{"_id":"5e7a32c88ebc3e76d156c398","slug":"corona-effect-badaun-news-bly400686113","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना : संदिग्ध मरीजे बढ़े तो प्राइवेट चिकित्सकों ने बढ़ा दी फीस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना : संदिग्ध मरीजे बढ़े तो प्राइवेट चिकित्सकों ने बढ़ा दी फीस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। पूरा देश कोरोना वायरस के खौफ से दहशत में है। विभिन्न राज्यों में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। संदिग्ध मरीज भी सामने आ रहे हैं। लोगों में खौफ इतना है कि सामान मरीजों को भी कोरोना वायरस का संदिग्ध माना जाने लगा है। महामारी के इस बुरे दौर में एकजुटता का परिचय देने के साथ सरकार और एक-दूसरे की मदद करने को आगे आ रहे हैं। मगर जिले के प्राइवेट चिकित्सकों ने इसके उलट फैसला किया है। इस मौके का नाजायज फायदा उठाकर निजी चिकित्सक इमरजेंसी के नाम पर मरीजों से अपनी फीस बढ़ाकर वसूल रहे हैं।
जिले में कुल 110 प्राइवेट हॉस्पिटल और क्लीनिक हैं। इनमें बैठने वाले चिकित्सकों का ओपीडी और इमरजेंसी का समय तय कर रखा है। कुछ चिकित्सकों ने ओपीडी टाइम को ही इमरजेंसी बना दिया है। उनके यहां मरीजों के नंबर लगते हैं। जल्दी वाले मरीज को ओपीडी में दिखाने का अलग से चार्ज देना पड़ता है। जो मरीज अलग से फीस नहीं देते उन्हें अपना नंबर आने के इंतजार में घंटों बैठना पड़ता है। कोरोना वायरस के बहाने डॉक्टरों ने ओपीडी बंद करके मरीजों को इमरजेंसी के नाम पर देखना शुरू कर दिया है। इमरजेंसी के नाम पर मरीजों से मुंहमांगी फीस वसूली जा रही है। इमरजेंसी फीस लिए बगैर डॉक्टर मरीज को हाथ नहीं लगाते हैं। सिविल लाइंस एरिया के तीन चिकित्सक कोरोना वाइरस आने के बाद से दो सौ रुपये से लेकर पांच सौ तक वसूल रहे है। वहीं कोतवाली क्षेत्र के कई चिकित्सक इमरजेंसी के नाम पर फीस बढ़ाकर ले रहे है।
दरअसल फीस नहीं बढ़ाई गई है। कोरोना को लेकर किसी हॉस्पिटल में ओपीडी नहीं चल रही है। इससे जो भी मरीज आ रहे हैं, उनसे इमरजेंसी के मुताबिक फीस ली जा रही है, नहीं तो मरीजों की भीड़ लगनी शुरू हो जाएगी।
विज्ञापन
- डॉ. शरद कुमार गुप्ता, सचिव आईएमए
विज्ञापन
जिले में कुल 110 प्राइवेट हॉस्पिटल और क्लीनिक हैं। इनमें बैठने वाले चिकित्सकों का ओपीडी और इमरजेंसी का समय तय कर रखा है। कुछ चिकित्सकों ने ओपीडी टाइम को ही इमरजेंसी बना दिया है। उनके यहां मरीजों के नंबर लगते हैं। जल्दी वाले मरीज को ओपीडी में दिखाने का अलग से चार्ज देना पड़ता है। जो मरीज अलग से फीस नहीं देते उन्हें अपना नंबर आने के इंतजार में घंटों बैठना पड़ता है। कोरोना वायरस के बहाने डॉक्टरों ने ओपीडी बंद करके मरीजों को इमरजेंसी के नाम पर देखना शुरू कर दिया है। इमरजेंसी के नाम पर मरीजों से मुंहमांगी फीस वसूली जा रही है। इमरजेंसी फीस लिए बगैर डॉक्टर मरीज को हाथ नहीं लगाते हैं। सिविल लाइंस एरिया के तीन चिकित्सक कोरोना वाइरस आने के बाद से दो सौ रुपये से लेकर पांच सौ तक वसूल रहे है। वहीं कोतवाली क्षेत्र के कई चिकित्सक इमरजेंसी के नाम पर फीस बढ़ाकर ले रहे है।
विज्ञापन
दरअसल फीस नहीं बढ़ाई गई है। कोरोना को लेकर किसी हॉस्पिटल में ओपीडी नहीं चल रही है। इससे जो भी मरीज आ रहे हैं, उनसे इमरजेंसी के मुताबिक फीस ली जा रही है, नहीं तो मरीजों की भीड़ लगनी शुरू हो जाएगी।
विज्ञापन
- डॉ. शरद कुमार गुप्ता, सचिव आईएमए