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Budaun News: नौ साल बाद भी मेडिकल कॉलेज का निर्माण अधूरा, फंस सकती है मान्यता
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राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं।
बदायूं। मेडिकल कॉलेज के दो ब्लॉकों का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में कॉलेज की मान्यता रद्द होने की आशंका जताई जाने लगी है। जानकारों का कहना है कि अगर मान्यता नहीं मिली तो एमबीबीएस के 500 छात्रों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा। कोशिशों के बाद भी अधूरा निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया जा सका है।
जिले को राजकीय मेडिकल कॉलेज की सौगात वर्ष 2012 में सपा शासनकाल में मिली थी। बरेली-मथुरा हाईवे पर गांव गिनौरा वाजिदपुर के पास जमीन मिलने पर 2015 में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू हुआ। शासन ने निर्माण का जिम्मा उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को सौंपा। इसके लिए 646 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। वर्ष 2017 तक मेडिकल कॉलेज का लगभग आधा काम ही पूरा हो सका, लेकिन मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू कर दिया गया।
तब मेडिकल कॉलेज को मान्यता इस शर्त पर दी गई थी कि एक साल के अंदर बाकी निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। हर साल मान्यता का नवीनीकरण निर्माण कार्य जल्द पूरा होने का वादा कर कराया जाता रहा है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका। स्थायी मान्यता के लिए यह अंतिम वर्ष है। दिसंबर 2024 तक मान्यता ली जानी है। अब अगर छह महीने में निर्माण कार्य पूरा न हुआ तो मान्यता रद्द हो सकती है। ऐसा हुआ तो यहां एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
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निर्माण कार्य पूरा न होने से चारों ओर अव्यवस्था
राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य अधर में फंसा होने से परिसर में हर तरफ अव्यवस्था है। जहां-तहां निर्माण सामग्री के ढेर लगे हैं। गंदगी भी बढ़ रही है। कॉलेज के प्राचार्य अपने स्तर से परिसर में सफाई कराते हैं, बावजूद इसके धूल के गुबार उड़ते रहने से सफाई व्यवस्था चौपट है। निर्माणाधीन बिल्डिंग में गंदगी से छात्र-छात्राओं समेत स्टाफ को भी परेशानी हो रही है।
ये कार्य हैं बाकी
- राजकीय मेडिकल कॉलेज में दो लेक्चर रूम, मल्टी परपज हॉल और फाल्स सीलिंग।
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एसटीपी का कार्य अधूरा होने से सभी शौचालय बंद हैं। गंदगी फैली हुई है।
- 12 लिफ्ट में एक संचालित बाकी, 11 लिफ्ट लगी ही नहीं। टावर चार और पांच अधूरे पड़े हैं।
- नर्सिंग छात्रावास में केवल आंशिक रूम उपलब्ध हैं। इंटर्न हॉस्टल का कार्य अपूर्ण है।
शासन से मांगी निर्माण की अनुमति
उत्तर प्रदेश निर्माण निगम के परियोजना अधिकारी दरबान सिंह राणा का कहना है कि ठेकेदार से विवाद के बाद काम रुक गया था। अब लागत बढ़ गई है। पुरानी लागत में जितना काम हो सकता है, उतने के साथ ही प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए शासन से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
शासन में निर्माण की अनुमति के लिए पत्राचार किया गया है। चुनाव बीच में आ गए, इसलिए अब तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। चुनाव के बाद अनुमति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। - डॉ. एनसी प्रजापति, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
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जिले को राजकीय मेडिकल कॉलेज की सौगात वर्ष 2012 में सपा शासनकाल में मिली थी। बरेली-मथुरा हाईवे पर गांव गिनौरा वाजिदपुर के पास जमीन मिलने पर 2015 में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू हुआ। शासन ने निर्माण का जिम्मा उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को सौंपा। इसके लिए 646 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। वर्ष 2017 तक मेडिकल कॉलेज का लगभग आधा काम ही पूरा हो सका, लेकिन मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू कर दिया गया।
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तब मेडिकल कॉलेज को मान्यता इस शर्त पर दी गई थी कि एक साल के अंदर बाकी निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। हर साल मान्यता का नवीनीकरण निर्माण कार्य जल्द पूरा होने का वादा कर कराया जाता रहा है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका। स्थायी मान्यता के लिए यह अंतिम वर्ष है। दिसंबर 2024 तक मान्यता ली जानी है। अब अगर छह महीने में निर्माण कार्य पूरा न हुआ तो मान्यता रद्द हो सकती है। ऐसा हुआ तो यहां एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
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निर्माण कार्य पूरा न होने से चारों ओर अव्यवस्था
राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य अधर में फंसा होने से परिसर में हर तरफ अव्यवस्था है। जहां-तहां निर्माण सामग्री के ढेर लगे हैं। गंदगी भी बढ़ रही है। कॉलेज के प्राचार्य अपने स्तर से परिसर में सफाई कराते हैं, बावजूद इसके धूल के गुबार उड़ते रहने से सफाई व्यवस्था चौपट है। निर्माणाधीन बिल्डिंग में गंदगी से छात्र-छात्राओं समेत स्टाफ को भी परेशानी हो रही है।
ये कार्य हैं बाकी
- राजकीय मेडिकल कॉलेज में दो लेक्चर रूम, मल्टी परपज हॉल और फाल्स सीलिंग।
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एसटीपी का कार्य अधूरा होने से सभी शौचालय बंद हैं। गंदगी फैली हुई है।
- 12 लिफ्ट में एक संचालित बाकी, 11 लिफ्ट लगी ही नहीं। टावर चार और पांच अधूरे पड़े हैं।
- नर्सिंग छात्रावास में केवल आंशिक रूम उपलब्ध हैं। इंटर्न हॉस्टल का कार्य अपूर्ण है।
शासन से मांगी निर्माण की अनुमति
उत्तर प्रदेश निर्माण निगम के परियोजना अधिकारी दरबान सिंह राणा का कहना है कि ठेकेदार से विवाद के बाद काम रुक गया था। अब लागत बढ़ गई है। पुरानी लागत में जितना काम हो सकता है, उतने के साथ ही प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए शासन से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
शासन में निर्माण की अनुमति के लिए पत्राचार किया गया है। चुनाव बीच में आ गए, इसलिए अब तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। चुनाव के बाद अनुमति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। - डॉ. एनसी प्रजापति, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज

राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं।