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युवक की हत्या में मौसा को उम्रकैद सहित जुर्माना
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बदायूं। करीब छह साल पहले अवैध संबंधों के शक में युवक की हत्या के आरोपी को अपर सत्र न्यायाधीश दशम शक्तिपुत्र तोमर ने मुजरिम ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने 20 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
जनपद रामपुर के थाना शाहबाद क्षेत्र के गांव भगवंतपुर निवासी वादी प्रेमपाल पुत्र खूबचंद्र ने थाना बिसौली में छह नवंबर 2013 को रिपोर्ट लिखाई थी कि उसकी पत्नी कृष्णा कुमारी और पुत्र धर्मेंद्र भाई दूज पर पांच नवंबर 2013 को ग्राम भटपुरा थाना बिसौली आए थे। उनके साथ उसके गांव का ही रहने वाला उसका साढू हरद्वारी पुत्र फूल सिंह भी आया था। हरद्वारी शाम को अपनी बहन के घर कतगांव थाना वजीरगंज जाने की बात कहकर धर्मेंद्र को अपने साथ ले गया। रात में जब वह वापस आया तो उसने बताया कि उसका एक्सीडेंट हो गया और धर्मेंद्र बाइक से कूदकर कहीं भाग गया। इसके बाद वह उसकी पत्नी कृष्णा कुमारी से यह कहकर गया कि वह धर्मेंद्र की तलाश करने जा रहा है। उसके बाद हरद्वारी वहां से फरार हो गया। छह नवंबर को उसे सूचना मिली कि धर्मेन्द्र की लाश बदायूं-वजीरगंज मार्ग पर कालूपुर गांव के पास पड़ी है। हरद्वारी की पत्नी नानकवती उसकी पत्नी की सबसे छोटी बहन थी। हरद्वारी को शक था कि धर्मेन्द्र के उसकी पत्नी से अवैध संबंध है। इसी शक को लेकर अंदरखाने वह धर्मेंद्र को अपने रास्ते से हटाना चाहता था। हरद्वारी ने धर्मेंद्र की मौका पाकर हत्या कर दी। प्रेमपाल ने हरद्वारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना के बाद हरद्वारी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
अपर सत्र न्यायधीश शक्तिपुत्र तोमर ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी बिलालउद्दीन और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद हत्या में नामजद हरद्वारी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई, साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला। जुर्माने की रकम जमा होने पर उसमें से आधी धनराशि प्रेमपाल को देने का आदेश कोर्ट ने दिया है।
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जनपद रामपुर के थाना शाहबाद क्षेत्र के गांव भगवंतपुर निवासी वादी प्रेमपाल पुत्र खूबचंद्र ने थाना बिसौली में छह नवंबर 2013 को रिपोर्ट लिखाई थी कि उसकी पत्नी कृष्णा कुमारी और पुत्र धर्मेंद्र भाई दूज पर पांच नवंबर 2013 को ग्राम भटपुरा थाना बिसौली आए थे। उनके साथ उसके गांव का ही रहने वाला उसका साढू हरद्वारी पुत्र फूल सिंह भी आया था। हरद्वारी शाम को अपनी बहन के घर कतगांव थाना वजीरगंज जाने की बात कहकर धर्मेंद्र को अपने साथ ले गया। रात में जब वह वापस आया तो उसने बताया कि उसका एक्सीडेंट हो गया और धर्मेंद्र बाइक से कूदकर कहीं भाग गया। इसके बाद वह उसकी पत्नी कृष्णा कुमारी से यह कहकर गया कि वह धर्मेंद्र की तलाश करने जा रहा है। उसके बाद हरद्वारी वहां से फरार हो गया। छह नवंबर को उसे सूचना मिली कि धर्मेन्द्र की लाश बदायूं-वजीरगंज मार्ग पर कालूपुर गांव के पास पड़ी है। हरद्वारी की पत्नी नानकवती उसकी पत्नी की सबसे छोटी बहन थी। हरद्वारी को शक था कि धर्मेन्द्र के उसकी पत्नी से अवैध संबंध है। इसी शक को लेकर अंदरखाने वह धर्मेंद्र को अपने रास्ते से हटाना चाहता था। हरद्वारी ने धर्मेंद्र की मौका पाकर हत्या कर दी। प्रेमपाल ने हरद्वारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना के बाद हरद्वारी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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अपर सत्र न्यायधीश शक्तिपुत्र तोमर ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी बिलालउद्दीन और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद हत्या में नामजद हरद्वारी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई, साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला। जुर्माने की रकम जमा होने पर उसमें से आधी धनराशि प्रेमपाल को देने का आदेश कोर्ट ने दिया है।
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