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दो कंपनी की जमानत राशि जब्त
बदायूं।
Updated Tue, 20 Jan 2015 10:41 PM IST
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पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर बन रहे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के चालू होने में रोड़ा बनी कंपनी एटूजेड और अकार्डों हाइड्रोएअर की जमानत राशि जब्त कर ली गई है। दोनों कंपनियों के बीच चल रहे विवाद के कारण छह महीने से प्लांट का काम ठप है। दोनों कंपनियों के बीच समझौता कराने की कोशिशें तो की ही जा रही हैं। अगर समझौता नहीं हुआ तो इनकी जब्त सिक्योरिटी से काम पूरा कराया जाएगा। दोनों कंपनियों को आपसी विवाद निपटाने के लिए मार्च तक का समय दिया गया है।
नगर पंचायत गुलड़िया के पास ग्राम पंचायत उतरना के गांव सहपुरा में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए नवंबर 2011 में काम शुरू हुआ था। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत प्लांट लगाने का काम कंट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज को काम सौंपा गया। दिसंबर 2012 तक यह काम पूरा होना था, लेकिन राह में बजट की कमी रोड़ा बन गई। कई महीने काम बंद रहा। बाद में शासन ने 5.78 करोड़ रुपये अगस्त में 2.87 और नवंबर 2013 में 2.91 करोड़ रुपये दो किस्तों में भुगतान कर दी। इस दौरान काम जल्द पूरा कराने के लिए एटूजेड ने अकार्डों हाइड्रोएअर से करार किया। काम चालू हुआ और कुछ दिन बाद दोनों कंपनियों के बीच विवाद हो गया। इस दौरान छह करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी का मामला भी सामने आ गया। इसके बाद से काम लटका हुआ है। कार्यदायी संस्था सीएंडडीसी ने अब दोनों कंपनियों की जमानत जब्त कर ली है। चूंकि प्लांट लगाने का काम एटूजेड को दिया गया था। इस लिए सीएंडडीसी ने एटूजेड को नोटिस जारी कर दोनों कंपनियों की जमानत जब्त कर ली है। इसी जमानत राशि से अब प्लांट का काम पूरा कराया जाएगा।
एटूजेड और अकार्डों हाइड्रोएअर के बीच चल रहे विवाद में समझौते की प्रक्रिया चल रही है। काम करीब छह महीने से बंद है। अगर दोनों कंपनियां समझौते के बाद काम चालू नहीं करातीं हैं तो इनकी जब्त जमानत राशि से काम पूरा कराया जाएगा।
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-आरएन पांडेय, वरिष्ठ स्थानिक अभियंता, सीएंडडीसी
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नगर पंचायत गुलड़िया के पास ग्राम पंचायत उतरना के गांव सहपुरा में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए नवंबर 2011 में काम शुरू हुआ था। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत प्लांट लगाने का काम कंट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज को काम सौंपा गया। दिसंबर 2012 तक यह काम पूरा होना था, लेकिन राह में बजट की कमी रोड़ा बन गई। कई महीने काम बंद रहा। बाद में शासन ने 5.78 करोड़ रुपये अगस्त में 2.87 और नवंबर 2013 में 2.91 करोड़ रुपये दो किस्तों में भुगतान कर दी। इस दौरान काम जल्द पूरा कराने के लिए एटूजेड ने अकार्डों हाइड्रोएअर से करार किया। काम चालू हुआ और कुछ दिन बाद दोनों कंपनियों के बीच विवाद हो गया। इस दौरान छह करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी का मामला भी सामने आ गया। इसके बाद से काम लटका हुआ है। कार्यदायी संस्था सीएंडडीसी ने अब दोनों कंपनियों की जमानत जब्त कर ली है। चूंकि प्लांट लगाने का काम एटूजेड को दिया गया था। इस लिए सीएंडडीसी ने एटूजेड को नोटिस जारी कर दोनों कंपनियों की जमानत जब्त कर ली है। इसी जमानत राशि से अब प्लांट का काम पूरा कराया जाएगा।
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एटूजेड और अकार्डों हाइड्रोएअर के बीच चल रहे विवाद में समझौते की प्रक्रिया चल रही है। काम करीब छह महीने से बंद है। अगर दोनों कंपनियां समझौते के बाद काम चालू नहीं करातीं हैं तो इनकी जब्त जमानत राशि से काम पूरा कराया जाएगा।
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-आरएन पांडेय, वरिष्ठ स्थानिक अभियंता, सीएंडडीसी