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सड़क तुम अब आईं... कई लोग तो गांव छोड़ गए
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किशुपुरा में स्कूल के पास जलभराव। संवाद
- फोटो : BADAUN
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कादरचौक (बदायूं)। अपना देश बदल रहा है। देर से ही सही विकास की डगर दूरदराज के उन गांवों तक पहुंच रही है जो आजादी के बाद से आज तक उपेक्षा के शिकार हैं। इलाके का गांव किशूपुरा इनमें से एक है। ब्लॉक मुख्यालय से महज पांच किमी दूर स्थित इस गांव में पहली बार सड़क स्वीकृत हुई है। हालांकि चार महीने पहले निर्माण सामग्री डालकर ठेकेदार लापता है। खुशी के माहौल में ग्रामीणों का छोटा सा दर्द ये भी है कि स्कूल से पचास मीटर पहले तक ही सड़क निर्माण किया जा रहा है, जिसे स्कूल तक करके दलदल की दिक्कत को दूर किया जा सकता है।
कादरचौक ब्लॉक मुख्यालय के नजदीक का गांव किशूपुरा आजादी के बाद से सड़क मार्ग से वंचित था। गांव तक जाने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं था। रेत की पगडंडियों पर कीचड़ से होकर ही लोग गांव तक पहुंच सकते थे। ऐसे में यहां एंबुलेंस से लेकर पुलिस की गाड़ी तक नहीं पहुंच पाती थी। आलम ये था कि किसी की बरात में लग्जरी गाड़ियां भी कैथोला गांव तक ही जाती थीं और वहां से लोगों को ट्रैक्टर या पैदल ही जाना पड़ता था। गांव वाले हर चुनाव से पहले सड़क बनवाने की मांग करते और नेता आश्वासन देकर चले जाते थे। जीतने के बाद किसी ने भी गांव की ओर मुड़कर देखने की जहमत नहीं उठाई।
लंबे समय तक परेशानी और संघर्ष के बाद मायूस हुए कुछ संपन्न परिवारों ने गांव छोड़ने का फैसला कर लिया। लोगों ने बदायूं या उझानी में जमीन लेकर मकान बना लिए और केवल खेतीबाड़ी देखने के लायक ही गांव से जुड़ाव रखा। ऐसा भी नहीं कि गांव छोटा हो। गांव की लगभग दो हजार की आबादी है। गांव में बेसिक स्कूल भी है। स्कूल के सामने ही सड़क टूटी है जिसमें हर वक्त दलदल बना रहता है। योगी सरकार के पहले कार्यकाल के अंतिम दौर में गांव की सड़क प्रस्तावित की गई। इसके लिए टेंडर हुए और ठेकेदार भी तय कर दिए गए। सड़क निर्माण संबंधी सामग्री आ गई और सड़क पर मिट्टी समतल करके छोड़ दी गई। करीब चार महीने गुजर गए पर निर्माण शुरू नहीं हुआ। हालांकि निर्माण होना तय है पर ग्रामीणों की समस्या यह भी है कि ठेकेदार ने स्कूल से पचास मीटर पहले तक ही सड़क बनाने के लिए पत्थर डलवाया है। इसकी बजाय सड़क खेतों की ओर बढ़ा दी है। लोग चाहते हैं कि निर्माण जल्दी शुरू हो और सड़क स्कूल तक बने ताकि दलदल की समस्या से बच्चों के साथ ग्रामीणों व शिक्षकों को भी छुटकारा मिल जाए।
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इसके विपरीत सड़क निर्माण के प्रारंभिक काम से ही ग्रामीण बेहद खुश हैं। वह कहते हैं कि इससे लोगों का गांव से पलायन रुकेगा और ब्लॉक मुख्यालय से सड़क का सीधा संपर्क होने से बच्चों की पढ़ाई भी सही से होने लगेगी।
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ग्रामीणों ने कहा खुश हैं कि हमारी भी सुध आई
गांव में जाने का रास्ता नहीं था। बच्चों की पढ़ाई अवरुद्ध हो रही थी। आने-जाने की समस्या थी। रिश्तेदार भी आने से कतराते थे। शाम होते ही पगडंडी के रास्ते पर डर लगता था। इसीलिए शहर में बस गए।
- ओमकार
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हमारी खेतीबाडी गांव में ही है। बच्चों के भविष्य को लेकर शहर में मकान बना लिया। गांव में सड़क न होने से बच्चे कादरचौक तक पढ़ने नहीं जा पाते थे। आजादी के बाद गांव में सड़क आई है। इसलिए खुशी है। गांव में विकास होगा और पिछड़ापन भी दूर होगा।
- वेदपाल
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हमारी गांव में ही खेती है। इसे छोड़कर कहां जाते। संपन्न लोगों ने तो शहर में मकान बनवा लिए लेकिन किसानों को तो यहीं रहना है। सड़क न होने से गांव में कोई अधिकारी तक नही पहुंचता था। कोई बीमार हो तो एंबुलेंस तक गांव नहीं आ पाती थी। अब सड़क आने से गांव का विकास होगा।
- भगवानदास
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बचपन में रेत की पगडंडी के रास्ते होकर कादरचौक तक जाते थे। यह काफी जोखिम भरा काम था। रेत में साइकिल चलाना भी मुश्किल होता था। इसीलिए मेरी तो आगे की पढ़ाई भी पूरी नहीं हो सकी। अब सड़क बनने से मुझे उम्मीद है कि गांव की नई पीढ़ी अच्छी तरह पढ़ सकेगी।
- सुभाष
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गांव के विकास के लिए अंदर की गलियां तो हमने सही कराने का प्रयास किया लेकिन सड़क निर्माण लायक बजट ग्राम पंचायत स्तर से होना संभव नहीं था। सड़क निर्माण होना अच्छी पहल है। अब गांव में खुशहाली आएगी।
- सुधा शर्मा, ग्राम प्रधान
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करीब दस साल से हम गांव में सड़क लाने के लिए प्रयास कर रहे थे। भाजपा शासन में सड़क मिलने पर खुशी है। हमारे प्रयास सफल हुए।
- मनोज शर्मा, पूर्व प्रधान
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मैंने आठ दिन पहले ही कार्यभार ग्रहण किया है। गांव में सड़क निर्माण विकास का सूचक है। निर्माण में किस तरह की अड़चन आ रही है, इस बारे में जानकारी कराएंगे। प्रयास करेंगे कि स्कूल के सामने तक सड़क बन सके।
- अमर सिंह, खंड विकास अधिकारी, कादरचौक
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कादरचौक ब्लॉक मुख्यालय के नजदीक का गांव किशूपुरा आजादी के बाद से सड़क मार्ग से वंचित था। गांव तक जाने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं था। रेत की पगडंडियों पर कीचड़ से होकर ही लोग गांव तक पहुंच सकते थे। ऐसे में यहां एंबुलेंस से लेकर पुलिस की गाड़ी तक नहीं पहुंच पाती थी। आलम ये था कि किसी की बरात में लग्जरी गाड़ियां भी कैथोला गांव तक ही जाती थीं और वहां से लोगों को ट्रैक्टर या पैदल ही जाना पड़ता था। गांव वाले हर चुनाव से पहले सड़क बनवाने की मांग करते और नेता आश्वासन देकर चले जाते थे। जीतने के बाद किसी ने भी गांव की ओर मुड़कर देखने की जहमत नहीं उठाई।
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लंबे समय तक परेशानी और संघर्ष के बाद मायूस हुए कुछ संपन्न परिवारों ने गांव छोड़ने का फैसला कर लिया। लोगों ने बदायूं या उझानी में जमीन लेकर मकान बना लिए और केवल खेतीबाड़ी देखने के लायक ही गांव से जुड़ाव रखा। ऐसा भी नहीं कि गांव छोटा हो। गांव की लगभग दो हजार की आबादी है। गांव में बेसिक स्कूल भी है। स्कूल के सामने ही सड़क टूटी है जिसमें हर वक्त दलदल बना रहता है। योगी सरकार के पहले कार्यकाल के अंतिम दौर में गांव की सड़क प्रस्तावित की गई। इसके लिए टेंडर हुए और ठेकेदार भी तय कर दिए गए। सड़क निर्माण संबंधी सामग्री आ गई और सड़क पर मिट्टी समतल करके छोड़ दी गई। करीब चार महीने गुजर गए पर निर्माण शुरू नहीं हुआ। हालांकि निर्माण होना तय है पर ग्रामीणों की समस्या यह भी है कि ठेकेदार ने स्कूल से पचास मीटर पहले तक ही सड़क बनाने के लिए पत्थर डलवाया है। इसकी बजाय सड़क खेतों की ओर बढ़ा दी है। लोग चाहते हैं कि निर्माण जल्दी शुरू हो और सड़क स्कूल तक बने ताकि दलदल की समस्या से बच्चों के साथ ग्रामीणों व शिक्षकों को भी छुटकारा मिल जाए।
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इसके विपरीत सड़क निर्माण के प्रारंभिक काम से ही ग्रामीण बेहद खुश हैं। वह कहते हैं कि इससे लोगों का गांव से पलायन रुकेगा और ब्लॉक मुख्यालय से सड़क का सीधा संपर्क होने से बच्चों की पढ़ाई भी सही से होने लगेगी।
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ग्रामीणों ने कहा खुश हैं कि हमारी भी सुध आई
गांव में जाने का रास्ता नहीं था। बच्चों की पढ़ाई अवरुद्ध हो रही थी। आने-जाने की समस्या थी। रिश्तेदार भी आने से कतराते थे। शाम होते ही पगडंडी के रास्ते पर डर लगता था। इसीलिए शहर में बस गए।
- ओमकार
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हमारी खेतीबाडी गांव में ही है। बच्चों के भविष्य को लेकर शहर में मकान बना लिया। गांव में सड़क न होने से बच्चे कादरचौक तक पढ़ने नहीं जा पाते थे। आजादी के बाद गांव में सड़क आई है। इसलिए खुशी है। गांव में विकास होगा और पिछड़ापन भी दूर होगा।
- वेदपाल
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हमारी गांव में ही खेती है। इसे छोड़कर कहां जाते। संपन्न लोगों ने तो शहर में मकान बनवा लिए लेकिन किसानों को तो यहीं रहना है। सड़क न होने से गांव में कोई अधिकारी तक नही पहुंचता था। कोई बीमार हो तो एंबुलेंस तक गांव नहीं आ पाती थी। अब सड़क आने से गांव का विकास होगा।
- भगवानदास
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बचपन में रेत की पगडंडी के रास्ते होकर कादरचौक तक जाते थे। यह काफी जोखिम भरा काम था। रेत में साइकिल चलाना भी मुश्किल होता था। इसीलिए मेरी तो आगे की पढ़ाई भी पूरी नहीं हो सकी। अब सड़क बनने से मुझे उम्मीद है कि गांव की नई पीढ़ी अच्छी तरह पढ़ सकेगी।
- सुभाष
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गांव के विकास के लिए अंदर की गलियां तो हमने सही कराने का प्रयास किया लेकिन सड़क निर्माण लायक बजट ग्राम पंचायत स्तर से होना संभव नहीं था। सड़क निर्माण होना अच्छी पहल है। अब गांव में खुशहाली आएगी।
- सुधा शर्मा, ग्राम प्रधान
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करीब दस साल से हम गांव में सड़क लाने के लिए प्रयास कर रहे थे। भाजपा शासन में सड़क मिलने पर खुशी है। हमारे प्रयास सफल हुए।
- मनोज शर्मा, पूर्व प्रधान
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मैंने आठ दिन पहले ही कार्यभार ग्रहण किया है। गांव में सड़क निर्माण विकास का सूचक है। निर्माण में किस तरह की अड़चन आ रही है, इस बारे में जानकारी कराएंगे। प्रयास करेंगे कि स्कूल के सामने तक सड़क बन सके।
- अमर सिंह, खंड विकास अधिकारी, कादरचौक