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असली वारिस भटक रहे, दबंग कब्जाए बैठे जमीन
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दातागंज। पुरखो की छोड़ी हुई जमीनों पर और लोग कब्जा जमाए बैठे हैं जबकि जमीन का असली वारिस दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। अधिकारियों के चक्कर लगाते-लगाते थक हारकर घर बैठ गए हैं जमीन वापस मिलने की आस ही छोड़ दी है।
सरकार ने अवैध रूप से जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ एंटी भूमाफिया अभियान चला रखा है इस अभियान से कुछ सरकारी जमीनें तो भूमाफिया के कब्जों से मुक्त हुईं हैं लेकिन जिन किसानों की निजी जमीनों पर दबंगों का कब्जा है वह तमाम प्रयासों के बावजूद भी सफल नहीं हो रहे है कब्जा धारक किसी हाल में कब्जा नही छोड़ रहे रहे हैं। नवादा वदन गांव के भिखारी, लाल राजेंद्र कलपु आदि करीब एक दर्जन किसान वर्षों से अपनी जमीन मुक्त कराने के प्रयास मे लगे रहे अंत मे थक हर कर खामोश हो कर घर बैठ गए पड़ोस के गांव चितरी के पांच -छह परिवारों ने कब्जा करने वालों को मिट्टी के मोल करीब दो सौ बीघा जमीन बेच दी। गांव रम्मपुरा के ओंकारसिंह दुर्विजय, धर्मचन्द्र, रामसरन, मकुन्दी, राजेस्वर, धनपाल, साधू, वीरपाल, रामपाल सिंह, अनंगपाल, सूरजपाल, पुत्तू, वेदराम लालबहादुर ननकू लाल आदि किसानों की हजारों बीघा जमीन दबंगों के कब्जे मे चल रही है। इनमें अधिकांश लोग खामोश बैठ हैं। लेकिन 25 -30 प्रतिशत किसान अब भी अपने हक के लिए लड़ रहे है सेवानिवृत्त अध्यापक ओंकार सिंह ने बताया कि उनके दो अन्य भाइयों समेत दो सौ बीघा से ज्यादा जमीन पर लोग अवैध कब्जा किए हुए हैं। पिछले चार वर्षों से कब्जा छुड़ाने के लिए अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन वह निराश नहीं हुए हैं। विसौरिया सेखूपुर शहपुर मुसतमपुर और नगरिया खनु आदि दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां भू स्वामी मारे-मारे घूम रहे हैं।
-समाधान दिवस के अलावा जगह -जगह कैंप करके जमीनों को कब्जा मुक्त कराया जा रहा है कब्जाधारकों पर मुकदमे कायम किए जा रहे हैं जिस जगह कब्जा होने की शिकायत मिलती है वहां तहसील और पुलिस की टीम तुरंत मौके पर जाकर अवैध कब्जे हटाती है और वास्तविक वारिस को कब्जा दिलाने के साथ सुरक्षा प्रदान करती है। कुछ मामले ऐसे हैं जिनमें मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन है उनमें हस्तक्षेप नहीं हो रहा है --केबी सिंह, उप जिलाधिकारी दातागंज
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सरकार ने अवैध रूप से जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ एंटी भूमाफिया अभियान चला रखा है इस अभियान से कुछ सरकारी जमीनें तो भूमाफिया के कब्जों से मुक्त हुईं हैं लेकिन जिन किसानों की निजी जमीनों पर दबंगों का कब्जा है वह तमाम प्रयासों के बावजूद भी सफल नहीं हो रहे है कब्जा धारक किसी हाल में कब्जा नही छोड़ रहे रहे हैं। नवादा वदन गांव के भिखारी, लाल राजेंद्र कलपु आदि करीब एक दर्जन किसान वर्षों से अपनी जमीन मुक्त कराने के प्रयास मे लगे रहे अंत मे थक हर कर खामोश हो कर घर बैठ गए पड़ोस के गांव चितरी के पांच -छह परिवारों ने कब्जा करने वालों को मिट्टी के मोल करीब दो सौ बीघा जमीन बेच दी। गांव रम्मपुरा के ओंकारसिंह दुर्विजय, धर्मचन्द्र, रामसरन, मकुन्दी, राजेस्वर, धनपाल, साधू, वीरपाल, रामपाल सिंह, अनंगपाल, सूरजपाल, पुत्तू, वेदराम लालबहादुर ननकू लाल आदि किसानों की हजारों बीघा जमीन दबंगों के कब्जे मे चल रही है। इनमें अधिकांश लोग खामोश बैठ हैं। लेकिन 25 -30 प्रतिशत किसान अब भी अपने हक के लिए लड़ रहे है सेवानिवृत्त अध्यापक ओंकार सिंह ने बताया कि उनके दो अन्य भाइयों समेत दो सौ बीघा से ज्यादा जमीन पर लोग अवैध कब्जा किए हुए हैं। पिछले चार वर्षों से कब्जा छुड़ाने के लिए अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन वह निराश नहीं हुए हैं। विसौरिया सेखूपुर शहपुर मुसतमपुर और नगरिया खनु आदि दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां भू स्वामी मारे-मारे घूम रहे हैं।
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-समाधान दिवस के अलावा जगह -जगह कैंप करके जमीनों को कब्जा मुक्त कराया जा रहा है कब्जाधारकों पर मुकदमे कायम किए जा रहे हैं जिस जगह कब्जा होने की शिकायत मिलती है वहां तहसील और पुलिस की टीम तुरंत मौके पर जाकर अवैध कब्जे हटाती है और वास्तविक वारिस को कब्जा दिलाने के साथ सुरक्षा प्रदान करती है। कुछ मामले ऐसे हैं जिनमें मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन है उनमें हस्तक्षेप नहीं हो रहा है --केबी सिंह, उप जिलाधिकारी दातागंज
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