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अभिलेखों से खाद मिलान करना एसआईटी के लिए बना चुनौती
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बदायूं। तीन करोड़ के खाद घोटाले की जांच कर रही एसआईटी को अभिलेखों से मिलान करना एक चुनौती बन गया है। एसआईटी भी खाद का मिलान करते-करते परेशान हो गई है। इसके लिए शुरू से रिकॉर्ड खंगालना पड़ रहा है। पता लगाया जा रहा है कि कब-कब खाद आई, फिर कैसे और कब सप्लाई हुई। इसकी जांच शुरू हुए करीब एक माह हो चुका है परंतु अब तक खाद का मिलान नहीं हो सका है।
इस संबंध में करीब डेढ़ माह पूर्व सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पीसीएफ के जिला प्रबंधक अशोक कुमार शर्मा ने गोदाम प्रभारी जगतपाल, परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारी को नामजद कराया था। इससे पहले खाद घोटाले की विभागीय जांच हुई, जिसमें तीनों लोग दोषी पाए गए। उस जांच रिपोर्ट के आधार पर ही डीएम के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई। मामला गंभीर देखते हुए एसएसपी अशोक कुमार ने खाद घोटाले की जांच को एसआईटी गठित की। तभी से एसआईटी घोटाले की जांच कर रही है। खाद घोटाले की जांच शुरू होने के बाद एसआईटी ने पीसीएफ से अभिलेख अपने कब्जे में लिए थे, परंतु खाद गबन के संबंध में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला था। इससे खाद का मिलान करना एसआईटी को और भी मुश्किल हो गया।
एसआईटी में शामिल एक अधिकारी की माने तो नामजदों पर चार्ज आने से पहले तक के रिकॉर्ड चेक किए जा रहे हैं। तब से लेकर सैकड़ों बार ट्रक खाद लेकर आए होंगे। उनमें कितनी खाद आई थी, कब आई थी। उसके बाद गोदामों से कब और कैसे वितरण हुई। यह मिलान करना मुश्किल हो गया है। अभिलेखों से खाद का तालमेल नहीं मिल पा रहा है। इससे एसआईटी भी चकरा गई है कि आखिर घोटाला कहां से शुरू हुआ।
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इस संबंध में करीब डेढ़ माह पूर्व सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पीसीएफ के जिला प्रबंधक अशोक कुमार शर्मा ने गोदाम प्रभारी जगतपाल, परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारी को नामजद कराया था। इससे पहले खाद घोटाले की विभागीय जांच हुई, जिसमें तीनों लोग दोषी पाए गए। उस जांच रिपोर्ट के आधार पर ही डीएम के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई। मामला गंभीर देखते हुए एसएसपी अशोक कुमार ने खाद घोटाले की जांच को एसआईटी गठित की। तभी से एसआईटी घोटाले की जांच कर रही है। खाद घोटाले की जांच शुरू होने के बाद एसआईटी ने पीसीएफ से अभिलेख अपने कब्जे में लिए थे, परंतु खाद गबन के संबंध में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला था। इससे खाद का मिलान करना एसआईटी को और भी मुश्किल हो गया।
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एसआईटी में शामिल एक अधिकारी की माने तो नामजदों पर चार्ज आने से पहले तक के रिकॉर्ड चेक किए जा रहे हैं। तब से लेकर सैकड़ों बार ट्रक खाद लेकर आए होंगे। उनमें कितनी खाद आई थी, कब आई थी। उसके बाद गोदामों से कब और कैसे वितरण हुई। यह मिलान करना मुश्किल हो गया है। अभिलेखों से खाद का तालमेल नहीं मिल पा रहा है। इससे एसआईटी भी चकरा गई है कि आखिर घोटाला कहां से शुरू हुआ।
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