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कोरोना की लड़ाई में इन योद्धाओं को हर कोई कर रहा सलाम

Wed, 08 Apr 2020 06:18 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 08 Apr 2020 06:18 PM IST
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corona warriors
बदायूं। कोरोना का कहर इस समय पूरे देश में फैला है। अमीर हो या गरीब, सभी इससे किसी न किसी रूप में प्रभावित हो रहे हैं। समाज का हर वर्ग पर संकट के दौर से गुजर रहा है। तमाम लोगों को तो रोजी रोटी के लाले पड़ रहे हैं। संकट के इस दौर में ऐसे में भी कुछ लोग हैं जो किसी न किसी रूप में सबकी मदद कर रहे हैं। कोई चिकित्सा के क्षेत्र में लगा है, तो कोई सफाई व्यवस्था का दारोमदार उठाए है। कोई जरूरतमंदों को रोजमर्रा की जरूरी चीजें उपलब्ध करा रहा है, तो कोई दूसरे लोगों की सेवा करके कोरोना योद्धा के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। बदायूं में कई कोरोना योद्धा हैं जो लोगों की मदद करके इस संकट के समय में अपना योगदान दे रहे हैं।
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कोरोना से युद्ध के तरीके सिखा रहे डॉ. राजेश
जिला अस्पताल में तैनात डॉ. राजेश कुमार वर्मा न केवल स्वयं कोरोना संदिग्ध मरीजों का उपचार कर रहे हैं, बल्कि अन्य चिकित्सक और स्टाफ को खुद के बचाव के तरीके भी सिखा रहे हैं। चार दिन पहले डॉ. राजेश ने उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक ऐसी टीम तैयार की, जो कोरोना के मरीजों का इलाज करने में पूरी तरह सक्षम है। इसके अलावा उन्होंने अपने स्टाफ को बेहतरीन तरीकों से सिखाया है कि वे किस प्रकार कोरोना संदिग्ध या पॉजिटिव मरीज का उपचार कर सकते हैं। उनके सैंपल ले सकते हैं। डॉ. राजेश वर्मा हैं, जिनसे स्टाफ को हौसला मिल रहा है। उनका कहना है कि इस समय उनकी जिम्मेदारी बढ़ गई है, जिसे वह पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास कर रहे हैं।
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शहरोज से कहां बचेगा कोरोना वायरस
जिला अस्पताल में तैनात लैब टेक्नीशियन शहरोज खान इससे पहले शहरोज खान कई बीमारियों के फैलने पर दिन रात काम करते रहे हैं। दो साल पहले जिले में बुुखार फैला था तो हर रोज मौत हो रही थीं। उस समय शहरोज ने दिन रात काम किया और एक-एक मरीज का सैंपल लेकर टेस्ट कराया। इसके अलावा सामान्य बुखार, मलेरिया और अन्य बीमारियों के सैंपल एकत्र करना आम बात है। आज कोरोना से जंग में शहरोज किसी से पीछे नहीं है। हर मोड़ पर कोरोना से लड़ने को तैयार है। जब पीपीई किट पहनकर निकलते है तो यह नहीं देखतो कि मरीज का धर्म या जाति क्या है। वह कहते हैं कि इस समय उनकी जिम्मेदारी सामान्य समय से ज्यादा है।
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मरीजों को निशुल्क इलाज कर रहे डॉ. संजीव
उझानी। कोरोना संकट के इस दौर में ऐसा नहीं कि लोग किसी और बीमारी की चपेट में नहीं आ रहे हों। बीमारी कोई भी हो सकती है , लेकिन अधिकतर निजी क्लीनिक और निजी अस्पतालों में डॉक्टर नहीं मिल रहे। ऐसे में डॉ. संजीव गुप्ता ने गरीब और बेसहारा मरीजों को बिना शुल्क इलाज लॉकडाउन के पहले दिन से शुरू कर दिया था। पहले तो वह फोन पर ही मरीज से उसकी बीमारी के बारे में पता करके दवाएं बता देते हैं, लेकिन अगर दिक्कत ज्यादा है तो देखने से भी गुरेज नहीं करते। वह कोरोना से बचाव के बारे में भी मरीजों को अहम जानकारियां देते हैं। वह कहते हैं कि इस नाजुक समय में लोगों की सेवा में जो बन पड़े, उसे करने से किसी को पीछे नहीं हटना चाहिए।

कोरोना योद्घाओं को भी रहता है गोविंदा की चाय का इंतजार
उझानी। लॉकडाउन के बाद सड़कों पर पसरे सन्नाटे के बीच अगर कोई लोगों का ख्याल रखता है तो वो पुलिस, स्वास्थ्य और सफाई कर्मचारी हैं। उनके आराम और भोजन का कोई समय निर्धारित नहीं है। मगर इन योद्धाओं को स्वयंसेवी कोई खास दिक्कत नहीं होने दे रहे। ऐसे लोगों में पंजाबी कालोनी के गोविंदा सपरा का नाम भी शामिल है। वह अपने घर से दिन में दो बार करीब दो सौ लोगों के लिए चाय और बिस्कुट के पैकेट लेकर अपनी कार से निकलते हैं। पुलिस, सफाई कर्मियों, स्वास्थ्यकर्मियों को चाय और बिस्कुट मुहैया कराते समय रास्ते में गोविंदा को भूखा प्यासा कोई मिल जाए तो उसे भी चाय पिला देते हैं।
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