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राशन की दुकान लेकर वर्षों से सुलग रही थी रंजिश
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राशन की दुकान को लेकर वर्षों से थी रंजिश
सहसवान (बदायूं)। हत्यारोपी जीवाराम और उसके साथियों ने पप्पू को अचानक नहीं मार डाला। बल्कि उनके बीच रंजिश की चिंगारी पिछले कई सालों से सुलग रही थी। दोनों पक्षों के बीच रंजिश की वजह गांव में कोटे के राशन की दुकान रही। जीवाराम को शक था कि उसकी पत्नी अग्रवती के नाम का कोटा पप्पू ने निरस्त कराया था। तीन महीने पहले हुए कोटे के प्रस्ताव में दोनों ने अलग-अलग व्यक्ति का समर्थन किया था। जीवाराम और उसके साथियों के मन में इतना गुस्सा था कि पप्पू को गोली मारने के बाद लाश पर काफी देर तक लाठियां बरसाते रहे।
हत्यारोपी जीवाराम सुजातगंज पस्तौर के मजरा लदपुरा निवासी है। पुलिस के मुताबिक करीब 20 साल तक जीवाराम की पत्नी अग्रवती के नाम कोटे के राशन की दुकान रही। इस दौरान कोटेदार अग्रवती के खिलाफ कई बार शिकायतें हुईं। जीवाराम को शक था कि शिकायतें पप्पू कराता है। इसको लेकर दोनों के बीच रंजिश बन गई। शिकायतों के चलते कई महीने पहले अग्रवती का कोटा निरस्त हो गया, जिससे रंजिश और बढ़ गई। करीब तीन महीने पहले हुए कोटे के प्रस्ताव के दौरान पप्पू ने सुजातगंज पस्तौर निवासी छंगे पुत्र रोशन का समर्थन किया था, जिसे दुकान मिल गई। जबकि जीवाराम ने लदपुरा के सुगरपाल का समर्थन किया, जो हार गए। फिर तो पप्पू और जीवाराम के बीच रंजिश की खाई और गहरा गई। तभी से जीवाराम और उसके साथियों ने पप्पू को सबक सिखाने की ठान ली थी। राशन की दुकान सुजातगंज पस्तौर में चली जाने से लदपुरा वासियों को परेशान होती थी। इससे ज्यादातर गांव वाले जीवाराम के पक्ष में आ गए।
आरोप है कि जीवाराम, रोजगार सेवक विनोद, ओमकार और पप्पू पुत्र सोनपाल आए दिन देख लेने की धमकी देने लगेे। करीब आठ सौ लोगों की आबादी वाले लदपुरा में केवल यादव बिरादरी है। बावजूद इसके जीवाराम और उसके साथियों की दबंगई के आगे लोग डरते हैं। दबंगई के बल पर शुक्रवार सुबह सभी हमलावर असलाह लेकर पप्पू के घर में घुस गए और उसे मारते-पीटते घसीटकर अपने आंगन में ले गए। अपने घर में पप्पू को गोली मारी और फिर काफी देर तक लाठियों और देशी बंदूकों के बटों से पीटते रहे।
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फायर की आवाज और चीख पुकार सुनने के बावजूद गांव के लोग पीड़ित परिवार की मदद को नहीं पहुंचे। आसपास वाले अपने घरों में दुबक गए। गांव के अन्य लोग अपने काम में लगे रहे। जबकि हमलावर फिल्मी स्टाइल में घटना को अंजाम देने के बाद भाग गए। घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल है। एहतियातन गांव में पुलिस तैनात कर दी गई है।
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लाश पर लेट गई मां बोली, क्यों पीट रहे हो मेरे लाल को
सहसवान। जिस समय दबंग पप्पू को उसके घर से खींचकर अपने घर ले जा रहे थे। तभी पीछे-पीछे मां मुन्नी और पिता जयसिंह दौड़ते हुए गए। बुजुर्ग होने की वजह से जयसिंह हमलावरों से मुकाबला नहीं कर सके और पीछे रह गए। मां मुन्नी ने बेटे पर लाठियां बरसती देखीं तो पप्पू के ऊपर लेट गईं। फिर भी आरोपी लाठी मारते रहे। मुन्नी चीखती जा रही। कह रही थी, क्यों मार रहे हो मेरे लाल को। जयसिंह ने हमलावरों को रोकना चाहा। इस पर हमलावरों ने जयसिंह पर लाठियां बरसा दीं, जिससे उनके हाथ की हड्डी टूट गई।
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अनाथ हो गए बच्चे, शादी करने लायक हैं बहनें
सहसवान। पप्पू दो भाइयों में सबसे बड़ा था। छोटा भाई हरेंद्र गाजियाबाद के कासना में रहकर मजदूरी करता है। पप्पू का बड़ा बेटा 18 वर्षीय पुष्पेंद्र दिव्यांग है। उससे छोटा अभिजीत (15), बेटी रत्नेश (14), प्रीता (10) और गीता (8) है। पप्पू की पत्नी सुनीता की करीब पांच-छह साल पहले मौत हो गई थी। पप्पू की हत्या के बाद उसके बच्चे अनाथ हो गए हैं। पप्पू की दो बहने हैं, जो शादी लायक हैं।
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सहसवान (बदायूं)। हत्यारोपी जीवाराम और उसके साथियों ने पप्पू को अचानक नहीं मार डाला। बल्कि उनके बीच रंजिश की चिंगारी पिछले कई सालों से सुलग रही थी। दोनों पक्षों के बीच रंजिश की वजह गांव में कोटे के राशन की दुकान रही। जीवाराम को शक था कि उसकी पत्नी अग्रवती के नाम का कोटा पप्पू ने निरस्त कराया था। तीन महीने पहले हुए कोटे के प्रस्ताव में दोनों ने अलग-अलग व्यक्ति का समर्थन किया था। जीवाराम और उसके साथियों के मन में इतना गुस्सा था कि पप्पू को गोली मारने के बाद लाश पर काफी देर तक लाठियां बरसाते रहे।
हत्यारोपी जीवाराम सुजातगंज पस्तौर के मजरा लदपुरा निवासी है। पुलिस के मुताबिक करीब 20 साल तक जीवाराम की पत्नी अग्रवती के नाम कोटे के राशन की दुकान रही। इस दौरान कोटेदार अग्रवती के खिलाफ कई बार शिकायतें हुईं। जीवाराम को शक था कि शिकायतें पप्पू कराता है। इसको लेकर दोनों के बीच रंजिश बन गई। शिकायतों के चलते कई महीने पहले अग्रवती का कोटा निरस्त हो गया, जिससे रंजिश और बढ़ गई। करीब तीन महीने पहले हुए कोटे के प्रस्ताव के दौरान पप्पू ने सुजातगंज पस्तौर निवासी छंगे पुत्र रोशन का समर्थन किया था, जिसे दुकान मिल गई। जबकि जीवाराम ने लदपुरा के सुगरपाल का समर्थन किया, जो हार गए। फिर तो पप्पू और जीवाराम के बीच रंजिश की खाई और गहरा गई। तभी से जीवाराम और उसके साथियों ने पप्पू को सबक सिखाने की ठान ली थी। राशन की दुकान सुजातगंज पस्तौर में चली जाने से लदपुरा वासियों को परेशान होती थी। इससे ज्यादातर गांव वाले जीवाराम के पक्ष में आ गए।
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आरोप है कि जीवाराम, रोजगार सेवक विनोद, ओमकार और पप्पू पुत्र सोनपाल आए दिन देख लेने की धमकी देने लगेे। करीब आठ सौ लोगों की आबादी वाले लदपुरा में केवल यादव बिरादरी है। बावजूद इसके जीवाराम और उसके साथियों की दबंगई के आगे लोग डरते हैं। दबंगई के बल पर शुक्रवार सुबह सभी हमलावर असलाह लेकर पप्पू के घर में घुस गए और उसे मारते-पीटते घसीटकर अपने आंगन में ले गए। अपने घर में पप्पू को गोली मारी और फिर काफी देर तक लाठियों और देशी बंदूकों के बटों से पीटते रहे।
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फायर की आवाज और चीख पुकार सुनने के बावजूद गांव के लोग पीड़ित परिवार की मदद को नहीं पहुंचे। आसपास वाले अपने घरों में दुबक गए। गांव के अन्य लोग अपने काम में लगे रहे। जबकि हमलावर फिल्मी स्टाइल में घटना को अंजाम देने के बाद भाग गए। घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल है। एहतियातन गांव में पुलिस तैनात कर दी गई है।
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लाश पर लेट गई मां बोली, क्यों पीट रहे हो मेरे लाल को
सहसवान। जिस समय दबंग पप्पू को उसके घर से खींचकर अपने घर ले जा रहे थे। तभी पीछे-पीछे मां मुन्नी और पिता जयसिंह दौड़ते हुए गए। बुजुर्ग होने की वजह से जयसिंह हमलावरों से मुकाबला नहीं कर सके और पीछे रह गए। मां मुन्नी ने बेटे पर लाठियां बरसती देखीं तो पप्पू के ऊपर लेट गईं। फिर भी आरोपी लाठी मारते रहे। मुन्नी चीखती जा रही। कह रही थी, क्यों मार रहे हो मेरे लाल को। जयसिंह ने हमलावरों को रोकना चाहा। इस पर हमलावरों ने जयसिंह पर लाठियां बरसा दीं, जिससे उनके हाथ की हड्डी टूट गई।
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अनाथ हो गए बच्चे, शादी करने लायक हैं बहनें
सहसवान। पप्पू दो भाइयों में सबसे बड़ा था। छोटा भाई हरेंद्र गाजियाबाद के कासना में रहकर मजदूरी करता है। पप्पू का बड़ा बेटा 18 वर्षीय पुष्पेंद्र दिव्यांग है। उससे छोटा अभिजीत (15), बेटी रत्नेश (14), प्रीता (10) और गीता (8) है। पप्पू की पत्नी सुनीता की करीब पांच-छह साल पहले मौत हो गई थी। पप्पू की हत्या के बाद उसके बच्चे अनाथ हो गए हैं। पप्पू की दो बहने हैं, जो शादी लायक हैं।