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जिला जेल में बंदी ने फांसी लगाकर खुदकुशी की
badaun
Updated Sat, 28 Mar 2015 11:41 PM IST
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जिला जेल में बंदी ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उसका शव शनिवार रात करीब आठ बजे जेल में बंद पड़ी एक बैरक के पीछे प्लास्टिक की रस्सी पर लटका मिला। मृतक अपने दामाद के अपहरण और हत्या के मामले में आरोपी था। हाल ही में हाईकोर्ट से उसकी जमानत खारिज हो जाने के बाद से वह डिप्रेशन में था।
संभल के थाना रजपुरा अंतर्गत गांव भीकमपुर जैनी निवासी ओमपाल (36) पुत्र सियाराम ने नवंबर 2014 में अपने बहनोई हरमेश के साथ मिलकर अपने दामाद का अपहरण कर लिया था। बाद में ओमपाल ने हरमेश और राजू के साथ मिलकर अपने दामाद की हत्या कर दी। पुलिस ने ओमपाल को गिरफ्तार करके पांच नवंबर 2014 को जेल भेज दिया था। बाद में हरमेश और राजू को भी जेल भेज दिया गया। सीजेएम कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद ओमपाल ने हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट ने भी उसकी जमानत खारिज कर दी। ओमपाल के भाई ने दो दिन पहले जेल में उससे मुलाकात करके जमानत खारिज होने के बारे में बताया था। इसके बाद से ओमपाल डिप्रेशन में था।
शनिवार की शाम जेल में बंदियों को भोजन का वितरण चल रहा था। बैरक नंबर तीन के बंदी भोजन लेने के लिए बैरक से बाहर थे। यहां मौका पाकर ओमपाल जेल में कई साल से बंद पड़े बैरक की ओर चला गया। यहां ओमपाल प्लास्टिक की रस्सी के सहारे जंगले पर झूल गया। रात साढ़े सात बजे वरिष्ठ जेल अधीक्षक अरविंद पांडेय जेल के निरीक्षण के लिए निकले। जब वह बंद पड़े बैरक के पास पहुंचे तो उन्होंने ओमपाल का शव लटकता हुआ देखा। घटना के बारे में जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई। देर रात सिटी मजिस्ट्रेट विजय बहादुर, सीओ सिटी राजेंद्र सिंह धामा ने जेल पहुंच कर मुआयना किया। ओमपाल के शव का रविवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
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संभल के थाना रजपुरा अंतर्गत गांव भीकमपुर जैनी निवासी ओमपाल (36) पुत्र सियाराम ने नवंबर 2014 में अपने बहनोई हरमेश के साथ मिलकर अपने दामाद का अपहरण कर लिया था। बाद में ओमपाल ने हरमेश और राजू के साथ मिलकर अपने दामाद की हत्या कर दी। पुलिस ने ओमपाल को गिरफ्तार करके पांच नवंबर 2014 को जेल भेज दिया था। बाद में हरमेश और राजू को भी जेल भेज दिया गया। सीजेएम कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद ओमपाल ने हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट ने भी उसकी जमानत खारिज कर दी। ओमपाल के भाई ने दो दिन पहले जेल में उससे मुलाकात करके जमानत खारिज होने के बारे में बताया था। इसके बाद से ओमपाल डिप्रेशन में था।
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शनिवार की शाम जेल में बंदियों को भोजन का वितरण चल रहा था। बैरक नंबर तीन के बंदी भोजन लेने के लिए बैरक से बाहर थे। यहां मौका पाकर ओमपाल जेल में कई साल से बंद पड़े बैरक की ओर चला गया। यहां ओमपाल प्लास्टिक की रस्सी के सहारे जंगले पर झूल गया। रात साढ़े सात बजे वरिष्ठ जेल अधीक्षक अरविंद पांडेय जेल के निरीक्षण के लिए निकले। जब वह बंद पड़े बैरक के पास पहुंचे तो उन्होंने ओमपाल का शव लटकता हुआ देखा। घटना के बारे में जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई। देर रात सिटी मजिस्ट्रेट विजय बहादुर, सीओ सिटी राजेंद्र सिंह धामा ने जेल पहुंच कर मुआयना किया। ओमपाल के शव का रविवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
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