{"_id":"625c5f4f270b9b2a3a7c9700","slug":"crime-health-badaun-news-bly481822029","type":"story","status":"publish","title_hn":"बदायूं में एक के बाद एक कई दवा घोटाले, सीबीआई कर रही है जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बदायूं में एक के बाद एक कई दवा घोटाले, सीबीआई कर रही है जांच
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बदायूं। जिले में स्वास्थ्य विभाग में घोटाले दर घोटाले होते रहे हैं। इसी क्रम में अब वर्ष 2004 से 2006 के बीच हुए दवा खरीद घोटाले का जिन्न बोतल से बाहर निकला है। इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने लखनऊ में बदायूं के तीन पूर्व सीएमओ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। अन्य घोटालों को बात करें तो 2007 से 2012 के बीच एनआरएचएम में करोड़ों का घोटाला हुआ था तो वर्ष 2013-14 में भी दवा खरीद घोटाला हुआ। इसमें दो तत्कालीन सीएमओ व पांच बाबुओं के खिलाफ सीबीआई की देहरादून ब्रांच जांच कर रही है। इसमें चार तत्कालीन सीएमओ और आठ बाबुओं समेत 26 लोग जांच के घेरे में हैं। नई रिपोर्ट के बाद बदायूं सीएमओ से पुराना रिकार्ड तलब किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग में एनआरएचएम (अब एनएचएम) के तहत 2007 से 2012 के बीच फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये की खरीद की गई थी। प्रदेश स्तर पर यह घोटाला उन दिनों सुर्खियों में आया जब लखनऊ में एक के बाद एक सीएमओ की संदिग्ध हालात में मौत हुई। एक सीएमओ की हत्या भी की गई थी। मामले की जांच सीबीआई के पास पहुंची तो घोटाले के तार बदायूं से भी जुड़ गए। यह घोटाला जिले की 18 सीएचसी और पीएचसी पर हुआ था। इनमें तीन सीएचसी गुन्नौर, रजपुरा और जुनावाई अब संभल जिले में हैं। गुन्नौर को नव सृजित जिला संभल में शामिल किए जाने के बाद यह सीएचसी भी संभल का हिस्सा हो गईं । सीबीआई ने जांच के दौरान पाया था कि एनआरएचएम के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर दवाएं और उपकरण खरीदकर सीएचसी-पीएचसी को भेजे गए। उनको वहां रिसीव भी किया गया। लेकिन यह खरीद पूरी तरह से फर्जी थी।
इस मामले में सीबीआई आरबी यादव, शिशुपाल सिंह, रफत हुसैन, वेद गंगवार, राजेश राय, सुरेश चंद्र आदि बाबुओं से पूछताछ भी कर चुकी है। चार तत्कालीन सीएमओ से भी पूछताछ हो चुकी है। गौर करने की बात यह भी है कि एनआरएचएम घोटाले से जुड़े कई रिकार्ड भी बदायूं से गायब पाए गए हैं। ऐसे में इस मामले में अब तक कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है।
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शनिवार को आर्थिक अपराध शाखा ने 2004 से 2006 तक जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है उनमें तत्कालीन सीएमओ डॉ. हरिराम, डॉ. एमपी बंसल, डॉ. सुधाकर द्विवेदी, जिला अस्पताल के तत्कलीन एसीएमओ डॉ. सीपी सिंघल, तत्कालीन फार्मासिस्ट अनुपम कुमार दुबे, आरबी यादव, सुरेश चौरिसिया को आरोपी बनाया गया है।
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स्वास्थ्य विभाग में गहरी हैं भ्रष्टाचार की जड़ें
स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं। कोरोना की पहली लहर के दौरान तत्कालीन सीएमओ डॉ. यशपाल सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। उनके खिलाफ शासन स्तर से जांच चल रही है। सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा के खिलाफ भर्ती घोटाला में जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेखा रानी पर नियम विरुद्ध तैनाती के मामले में जांच एडी हेल्थ डॉ. दीपक अहोरी कर रहे हैं। रिटायर्ड बाबू मोहम्मद अशरफ के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच चल रही है। गौर करने वाली बात यह है कि इन मामलों में भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही।
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भ्रष्टाचार के मामले में तत्कालीन सीएमओ और कुछ कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी विभिन्न माध्यमों से मालूम हुई है। इस मामले में ज्यादा जानकारी नहीं है। अब तक किसी जांच एजेंसी ने इस प्रकरण को लेकर मुझसे संपर्क नहीं किया है। उच्च स्तर से भी किसी तरह के दिशा निर्देश नहीं मिले हैं।
-डॉ. दीपक वार्ष्णेय, सीएमओ बदायूं
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स्वास्थ्य विभाग में एनआरएचएम (अब एनएचएम) के तहत 2007 से 2012 के बीच फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये की खरीद की गई थी। प्रदेश स्तर पर यह घोटाला उन दिनों सुर्खियों में आया जब लखनऊ में एक के बाद एक सीएमओ की संदिग्ध हालात में मौत हुई। एक सीएमओ की हत्या भी की गई थी। मामले की जांच सीबीआई के पास पहुंची तो घोटाले के तार बदायूं से भी जुड़ गए। यह घोटाला जिले की 18 सीएचसी और पीएचसी पर हुआ था। इनमें तीन सीएचसी गुन्नौर, रजपुरा और जुनावाई अब संभल जिले में हैं। गुन्नौर को नव सृजित जिला संभल में शामिल किए जाने के बाद यह सीएचसी भी संभल का हिस्सा हो गईं । सीबीआई ने जांच के दौरान पाया था कि एनआरएचएम के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर दवाएं और उपकरण खरीदकर सीएचसी-पीएचसी को भेजे गए। उनको वहां रिसीव भी किया गया। लेकिन यह खरीद पूरी तरह से फर्जी थी।
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इस मामले में सीबीआई आरबी यादव, शिशुपाल सिंह, रफत हुसैन, वेद गंगवार, राजेश राय, सुरेश चंद्र आदि बाबुओं से पूछताछ भी कर चुकी है। चार तत्कालीन सीएमओ से भी पूछताछ हो चुकी है। गौर करने की बात यह भी है कि एनआरएचएम घोटाले से जुड़े कई रिकार्ड भी बदायूं से गायब पाए गए हैं। ऐसे में इस मामले में अब तक कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है।
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शनिवार को आर्थिक अपराध शाखा ने 2004 से 2006 तक जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है उनमें तत्कालीन सीएमओ डॉ. हरिराम, डॉ. एमपी बंसल, डॉ. सुधाकर द्विवेदी, जिला अस्पताल के तत्कलीन एसीएमओ डॉ. सीपी सिंघल, तत्कालीन फार्मासिस्ट अनुपम कुमार दुबे, आरबी यादव, सुरेश चौरिसिया को आरोपी बनाया गया है।
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स्वास्थ्य विभाग में गहरी हैं भ्रष्टाचार की जड़ें
स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं। कोरोना की पहली लहर के दौरान तत्कालीन सीएमओ डॉ. यशपाल सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। उनके खिलाफ शासन स्तर से जांच चल रही है। सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा के खिलाफ भर्ती घोटाला में जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेखा रानी पर नियम विरुद्ध तैनाती के मामले में जांच एडी हेल्थ डॉ. दीपक अहोरी कर रहे हैं। रिटायर्ड बाबू मोहम्मद अशरफ के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच चल रही है। गौर करने वाली बात यह है कि इन मामलों में भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही।
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भ्रष्टाचार के मामले में तत्कालीन सीएमओ और कुछ कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी विभिन्न माध्यमों से मालूम हुई है। इस मामले में ज्यादा जानकारी नहीं है। अब तक किसी जांच एजेंसी ने इस प्रकरण को लेकर मुझसे संपर्क नहीं किया है। उच्च स्तर से भी किसी तरह के दिशा निर्देश नहीं मिले हैं।
-डॉ. दीपक वार्ष्णेय, सीएमओ बदायूं