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विस्फोटक पदार्थ की क्षमता चेक करने आई थी एटीएस
Updated Sun, 28 Oct 2018 08:44 PM IST
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विस्फोटक पदार्थ की क्षमता चेक करने आई थी एटीएस
जांच में निकला पटाखों में प्रयोग होने वाला बारूद
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। रसूलपुर गांव के नजदीक पटाखा फैक्ट्री में धमाका करने वाली कौन सी बारूद थी, इसकी जांच के लिए एटीएस को भेजा गया था। उच्चाधिकारियों ने पहले जांच के माध्यम से पता लगाने का प्रयास किया था कि कहीं खतरनाक बारूद तो नहीं थी, जिसके लिए कहीं गलत कार्यों में प्रयोग किया जाता हो। परंतु एटीएस की जांच में धमाका करने वाली बारूद पटाखों में प्रयोग होने वाली निकली।
एटीएस इंस्पेक्टर मंजीत सिंह ने बताया जिस उद्देश्य से उन्हें रसूलपुर भेजा गया था। लगभग वह कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने विस्फोट से संबंधित अपनी जांच पूरी कर ली है। उन्होंने बताया कि वैसे तो बारूद कई तरह की होती है। इनमें एक तरह की वो बारूद होती है, जिस पर कोई दबाव पड़े तो फट जाती है। उसे हाईएक्सप्लोसिव बारूद कहा जाता और वह कारतूस, बम बनाने में प्रयोग होती है। जबकि लो एक्सप्लोसिव बारूद हल्की आंच लगने पर भी ज्वलनशील हो जाता है। इस बारूद का प्रयोग पटाखों में होता है। आतिशबाज संजू गरीब परिवार से था। परिवार चलाने के लिए उसने आतिशबाजी का धंधा शुरू किया था। उस पर 15 किलो बारूद का लाइसेंस था, जो एक बिल्डिंग उड़ाने के लिए काफी थी। वैसे उन्हें घटनास्थल पर ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जो संजू के खतरनाक इरादों को साबित करता हो। कारतूस और बम में हाईएक्सप्लोसिव बारूद होती है। अगर पटाखा फैक्ट्री में हाईएक्सप्लोसिव बारूद होती, तो लोगों के चीथड़े उड़ जाते। परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने अपनी जांच में लो एक्सप्लोसिव बारूद होने की पुष्टि की है।
वर्जन---
पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट की जांच करने आईजी के आदेश पर आए थे। बाकी जांच मजिस्ट्रेटी टीम कर रही है। इससे आगे कार्रवाई के हमारे पास आदेश नहीं हैं। पटाखा फैक्ट्री में लो एक्सप्लोसिव बारूद थी, जिससे विस्फोट हुआ था।
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मंजीत सिंह, इंस्पेक्टर एटीएस
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जांच में निकला पटाखों में प्रयोग होने वाला बारूद
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। रसूलपुर गांव के नजदीक पटाखा फैक्ट्री में धमाका करने वाली कौन सी बारूद थी, इसकी जांच के लिए एटीएस को भेजा गया था। उच्चाधिकारियों ने पहले जांच के माध्यम से पता लगाने का प्रयास किया था कि कहीं खतरनाक बारूद तो नहीं थी, जिसके लिए कहीं गलत कार्यों में प्रयोग किया जाता हो। परंतु एटीएस की जांच में धमाका करने वाली बारूद पटाखों में प्रयोग होने वाली निकली।
एटीएस इंस्पेक्टर मंजीत सिंह ने बताया जिस उद्देश्य से उन्हें रसूलपुर भेजा गया था। लगभग वह कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने विस्फोट से संबंधित अपनी जांच पूरी कर ली है। उन्होंने बताया कि वैसे तो बारूद कई तरह की होती है। इनमें एक तरह की वो बारूद होती है, जिस पर कोई दबाव पड़े तो फट जाती है। उसे हाईएक्सप्लोसिव बारूद कहा जाता और वह कारतूस, बम बनाने में प्रयोग होती है। जबकि लो एक्सप्लोसिव बारूद हल्की आंच लगने पर भी ज्वलनशील हो जाता है। इस बारूद का प्रयोग पटाखों में होता है। आतिशबाज संजू गरीब परिवार से था। परिवार चलाने के लिए उसने आतिशबाजी का धंधा शुरू किया था। उस पर 15 किलो बारूद का लाइसेंस था, जो एक बिल्डिंग उड़ाने के लिए काफी थी। वैसे उन्हें घटनास्थल पर ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जो संजू के खतरनाक इरादों को साबित करता हो। कारतूस और बम में हाईएक्सप्लोसिव बारूद होती है। अगर पटाखा फैक्ट्री में हाईएक्सप्लोसिव बारूद होती, तो लोगों के चीथड़े उड़ जाते। परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने अपनी जांच में लो एक्सप्लोसिव बारूद होने की पुष्टि की है।
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वर्जन---
पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट की जांच करने आईजी के आदेश पर आए थे। बाकी जांच मजिस्ट्रेटी टीम कर रही है। इससे आगे कार्रवाई के हमारे पास आदेश नहीं हैं। पटाखा फैक्ट्री में लो एक्सप्लोसिव बारूद थी, जिससे विस्फोट हुआ था।
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मंजीत सिंह, इंस्पेक्टर एटीएस