार पूर्वाह्न में खराब हुई। पुलिस ने अपनी मौजूदगी में बेहतर ट्रीटमेंट कराया लेकिन पेट में अचानक दर्द उठने से दिक्कत बढ़ गई। असलियत पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी लेकिन पुलिस को भी गांव में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
-कमल किशोर, एसपी सिटी
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कादरचौक के हिस्ट्रीशीटर वीरसहाय की हत्या में था बेटे समेत नामजद
एसपी सिटी के साथ पुलिस कर्मी अस्पताल पहुंचे, रिश्तेदारों से की बात
कादरचौक निवासी हिस्ट्रीशीटर वीरसहाय की शनिवार शाम को हुई हत्या के दौरान घायल दूसरे पक्ष के तुलसीराम की गिरफ्तारी के बाद हालत बिगड़ गई। कादरचौक थाने से देर रात ही उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार के बाद पुलिस उसे वापस ले गई लेकिन रविवार पूर्वाह्न में उसे फिर लाकर भर्ती कराना पड़ा। इलाज के दौरान तुलसीराम की रविवार शाम को मौत हो गई। पुलिस कस्टडी में इलाज के दौरान हत्यारोपी की मौत की भनक लगते ही एसपी सिटी कमल किशोर के साथ पुलिस अफसर मौके पर पहुंच गए। उन्होंने मृतक के रिश्तेदारों से बात की। रिश्तेदारों ने हालांकि पुलिस पर किसी तरह का आरोप नहीं लगाया है लेकिन अफसर माहौल पर नजर रखे हुए हैं।
कादरचौक के गांव मोहननगला में शनिवार शाम को दो पक्षों में घूरे को लेकर विवाद हो गया। दोनों पक्षों में चाकू भी चले थे, फायरिंग भी हुई थी। गोली लगने से हिस्ट्रीशीटर वीरसहाय की मौके पर ही मौत हो गई थी। दूसरे पक्ष के तुलसीराम (42) के पेट में चाकू लगा था। चूंकि वीरसहाय के बेटे संजीव ने तुलसीराम, उसके बेटे सुधीर, भाई नरोत्तम, भोले और पड़ोसी प्रेमसिंह को नामजद कराया था। पुलिस ने नामजदों में तुलसीराम, सुधीर और प्रेमसिंह को घटना के बाद देर रात ही दबोच लिया था। घायल तुलसीराम की रात में ही हालत बिगड़ गई। पुलिस ने मामला हल्के में लेते हुए उसको जिला अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन हालत में सुधार होने पर वापस कादरचौक थाने ले गए। तुलसीराम की रविवार को फिर हालत खराब हुई तो सिपाही उमेश प्रताप और होमगार्ड महेश उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंच गए।
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इलाज के दौरान शाम चार बजे तुलसीराम ने पेट दर्द की शिकायत की। चूंकि उसके पेट में चाकू लगा था, सो डॉक्टर भी उसे बेहतर चिकित्सा मुहैया कराने में जुट गए। डॉ.राजेश कुमार ने बताया कि तुलसीराम ने करीब पांच बजे दमतोड़ दिया। मौत से घबराए सिपाही उमेश ने तुरंत ही थानाध्यक्ष कादरचौक को कॉल कर अवगत करा दिया। देखते ही देखते एसपी सिटी कमल किशोर, सीओ उझानी निर्मल सिंह विष्ट पुलिस फोर्स के साथ अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने मोहननगला के प्रधान अनिल द्विवेदी और मृतक के रिश्तेदार रामपाल से बात की। हालांकि अस्पताल का माहौल देर रात तक सामान्य नजर आया लेकिन पुलिस अफसर हर स्थिति पर नजर रखे रहे। तुलसीराम का शव समाचार लिखे जाने तक पुलिस के कब्जे में था।
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मृतक के बेटे को पुलिस ने सुबह जेल भेजा
बदायूं। हिस्ट्रीशीटर वीरसहाय की हत्या की मामले में गिरफ्तार तुलसीराम, उसके बेटे सुधीर और पड़ोसी प्रेमसिंह से पुलिस ने शनिवार देर रात पूछताछ भी की थी। तुलसीराम घायल था, यह बात थानाध्यक्ष कादरचौक को पता थी। पुलिस ने सुबह प्रेमसिंह और सुुुधीर का चालान कर दिया। जबकि सुधीर के पिता को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने इस बात पर गौर नहीं किया कि वह तुलसीराम की हालत में सुधार होने तक सुधीर का चालान नहीं करती।
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प्रधान बोला, पुलिस ने मौत के बाद दी सूचना
बदायूं। मोहन नगला के प्रधान अनिल द्विवेदी ने बताया कि तुलसीराम घायल था। यह बात पुलिस के अलावा किसी और को पता नहीं थी। पुलिस ने अपनी कस्टडी में अस्पताल लाकर तुलसीराम का इलाज तो कराया लेकिन परिवार वालों समेत किसी रिश्तेदार को वास्तविकता नहीं बताई। पुलिस अगर सुबह ही तुलसीराम की खराब हालत के बारे में बता देती तो रिश्तेदार आकर बेहतर इलाज करा लेते।
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तुलसीराम ने हमले में कराया था तीन लोगों को नामजद
बदायूं। रविवार को इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मृत तुलसीराम ने शनिवार को घटना के बाद तीन लोगों को नामजद कराया था। नामजदों में हिस्ट्रीशीटर वीरसहाय, उसके बेटे संजीव और मदनपाल गांव के ही मैकू शामिल हैं। वीरसहाय की घटना के दौरान ही मौत हो गई थी। पुलिस सूत्रों की माने तो तुलसीराम के आरोपियों पर भी हत्या का मामला तरमीम हो जाएगा।
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मृतक तुलसीराम की हालत रविवार पूर्वाह्न में खराब हुई। पुलिस ने अपनी मौजूदगी में बेहतर ट्रीटमेंट कराया लेकिन पेट में अचानक दर्द उठने से दिक्कत बढ़ गई। असलियत पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी लेकिन पुलिस को भी गांव में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
-कमल किशोर, एसपी सिटी