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एसपी सिटी को सौंपी लाश जलाने के मामले की जांच
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बदायूं। पोस्टमार्टम हाउस के पीछे कूड़े के ढेर में लकड़ी रखकर अज्ञात युवक की लाश जलाने के मामले को एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने इस मामले की जांच एसपी सिटी जितेंद्र श्रीवास्तव को सौंप दी है। उनकी रिपोर्ट के बाद इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
शुक्रवार की शाम पुलिस ने पोस्टमार्टम हाउस के पीछे जाने वाली सड़क पर एक अज्ञात दिव्यांग युवक का शव कूड़े के ढेर पर कुछ लकड़ियां और उपले रखकर जला दिया था। इस युवक की लाश 26 फरवरी को अस्पताल रोड पर नाले में पड़ी मिली थी। युवक की शिनाख्त न होने पर पुलिस ने शुक्रवार शाम को शव को फूंक दिया। मानवता को शर्मसार करने वाले पुलिस के इस कारनामे को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो आला अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला आया। इस पर एसएसपी ने एसपी सिटी को इस मामले की जांच सौंप दी।
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कभी वीरान होता था इलाका, अब कुछ दूरी पर बस चुकी कॉलोनी
बदायूं। जिस जगह सड़क किनारे लगे कूड़े के ढेर पर पुलिस ने एक दिव्यांग युवक के शव को जला दिया, कभी वह इलाका वीरान हुआ करता था। अंधेरा तो दूर, लोग दिन में उधर जाने से कतराते थे। करीब 20 साल पहले की बात करें तो यहां अज्ञात शवों को ऐसे ही झाड़ियों में फेंक दिया जाता था, जिन्हें हर रोज आवारा कुत्ते निवाला बनाते थे। तमाम शिकायतों के बाद पुलिस ने शवों को फेंकना बंद कर उनको जलाना शुरू कर दिया, लेकिन जगह नहीं बदली। आज भी थोड़ी सी लकड़ियां डालकर ऐसे ही अज्ञात शव फूूंक दिए जाते हैं। बाद में अवशेष कुत्ते उठा ले जाते हैं। यह हालत तब है जब शहर में एक नहीं दो-दो श्मशान बने हैं।
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पुलिस ऑफिस से मात्र पांच सौ मीटर दूर पोस्टमार्टम हाउस के पीछे विकास की पूरी कोशिश की गई है। लोगों को निकास के लिए पक्की सड़क डाली गई है। कुछ दूरी पर कॉलोनी भी बन गई है, जहां लोगों का आना जाना लगा रहता है। इस इलाके में कुछ तो नगर पालिका कूड़ा डालकर गंदगी फैलाए हुए है, बाकी पुलिस विभाग सुधरने नहीं दे रहा है। पुलिस विभाग ने इस इलाके को श्मशान घाट बना दिया है। पुलिस यहां ऐसे शवों का अंतिम संस्कार करती है, जो लावारिस होते हैं। इन शवों को सड़क किनारे कूड़े के ढेर पर रखकर जला दिया जाता है। लकड़ियां मिलीं तो ठीक वरना उपले आदि डालकर शव फूंक दिए जाते हैं। ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई बार हुआ है। लोगों ने अज्ञात शवों के अवशेषों के फोटो तक खींचकर वायरल किए हैं। यही वजह है कि इस इलाके में घूमने वाले कुत्ते खूंखार हो चुके हैं। वे इसी तलाश में रहते हैं कि कब यहां अज्ञात लाशें फूंकी जाएं और उनके अवशेष निवाला बन सकें।
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कूड़े के ढेर से पन्नियां बीनकर जलाया गया था शव
अब से करीब दो माह पूर्व भी इसी तरह एक अज्ञात शव को जलाया गया था। उस समय अंधेरे का फायदा उठाकर कूड़े के ढेर पर पड़ीं पन्नियां बीनकर शव को फूंक दिया था। सुबह लोगों ने देखा तो वह शव पूरी तरह से जल नहीं पाया था। कुत्ते शव नोंचकर अपना निवाला बना रहे थे। इस संबंध में एसएसपी से शिकायत भी की गई थी।
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क्या कहते हैं लोग
लाश जलाने का इनका कोई समय नहीं है। जब आए और जलाकर चले गए। फिर लौटकर यह भी नहीं देखते कि शव पूरा जल गया है या नहीं। कम से कम शव को पूरा जलाएं तो कुत्ते शवों को निवाला नहीं बनाएंगे।
- पप्पू श्रीवास्तव
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इस एरिया में लाश जलाने से इतनी दुर्गंध आती है कि लोग शाम के समय खाना तक नहीं खा सकते। पूरा एरिया नर्क बन गया है। देर सवेर लोग क्षेत्र में जाने से डरते हैं। अब तो कुछ सुधार होना चाहिए।
- राजीव सागर
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दो माह पहले हमने खुद पन्नी से लाश जलाते उस स्वीपर को टोका था, वे किसी की नहीं सुनते। वे अक्सर इसी क्षेत्र में आकर लाश को जला जाते हैं, जबकि यह गलत है। अब तो लोगों का आना-जाना भी है।
- प्रेमपाल
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अज्ञात लाश भी हो तो भी इस तरह से अंतिम संस्कार नहीं करना चाहिए। इसके लिए श्मशान भूमि बनी है। वहां शव को ले जाकर अंतिम संस्कार करें तो शायद किसी को कोई दिक्कत नहीं होगी।
- गौरव कुमार
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शव को कूड़े के ढेर पर कुछ लकड़ियां रखकर जलाने के मामले की जांच एसपी सिटी को सौंप दी गई है। सीओ सिटी से भी कहा गया है कि वह जानकारी करें। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- अशोक कुमार त्रिपाठी, एसएसपी
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शुक्रवार की शाम पुलिस ने पोस्टमार्टम हाउस के पीछे जाने वाली सड़क पर एक अज्ञात दिव्यांग युवक का शव कूड़े के ढेर पर कुछ लकड़ियां और उपले रखकर जला दिया था। इस युवक की लाश 26 फरवरी को अस्पताल रोड पर नाले में पड़ी मिली थी। युवक की शिनाख्त न होने पर पुलिस ने शुक्रवार शाम को शव को फूंक दिया। मानवता को शर्मसार करने वाले पुलिस के इस कारनामे को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो आला अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला आया। इस पर एसएसपी ने एसपी सिटी को इस मामले की जांच सौंप दी।
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कभी वीरान होता था इलाका, अब कुछ दूरी पर बस चुकी कॉलोनी
बदायूं। जिस जगह सड़क किनारे लगे कूड़े के ढेर पर पुलिस ने एक दिव्यांग युवक के शव को जला दिया, कभी वह इलाका वीरान हुआ करता था। अंधेरा तो दूर, लोग दिन में उधर जाने से कतराते थे। करीब 20 साल पहले की बात करें तो यहां अज्ञात शवों को ऐसे ही झाड़ियों में फेंक दिया जाता था, जिन्हें हर रोज आवारा कुत्ते निवाला बनाते थे। तमाम शिकायतों के बाद पुलिस ने शवों को फेंकना बंद कर उनको जलाना शुरू कर दिया, लेकिन जगह नहीं बदली। आज भी थोड़ी सी लकड़ियां डालकर ऐसे ही अज्ञात शव फूूंक दिए जाते हैं। बाद में अवशेष कुत्ते उठा ले जाते हैं। यह हालत तब है जब शहर में एक नहीं दो-दो श्मशान बने हैं।
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पुलिस ऑफिस से मात्र पांच सौ मीटर दूर पोस्टमार्टम हाउस के पीछे विकास की पूरी कोशिश की गई है। लोगों को निकास के लिए पक्की सड़क डाली गई है। कुछ दूरी पर कॉलोनी भी बन गई है, जहां लोगों का आना जाना लगा रहता है। इस इलाके में कुछ तो नगर पालिका कूड़ा डालकर गंदगी फैलाए हुए है, बाकी पुलिस विभाग सुधरने नहीं दे रहा है। पुलिस विभाग ने इस इलाके को श्मशान घाट बना दिया है। पुलिस यहां ऐसे शवों का अंतिम संस्कार करती है, जो लावारिस होते हैं। इन शवों को सड़क किनारे कूड़े के ढेर पर रखकर जला दिया जाता है। लकड़ियां मिलीं तो ठीक वरना उपले आदि डालकर शव फूंक दिए जाते हैं। ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई बार हुआ है। लोगों ने अज्ञात शवों के अवशेषों के फोटो तक खींचकर वायरल किए हैं। यही वजह है कि इस इलाके में घूमने वाले कुत्ते खूंखार हो चुके हैं। वे इसी तलाश में रहते हैं कि कब यहां अज्ञात लाशें फूंकी जाएं और उनके अवशेष निवाला बन सकें।
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कूड़े के ढेर से पन्नियां बीनकर जलाया गया था शव
अब से करीब दो माह पूर्व भी इसी तरह एक अज्ञात शव को जलाया गया था। उस समय अंधेरे का फायदा उठाकर कूड़े के ढेर पर पड़ीं पन्नियां बीनकर शव को फूंक दिया था। सुबह लोगों ने देखा तो वह शव पूरी तरह से जल नहीं पाया था। कुत्ते शव नोंचकर अपना निवाला बना रहे थे। इस संबंध में एसएसपी से शिकायत भी की गई थी।
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क्या कहते हैं लोग
लाश जलाने का इनका कोई समय नहीं है। जब आए और जलाकर चले गए। फिर लौटकर यह भी नहीं देखते कि शव पूरा जल गया है या नहीं। कम से कम शव को पूरा जलाएं तो कुत्ते शवों को निवाला नहीं बनाएंगे।
- पप्पू श्रीवास्तव
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इस एरिया में लाश जलाने से इतनी दुर्गंध आती है कि लोग शाम के समय खाना तक नहीं खा सकते। पूरा एरिया नर्क बन गया है। देर सवेर लोग क्षेत्र में जाने से डरते हैं। अब तो कुछ सुधार होना चाहिए।
- राजीव सागर
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दो माह पहले हमने खुद पन्नी से लाश जलाते उस स्वीपर को टोका था, वे किसी की नहीं सुनते। वे अक्सर इसी क्षेत्र में आकर लाश को जला जाते हैं, जबकि यह गलत है। अब तो लोगों का आना-जाना भी है।
- प्रेमपाल
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अज्ञात लाश भी हो तो भी इस तरह से अंतिम संस्कार नहीं करना चाहिए। इसके लिए श्मशान भूमि बनी है। वहां शव को ले जाकर अंतिम संस्कार करें तो शायद किसी को कोई दिक्कत नहीं होगी।
- गौरव कुमार
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शव को कूड़े के ढेर पर कुछ लकड़ियां रखकर जलाने के मामले की जांच एसपी सिटी को सौंप दी गई है। सीओ सिटी से भी कहा गया है कि वह जानकारी करें। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- अशोक कुमार त्रिपाठी, एसएसपी