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पिस्टल कांड की जांच करने किसी भी दिन आ सकती है क्राइम ब्रांच की टीम
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बदायूं। मुंगेर की पिस्टल सप्लाई करने वाले धंधेबाजों पर क्राइम ब्रांच का शिकंजा कसने वाला है। सारे तथ्यों को एकत्र करने के बाद बरेली क्राइम ब्रांच की टीम किसी भी दिन बदायूं आकर पूछताछ कर सकती है। जब तक विवेचना स्थानीय कुछ अधिकारियों के हाथ में थी, तब तक धंधेबाज भी यह सोचकर आश्वस्त बैठे थे कि उनका कुछ नहीं होने वाला, लेकिन जांच क्राइम ब्रांच के हाथ में आने के बाद उनमें खलबली मची हुई है। माना जा रहा है कि इस जांच के बाद उन लोगों पर भी शिकंजा कस सकता है, जिनके नाम स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने मोटी रकम लेकर बाहर कर दिए थे।
माह नवंबर -18 में पुलिस ने छापा मारकर एक नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन के नौकर समेत नौ लोगों को पकड़ा था। उनके पास से मुंगेर की आठ पिस्टल बरामद हुई थीं। पूर्व चेयरमैन और उनके बेटे समेत कई लोगों को पुलिस ने उस रात उठाया था। बताते हैं कि जब पुलिस टीम को इसकी जानकारी हुई कि इसमें कई मालदार भी फंसे हैं तो कार्रवाई के बजाय सौदेबाजी शुरू कर दी। मोटा पैसा देखकर कुछ अधिकारी भी इसमें लिप्त हो गए और रात में कई लोगों को पकड़कर छोड़ा गया। उनसे मोटी रकम वसूली गई। अगले दिन नौ लोगों के साथ आठ पिस्टल की बरामदगी दिखाई गई। मुख्य धंधेबाज की कुछ पुलिस अधिकारियों से मध्यस्थता कराने वाला शहर का एक प्रमुख व्यापारी नेता था। जब इसकी शिकायत एडीजी तक पहुंची तो उन्होंने इसकी जांच डीआईजी राजेश कुुमार पांडेय को सौंप दी। डीआईजी शुरू से ही इस मामले पर नजर बनाए रहे। अंदरूनी जांच में कुछ स्थानीय वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता भी नजर आई, जिसके बाद जांच बदायूं से हटाकर बरेली क्राइम ब्रांच को दे दी गई। हालांकि इससे पहले स्थानीय कुछ अधिकारियों से मिलीभगत के चलते धंधेबाज कुछ आश्वस्त हो गए थे, लेकिन क्राइम ब्रांच के हाथ में जांच पहुंचने के बाद उनमें फिर खलबली मची है। मामले की विवेचना कर रहे सीनियर इंस्पेक्टर कृष्ण मुरारी ने बताया कि फिलहाल वह किसी सरकारी काम के सिलसिले में बाहर हैं, जल्द ही बदायूं आकर संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी।
चुनाव में पुलिस की सिरदर्दी बन सकती हैैं अवैध पिस्टल
अवैध पिस्टलों का धंधा पकड़ में भले ही नवंबर में आया हो, लेकिन यह तय है कि यह काफी लंबे समय से बदायूं में चल रहा था। पिछले दिनों संभल में भी दिल्ली के बदमाश पकड़ गए थे, जिनके पास इस प्रकार की पिस्टलें बरामद हुई थीं। इनके तार दिल्ली के नासिर गैंग से जुड़े थे। बदायूं से भी पिस्टलों की सप्लाई जिले समेत आसपास के इलाकों में की जाती थी। पुलिस ने केवल नौ लोगों के साथ आठ पिस्टल बरामद करके अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश कर ली, लेकिन ऐसी सैकड़ों पिस्टल जिले में खपा दी गईं। अब लोकसभा चुनाव में पुलिस और प्रशासन लाइसेंस धारकों के तो शस्त्र जमा करा रहा है, लेकिन अवैध पिस्टल रखने वाले उसके लिए चुनाव में सिरदर्द साबित हो सकते हैं।
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माह नवंबर -18 में पुलिस ने छापा मारकर एक नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन के नौकर समेत नौ लोगों को पकड़ा था। उनके पास से मुंगेर की आठ पिस्टल बरामद हुई थीं। पूर्व चेयरमैन और उनके बेटे समेत कई लोगों को पुलिस ने उस रात उठाया था। बताते हैं कि जब पुलिस टीम को इसकी जानकारी हुई कि इसमें कई मालदार भी फंसे हैं तो कार्रवाई के बजाय सौदेबाजी शुरू कर दी। मोटा पैसा देखकर कुछ अधिकारी भी इसमें लिप्त हो गए और रात में कई लोगों को पकड़कर छोड़ा गया। उनसे मोटी रकम वसूली गई। अगले दिन नौ लोगों के साथ आठ पिस्टल की बरामदगी दिखाई गई। मुख्य धंधेबाज की कुछ पुलिस अधिकारियों से मध्यस्थता कराने वाला शहर का एक प्रमुख व्यापारी नेता था। जब इसकी शिकायत एडीजी तक पहुंची तो उन्होंने इसकी जांच डीआईजी राजेश कुुमार पांडेय को सौंप दी। डीआईजी शुरू से ही इस मामले पर नजर बनाए रहे। अंदरूनी जांच में कुछ स्थानीय वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता भी नजर आई, जिसके बाद जांच बदायूं से हटाकर बरेली क्राइम ब्रांच को दे दी गई। हालांकि इससे पहले स्थानीय कुछ अधिकारियों से मिलीभगत के चलते धंधेबाज कुछ आश्वस्त हो गए थे, लेकिन क्राइम ब्रांच के हाथ में जांच पहुंचने के बाद उनमें फिर खलबली मची है। मामले की विवेचना कर रहे सीनियर इंस्पेक्टर कृष्ण मुरारी ने बताया कि फिलहाल वह किसी सरकारी काम के सिलसिले में बाहर हैं, जल्द ही बदायूं आकर संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी।
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चुनाव में पुलिस की सिरदर्दी बन सकती हैैं अवैध पिस्टल
अवैध पिस्टलों का धंधा पकड़ में भले ही नवंबर में आया हो, लेकिन यह तय है कि यह काफी लंबे समय से बदायूं में चल रहा था। पिछले दिनों संभल में भी दिल्ली के बदमाश पकड़ गए थे, जिनके पास इस प्रकार की पिस्टलें बरामद हुई थीं। इनके तार दिल्ली के नासिर गैंग से जुड़े थे। बदायूं से भी पिस्टलों की सप्लाई जिले समेत आसपास के इलाकों में की जाती थी। पुलिस ने केवल नौ लोगों के साथ आठ पिस्टल बरामद करके अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश कर ली, लेकिन ऐसी सैकड़ों पिस्टल जिले में खपा दी गईं। अब लोकसभा चुनाव में पुलिस और प्रशासन लाइसेंस धारकों के तो शस्त्र जमा करा रहा है, लेकिन अवैध पिस्टल रखने वाले उसके लिए चुनाव में सिरदर्द साबित हो सकते हैं।
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