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हत्या के जुर्म में चार सगे भाइयों को उम्रकैद
Updated Wed, 08 Nov 2017 11:33 PM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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बदायूं। सात साल पहले दिनदहाड़े की गई एक युवक की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने चार सगे भाइयों को दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही चारों मुजरिमों पर 27-27 हजार रुपये का जुर्माना डाला है।
यह घटना थाना कादरचौक क्षेत्र के गांव गौरामई में नौ अगस्त 2010 को घटी थी। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार गौरामई निवासी अब्दुल शाकिर पुत्र अब्दुल हमीद अपने गांव में क्लीनिक चलाते थे। वहीं क्लीनिक के पास उनका एक खेत था। आठ अगस्त को उनके खेत में गांव के साजिद पुत्र अब्दुल सादिक के जानवर घुस गए। शाकिर ने इसकी शिकायत साजिद से की। इस पर साजिद ने गाली-गलौज की। घटना के दिन मुकदमे के वादी अब्दुल शाकिर के भाई अब्दुल हफीज अपने दो बेटों बबलू और परवेज के साथ खेत पर फसल को देखने गए थे। तभी वहां पीछे से साजिद खां और उसके भाई पप्पू खां, राजू खां, बाहिब खां पहुंच गए और झगड़ा करने लगे। मना करने पर अब्दुल शाकिर, उनके भाई अब्दुल हफीज और उनके दोनों बेटों पर मुजरिम पक्ष ने जानलेवा हमला कर दिया और फायरिंग की। एक गोली अब्दुल हफीज के लगी और दूसरी गोली उनके भतीजे परवेज के। इससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में इलाज के दौरान परवेज की मौत हो गई थी।
इस घटना में वादी अब्दुल शाकिर ने विरोधी पक्ष के साजिद खां, पप्पू खां, राजू खां और बाहिब खां पुत्र मुन्ने उर्फ अब्दुल सादिक के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश नसीर अहमद ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी अनिल सिंह राठौर और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी साजिद, पप्पू, राजू और बाहिब को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ ही चारों पर 27-27 हजार रुपये का जुर्माना डाला।
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आरोपी पक्ष ने भी वादी पक्ष पर लिखाई थी रिपोर्ट
बदायूं। दिनदहाड़े हुई परवेज की हत्या के बाद आरोपी साजिद पक्ष ने वादी अब्दुल शाकिर पक्ष के खिलाफ भी पुलिस में जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस पक्ष का आरोप था कि उन्होंने भी उन लोगों पर जानलेवा हमला करते हुए फायरिंग की थी। यहां बता दें कि कोर्ट ने इस मामले में अब्दुल शाकिर पक्ष को बरी कर दिया था।
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यह घटना थाना कादरचौक क्षेत्र के गांव गौरामई में नौ अगस्त 2010 को घटी थी। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार गौरामई निवासी अब्दुल शाकिर पुत्र अब्दुल हमीद अपने गांव में क्लीनिक चलाते थे। वहीं क्लीनिक के पास उनका एक खेत था। आठ अगस्त को उनके खेत में गांव के साजिद पुत्र अब्दुल सादिक के जानवर घुस गए। शाकिर ने इसकी शिकायत साजिद से की। इस पर साजिद ने गाली-गलौज की। घटना के दिन मुकदमे के वादी अब्दुल शाकिर के भाई अब्दुल हफीज अपने दो बेटों बबलू और परवेज के साथ खेत पर फसल को देखने गए थे। तभी वहां पीछे से साजिद खां और उसके भाई पप्पू खां, राजू खां, बाहिब खां पहुंच गए और झगड़ा करने लगे। मना करने पर अब्दुल शाकिर, उनके भाई अब्दुल हफीज और उनके दोनों बेटों पर मुजरिम पक्ष ने जानलेवा हमला कर दिया और फायरिंग की। एक गोली अब्दुल हफीज के लगी और दूसरी गोली उनके भतीजे परवेज के। इससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में इलाज के दौरान परवेज की मौत हो गई थी।
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इस घटना में वादी अब्दुल शाकिर ने विरोधी पक्ष के साजिद खां, पप्पू खां, राजू खां और बाहिब खां पुत्र मुन्ने उर्फ अब्दुल सादिक के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश नसीर अहमद ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी अनिल सिंह राठौर और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी साजिद, पप्पू, राजू और बाहिब को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ ही चारों पर 27-27 हजार रुपये का जुर्माना डाला।
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आरोपी पक्ष ने भी वादी पक्ष पर लिखाई थी रिपोर्ट
बदायूं। दिनदहाड़े हुई परवेज की हत्या के बाद आरोपी साजिद पक्ष ने वादी अब्दुल शाकिर पक्ष के खिलाफ भी पुलिस में जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस पक्ष का आरोप था कि उन्होंने भी उन लोगों पर जानलेवा हमला करते हुए फायरिंग की थी। यहां बता दें कि कोर्ट ने इस मामले में अब्दुल शाकिर पक्ष को बरी कर दिया था।