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जीते जी उत्पीड़न झेला, सिस्टम से मिली हार....जान की ‘कीमत’ 31 हजार
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किसान का दो मंजिला पुराना मकान। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। ये एक मजबूर किसान की मौत नहीं, बल्कि उस सिस्टम की ‘लाश’ है जो पुलिस और प्रशासन के कदमों तले दबकर न जाने कब का मर चुका है। किसान किशनपाल तो अपनी जान देकर चला गया, लेकिन कई ऐसे सवाल अपने पीछे छोड़ गया जो इस सिस्टम के मुंह पर तमाचा हैं। जीते जी उसे उलाहने और प्रताड़ना मिली लेकिन मरने के बाद वायदे और आश्वासन लेकर अधिकारियों की लंबी कतार उसके घर के सामने खड़ी हो गई। वायदे भी ऐसे जो आने वाले समय में निश्चित ही पेंच में फंसेंगे।
किसान की मौत के बाद बृहस्पतिवार को पूरे गांव में एक अजीब सी खामोशी थी, बस चीत्कार थी तो किशनपाल के घर में, जहां एक मजबूर किसान सिस्टम से लड़ते लड़ते अपनी जान गवां बैठा था। किशनपाल के बेटे अमरजीत के अनुसार उसकी पिता की मौत के जितना आरोपी जिम्मेदार है, उतना ही पुुलिस भी जिम्मेदार है। खाकी को जनता की हिफाजत के लिए बनाया गया है लेकिन यही खाकी उसके बाप की मौत की वजह बन गई। जिन अधिकारियों ने जीते जी उसके पिता की नहीं सुनी वही उनकी मौत के बाद यहां आकर आश्वासनों की झड़ी लगाकर चले गए।
इधर गांव में देखें तो किसान की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। दोमंजिला मकान जरूर है लेकिन खेती के नाम पर कुछ नहीं है। परिवार मजदूरी पर निर्भर है। बृहस्पतिवार को यहां आए तहसीलदार करनवीर सिंह ने मृतक के बेटे को 31 हजार का फौरी ‘मरहम’ लगा दिया, बाकी केवल आश्वासनों पर ही बात चलती रही। अधिकारियों के अनुसार, वे कोशिश करेंगे कि किसान के परिवार को किसान दुर्घटना बीमा के तहत पांच लाख रुपये की सहायता राशि मिल जाए, लेकिन इसमें भी तमाम पेंच हैं जो भविष्य में आगे आने हैं। संवाद
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ये भी हैं खाकी के जुल्म के शिकार
केस-1-
मई-2020 में पुलिस ने गोमांस सप्लाई की सूचना पर उसहैत के भंद्रा निवासी नन्हे पुत्र अब्दुल बशीर के घर छापा मारा था। उस वक्त नन्हें तो नहीं मिला लेकिन उसके पिता अब्दुल बशीर (63) घर पर थे। पुलिस उन्हें पकड़कर गांव के बाहर ले गई। आरोप था कि उनकी जमकर पिटाई की गई, जिससे अब्दुल बशीर की मौत हो गई।
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केस- 2
जून 2019 में दातागंज में एक महिला के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था। उसने एक युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन पुलिस ने उसे अनसुना कर दिया। उसने अधिकारियों से भी शिकायत की लेकिन फिर भी किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया। त्रस्त महिला ने एक सुसाइड नोट छोड़कर फांसी के फंदे से लटककर जान दे दी थी।
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एसएसपी कार्यालय में आत्मदाह करने का मामला गंभीर है। पीड़ित को जिला प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद दी जाएगी। किसान की मृत्य होने पर उसे कृषक दुर्घटना बीमा योजना का लाभ दिया जाता है, पर इसके लिए जमीन का होना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति बंटाई पर जमीन कर रहा है तो उसे भी योजना का लाभ दिया जाता है, लेकिन उसमें कुछ शर्तें हैं, उसी के अनुसार योजना का लाभ मिलता है।
-एसपी वर्मा, एसडीएम सदर
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किसान की मौत के बाद बृहस्पतिवार को पूरे गांव में एक अजीब सी खामोशी थी, बस चीत्कार थी तो किशनपाल के घर में, जहां एक मजबूर किसान सिस्टम से लड़ते लड़ते अपनी जान गवां बैठा था। किशनपाल के बेटे अमरजीत के अनुसार उसकी पिता की मौत के जितना आरोपी जिम्मेदार है, उतना ही पुुलिस भी जिम्मेदार है। खाकी को जनता की हिफाजत के लिए बनाया गया है लेकिन यही खाकी उसके बाप की मौत की वजह बन गई। जिन अधिकारियों ने जीते जी उसके पिता की नहीं सुनी वही उनकी मौत के बाद यहां आकर आश्वासनों की झड़ी लगाकर चले गए।
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इधर गांव में देखें तो किसान की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। दोमंजिला मकान जरूर है लेकिन खेती के नाम पर कुछ नहीं है। परिवार मजदूरी पर निर्भर है। बृहस्पतिवार को यहां आए तहसीलदार करनवीर सिंह ने मृतक के बेटे को 31 हजार का फौरी ‘मरहम’ लगा दिया, बाकी केवल आश्वासनों पर ही बात चलती रही। अधिकारियों के अनुसार, वे कोशिश करेंगे कि किसान के परिवार को किसान दुर्घटना बीमा के तहत पांच लाख रुपये की सहायता राशि मिल जाए, लेकिन इसमें भी तमाम पेंच हैं जो भविष्य में आगे आने हैं। संवाद
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ये भी हैं खाकी के जुल्म के शिकार
केस-1-
मई-2020 में पुलिस ने गोमांस सप्लाई की सूचना पर उसहैत के भंद्रा निवासी नन्हे पुत्र अब्दुल बशीर के घर छापा मारा था। उस वक्त नन्हें तो नहीं मिला लेकिन उसके पिता अब्दुल बशीर (63) घर पर थे। पुलिस उन्हें पकड़कर गांव के बाहर ले गई। आरोप था कि उनकी जमकर पिटाई की गई, जिससे अब्दुल बशीर की मौत हो गई।
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केस- 2
जून 2019 में दातागंज में एक महिला के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था। उसने एक युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन पुलिस ने उसे अनसुना कर दिया। उसने अधिकारियों से भी शिकायत की लेकिन फिर भी किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया। त्रस्त महिला ने एक सुसाइड नोट छोड़कर फांसी के फंदे से लटककर जान दे दी थी।
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एसएसपी कार्यालय में आत्मदाह करने का मामला गंभीर है। पीड़ित को जिला प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद दी जाएगी। किसान की मृत्य होने पर उसे कृषक दुर्घटना बीमा योजना का लाभ दिया जाता है, पर इसके लिए जमीन का होना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति बंटाई पर जमीन कर रहा है तो उसे भी योजना का लाभ दिया जाता है, लेकिन उसमें कुछ शर्तें हैं, उसी के अनुसार योजना का लाभ मिलता है।
-एसपी वर्मा, एसडीएम सदर