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दहेज हत्या के आरोपी तीन जेठों को उम्रकैद
बदायूं।
Updated Thu, 19 Feb 2015 11:59 PM IST
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स्पेशल जज (ईसी एक्ट) सीपी सिंह ने दहेज हत्या के मामले में नामजद छह आरोपियों में तीन जेठों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 30-30 हजार का अर्थदंड भी डाला है। इस मामले में आरोपी नाबालिग पति का मुकदमा किशोर अदालत के सुपुर्द है। नामजद सास-ससुर फरार चल रहे हैं।
घटना थाना बिनावर क्षेत्र के रजागंज की है। गांव के भूरेंद्र (नाबालिग) का विवाह जिला बरेली के मीरगंज थाना क्षेत्र के रम्पुरा निवासी झम्मन लाल की पुत्री चंद्र देवी के साथ 25 मई 2010 को हुआ था। आरोप था कि लगभग ढाई हजार रुपये खर्च करने के बाद ससुराल वाले मोटरसाइकिल सहित तिजारत के लिए 50 हजार रुपये की मांग करने लगे। इस पर कई बार लड़की के मायके वालों ने असमर्थता जताते हुए लड़के वालों की खुशामद की।
रिपोर्ट के मुताबिक 16 सितंबर 2011 कोपत भूरेंद्र ने अपने भाई भगवान सिंह, नन्हें, रामवीर, मां विमला देवी, पिता महेंद्र सिंह के सहयोग से चंद्रदेवी की हत्या कर शव नन्हें के खेत में फेंक दिया था। इसके बाद सभी भाग निकले थे। सुनवाई के दौरान आरोपी पति की अवस्यक आयु के कारण उसका मामला किशोर अदालत के सुपुर्द कर दिया गया। जबकि आरोपी सास-ससुर फरार हो गए।
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हाईकोर्ट के निर्देश पर बाकी तीनों नामजदों की सुनवाई की। इसके उपरांत तीनों जेठ भगवान, रामवीर और नन्हें को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी एडीजीसी मुकेश यादव ने की।
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घटना थाना बिनावर क्षेत्र के रजागंज की है। गांव के भूरेंद्र (नाबालिग) का विवाह जिला बरेली के मीरगंज थाना क्षेत्र के रम्पुरा निवासी झम्मन लाल की पुत्री चंद्र देवी के साथ 25 मई 2010 को हुआ था। आरोप था कि लगभग ढाई हजार रुपये खर्च करने के बाद ससुराल वाले मोटरसाइकिल सहित तिजारत के लिए 50 हजार रुपये की मांग करने लगे। इस पर कई बार लड़की के मायके वालों ने असमर्थता जताते हुए लड़के वालों की खुशामद की।
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रिपोर्ट के मुताबिक 16 सितंबर 2011 कोपत भूरेंद्र ने अपने भाई भगवान सिंह, नन्हें, रामवीर, मां विमला देवी, पिता महेंद्र सिंह के सहयोग से चंद्रदेवी की हत्या कर शव नन्हें के खेत में फेंक दिया था। इसके बाद सभी भाग निकले थे। सुनवाई के दौरान आरोपी पति की अवस्यक आयु के कारण उसका मामला किशोर अदालत के सुपुर्द कर दिया गया। जबकि आरोपी सास-ससुर फरार हो गए।
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हाईकोर्ट के निर्देश पर बाकी तीनों नामजदों की सुनवाई की। इसके उपरांत तीनों जेठ भगवान, रामवीर और नन्हें को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी एडीजीसी मुकेश यादव ने की।