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स्वास्थ्य विभाग का सर्विलांस तंत्र फेल, कोरोना पॉजिटिव खुद पहुंच रहे अस्पताल
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बदायूं। जिले में जैसे-जैसे कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है, वैसे-वैसे स्वास्थ्य विभाग का रवैया ढीला होता दिखाई दे रहा है। शुरुआत में जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग ने सक्रियता दिखाई थी, कि रिपोर्ट आते ही एक टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच जाती थी और तुरंत मरीज को कोविड-19 हॉस्पिटल भेज दिया जाता था। एक साथ पूरे मोहल्ले में हलचल मच जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के पास रोजाना शाम को या रात को रिपोर्ट आ जाती है, लेकिन संक्रमितों को अस्पताल भेजने में हीलाहवाली चलती रहती थी। हाल में कुछ ऐसे मामले देखने को मिले हैं। जिनमें मरीज या तो खुद कोविड-19 अस्पताल पहुंचा है या फिर उसे दूसरे दिन शाम को हॉस्पिटल भेजा गया है।
केस -1
24 जुलाई को उसावां कस्बे में एक शिक्षिका कोरोना पॉजिटिव निकली थी। जब उसने अपना सैंपल कराया था। तब मोबाइल नंबर और अपना पता शहर के मोहल्ला शास्त्री नगर लिखवाया था। उसकी रिपोर्ट 24 जुलाई को पॉजिटिव आई थी। दूसरे दिन शाम तक उसे स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 हॉस्पिटल नहीं भेजा जा सका। आखिरकार शिक्षिका को 25 जुलाई की शाम उसका पति अपनी कार से हॉस्पिटल ले गया। तब कहीं उसे क्वांरटीन किया गया।
केस -2
16 जुलाई को शहर के कल्यान नगर में एक कोरोना पॉजिटिव निकला था। स्वास्थ्य विभाग ने उसे तलाश करने की जरूरत नहीं समझी। उसके पते पर पुलिस पहुंची थी। विभाग के पास उसका मोबाइल नंबर भी था। इसके बावजूद उसे अस्पताल पहुंचने में दिलचस्पी नहीं दिखाई गई। ये पॉजिटिव तीसरे दिन शाम को स्वयं कोविड-19 हॉस्पिटल पहुंचा था। जबकि मोहल्ले में इसको लेकर काफी चर्चा रही।
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केस -3
26 जुलाई को उसावां कस्बे के वार्ड नंबर नौ में एक सात वर्षीय बालिका कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी। पुलिस-प्रशासन और नगर पंचायत प्रशासन ने कस्बे को सील कराने की तैयारी शुरू कर दी थी लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने बालिका को अस्पताल पहुंचाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। आखिर बालिका को 27 जुलाई की शाम कोविड-19 अस्पताल भेजा गया। स्वास्थ्य विभाग की ये लापरवाही अन्य लोगों पर भारी पड़ सकती है।
केस -4
27 जुलाई की रात इस्लामनगर ब्लॉक क्षेत्र में एक नहीं तीन कोरोना पॉजिटिव निकले थे। स्वास्थ्य विभाग देर रात तक ये पता नहीं कर पाया कि आखिर ये पॉजिटिव कौन से इलाके रहने वाले हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी से लेकर सीएमओ तक उनके नाम पते से अनभिज्ञ रहे। देर रात तक संक्रमितों की खोजबीन की बात कही जाती रही। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने डीएम को भी उनका स्थान नहीं बताया।
-जैसे-जैसे ऊपर से गाइड लाइन आती है, वैसे ही हम काम करते हैं। अब जांच तीन तरह से हो रही है। कंफर्म जांच बरेली से हो रही है। बाकी ट्रूनेट से कराएंगे तो भी दो दिन तक इंतजार करना पड़ता है। रैपिड एंटीजन टेस्ट किट से भी स्पष्ट नहीं होता है। जब कंफर्म होता है तब हम संक्रमित कोविड-19 अस्पताल भेज देते हैं।
डॉ. सुशील कुमार, सर्विलांस अधिकारी
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केस -1
24 जुलाई को उसावां कस्बे में एक शिक्षिका कोरोना पॉजिटिव निकली थी। जब उसने अपना सैंपल कराया था। तब मोबाइल नंबर और अपना पता शहर के मोहल्ला शास्त्री नगर लिखवाया था। उसकी रिपोर्ट 24 जुलाई को पॉजिटिव आई थी। दूसरे दिन शाम तक उसे स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 हॉस्पिटल नहीं भेजा जा सका। आखिरकार शिक्षिका को 25 जुलाई की शाम उसका पति अपनी कार से हॉस्पिटल ले गया। तब कहीं उसे क्वांरटीन किया गया।
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केस -2
16 जुलाई को शहर के कल्यान नगर में एक कोरोना पॉजिटिव निकला था। स्वास्थ्य विभाग ने उसे तलाश करने की जरूरत नहीं समझी। उसके पते पर पुलिस पहुंची थी। विभाग के पास उसका मोबाइल नंबर भी था। इसके बावजूद उसे अस्पताल पहुंचने में दिलचस्पी नहीं दिखाई गई। ये पॉजिटिव तीसरे दिन शाम को स्वयं कोविड-19 हॉस्पिटल पहुंचा था। जबकि मोहल्ले में इसको लेकर काफी चर्चा रही।
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केस -3
26 जुलाई को उसावां कस्बे के वार्ड नंबर नौ में एक सात वर्षीय बालिका कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी। पुलिस-प्रशासन और नगर पंचायत प्रशासन ने कस्बे को सील कराने की तैयारी शुरू कर दी थी लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने बालिका को अस्पताल पहुंचाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। आखिर बालिका को 27 जुलाई की शाम कोविड-19 अस्पताल भेजा गया। स्वास्थ्य विभाग की ये लापरवाही अन्य लोगों पर भारी पड़ सकती है।
केस -4
27 जुलाई की रात इस्लामनगर ब्लॉक क्षेत्र में एक नहीं तीन कोरोना पॉजिटिव निकले थे। स्वास्थ्य विभाग देर रात तक ये पता नहीं कर पाया कि आखिर ये पॉजिटिव कौन से इलाके रहने वाले हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी से लेकर सीएमओ तक उनके नाम पते से अनभिज्ञ रहे। देर रात तक संक्रमितों की खोजबीन की बात कही जाती रही। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने डीएम को भी उनका स्थान नहीं बताया।
-जैसे-जैसे ऊपर से गाइड लाइन आती है, वैसे ही हम काम करते हैं। अब जांच तीन तरह से हो रही है। कंफर्म जांच बरेली से हो रही है। बाकी ट्रूनेट से कराएंगे तो भी दो दिन तक इंतजार करना पड़ता है। रैपिड एंटीजन टेस्ट किट से भी स्पष्ट नहीं होता है। जब कंफर्म होता है तब हम संक्रमित कोविड-19 अस्पताल भेज देते हैं।
डॉ. सुशील कुमार, सर्विलांस अधिकारी