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हवा में घुल रहा जहर..सांसें फूल रहीं पर सिस्टम बेखबर
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बदायूं। स्मॉंग और प्रदूषण के चलते प्रदेश के शहरों की हवा जहरीली हो चली है। दीपावली के दौरान दगी आतिशबाजी से तो यह ज्यादा ही खतरनाक हो गई है। प्रदेश के बड़े शहर जहां इसकी चपेट में आ चुके हैं वहीं अपना जिला भी इससे अछूता नहीं है। शहर और आसपास के इलाके में सुबह-शाम आसमान में कोहरे जैसी धुंध ने लोगों के लिए समस्या पैदा कर दी है। इस स्मॉग का असर इस कदर है कि कई दिनों से धूप खुलकर नहीं खिली है। नवंबर की शुरुआत में कोहरे जैसी धुंध ने हर किसी को बेचैन कर दिया है। अब आने वाले दिनों में कोहरा भी अपना कहर दिखाएगा, ऐसे में यदि स्मॉग ऐसे ही आसमान में बना रहता है तो लोगों को ज्यादा मुश्किलें आएंगी।
अमूमन दीपावली की रात आतिशबाजी के कारण अगले दिन प्रदूषण की मात्रा कुछ बढ़ी रहती थी। बाद में वातावरण सामान्य हो जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। दीपावली के बाद एक-दो दिन तो माहौल हल्का सामान्य रहा, लेकिन इसके बाद से वातावरण ने धुंध की चादर ओढ़ ली। पहले तो लोग इसे कोहरा समझकर चौंक गए, लेकिन जब सांस लेने में परेशानी शुरू हुई तो अहसास हुआ कि ये कोहरा नहीं कुछ और ही है। जानकारों की मानें तो यह स्मॉग (एक प्रकार का वायु प्रदूषण) है जो आने वाले समय में और भी ज्यादा दिक्कत पैदा कर सकता है।
क्या है स्मॉग
दरअसल, स्मॉग वायु प्रदूषण की एक अवस्था है जो स्मोक यानी धुआं और और फॉग यानी कोहरा को मिलकर बनती है। निरंतर बढ़ रहे प्रदूषण के बाद कुछ समय पहले ही यह शब्द प्रचलन में आया। जानकारों के अनुसार धूल, धुआं और कोहरे का मिश्रण ही स्मॉग कहलाता है। धुएं में उपस्थित राख, गंधक व अन्य हानिकारक रासायन जब कोहरे के संपर्क में आते हैं तो स्मॉग का निर्माण होता है। यह स्मॉग इस रूप में वायु प्रदूषण जनित अनेक बीमारियों का कारण बन जाता है।
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प्रदूषण से हृदय और सांस रोगियों को ज्यादा खतरा, बरतें सावधानी
बदायूं। आसमान में छाया स्मॉग लोगों की परेशानी का सबब बन रहा है। इससे सांस, हृदय और दमा रोगियों के लिए ज्यादा खतरा हो सकता है। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों को खासतौर पर सावधानी बरतने की जरूरत है। इस प्रदूषण की चपेट में आए कई मरीज जिला अस्पताल में भर्ती हुए हैं। उन्हें सांस लेने में सबसे ज्यादा दिक्कत महसूस हो रही है।
वैसे तो जिला अस्पताल में हर बीमारियों के मरीज पहुंच रहे हैं और उनका इलाज भी चल रहा है लेकिन इस समय सबसे ज्यादा सांस रोगी पहुंच रहे हैं। अकेले इमरजेंसी वार्ड की बात करें तो यहां करीब 80 प्रतिशत मरीज सांस, दमा, हृदय रोग से पीड़ित भर्ती हैं। बाकी पेइंग और, मेडिकल वार्ड में भी मरीज भर्ती हो रहे हैं। इसके अलावा रोजाना दर्जनों मरीज ऐसे पहुंच रहे हैं, जो डॉक्टर से दवा लेकर चले जाते हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा सांस, दमा और हृदय रोगियों की संख्या बताई जा रहा है।
बताते हैं कि इस तरह की परेशानी चार-पांच दिन से ज्यादा हो रही है, जब से आसमान में धुंध सी छाई हुई है। विशेषज्ञों की माने तो आसमानी धुंध (स्मॉग) में नमी, प्रदूषण और पटाखों से निकला धुआं शामिल हो गया है, जो कि पर्यावरण और लोगों के खतरा साबित हो सकता है। इससे तमाम बीमारियां पैदा हो सकती हैं। वहीं बच्चों और बुजुर्गों को दिल, दमा और सांस के अलावा अन्य बीमारियां हो सकती हैं। चिकित्सक लोगों को सुबह-शाम मास्क लगाकर घर से निकलने की सलाह दे रहे हैं।
क्या कहते हैं चिकित्सक
आसमान में छाई धुंध को ध्रूम कोहरा या स्मॉग कह सकते हैं। इसमें नमी, पॉल्यूशन, पटाखों का धुआं और पराली जलाने से निकला धुआं शामिल है। इससे हृदय रोग हो सकता है। सांस और दमा की शिकायत हो सकती है। आंखों में जलन, धुंधला दिख सकता है। ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। निमोनिया, एलर्जी, खुजली और शरीर पर दाने पड़ सकते हैं। ऐसे में लोग मास्क लगाकर चलें। बच्चे और बुजुर्ग सावधानी रखें। सुबह-शाम घर से निकलने से परहेज करें।
-डॉ. राजेश कुमार वर्मा, चिकित्सक जिला अस्पताल
इस समय जो स्मॉग आसमान में छाया है वह आंखों के लिए बेहद नुकसानदायक है। इससे आंखों में जलन, सूखापन, लालिमा और एलर्जी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में केवल बचाव ही एकमात्र उपाय है। दिन में बाइक पर हेलमेट पहनकर निकलें या फिर अच्छे सन ग्लास का प्रयोग करें। यदि फिर भी आंखों में एलर्जी हो जाती है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। खुद कोई दवा आंखों में न डालें। यदि आंख को धोना पड़े तो साफ पानी से ही धोएं
-डॉ. रितुज चंद्रा, नेत्र रोग विशेषज्ञ
बुजुर्गों और बच्चों का रखें विशेष ध्यान
चूंकि बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है इसलिए उनका ऐसे समय पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। उनको सुबह और शाम के समय न निकलनें दें, साथ ही पौष्टिक आहार दें। मौसम बदल रहा है इसलिए पूरी आस्तीन के हल्के गर्म कपड़े पहनाएं।
धुंध से दिक्कत
जब से आसमान में धुंध छाई है। तब से ज्यादा परेशानी हो रही है। सांस लेने में दिक्कत हो रही है। गांव में तो हर काम करने पड़ते हैं। सुबह शाम की दिक्कत ज्यादा है। दवा ले रहे हैं। देखते हैं कि फायदा होता है या नहीं।
-भीकम, फरीदपुर सानी
हालत ज्यादा बिगड़ी
मुझे सांस की बीमारी तो पहले से है। उसकी दवा भी खा रहा हूं, लेकिन चार-पांच दिन से ज्यादा हालत बिगड़ रही है। जो दवा खा रहा हूं, उससे कोई फायदा नहीं हो रहा है। सुबह शाम ज्यादा दिक्कत हो रही है।
-गुरुप्रसाद, लोची नगला
ये रखें सावधानियां
- यदि मॉर्निंग वॉक करते हैं तो फिलहाल भूल जाएं, ज्यादा जरूरी हो तो सुबह आठ बजे के बाद ही घर से निकलें
- यदि मास्क का उपयोग कर सकते हों, तो जरूर करें।
-सुबह और शाम के समय घर से निकलने से बचें। कोशिश करें कि हल्की धूप निकलने के बाद घर से निकलें
- बच्चों को बाइक पर लेकर न निकलें और उन्हें हल्के गर्म कपड़े पहनाएं
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर रखने के लिए पौष्टिक आहार लें।
- आंखों में जलन होने पर पानी से अच्छी तरह से धोएं।
पराली न जलाएं किसान
जिले में हर वर्ष किसान धान की फसल को ज्यादा अहमियत देते हैं। वहीं अब खेतों में धान की कटाई शुरू हो गई है। ऐसे में धान की निकासी के बाद खेत में पराली भी होगी। पिछले वर्षों में देखने को मिला है कि इस पराली को अधिकतर किसान खेत में जला देते हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है। इतना ही नहीं इससे उठने वाला धुआं स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होता है। साथ ही खेत की उर्वरा शक्ति कम होने के साथ मिट्टी के मित्रकीट भी मर जाते हैं। ऐसे में जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने अलर्ट जारी किया है कि जिले में कोई भी किसान इसे नहीं जलाएगा। अगर ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उठाया नहीं, जलाया जा रहा कूड़ा
शहर में गंदगी से बुरा हाल है। जब कई कई दिनों तक कूड़ा नहीं उठता तो दुर्गंध से परेशान लोग उसमें आग लगाकर जला देते हैं। कई मर्तबा यह भी देखने को मिलता है कि सफाई कर्मचारी खुद ही कूड़े के ढेर में आग लगा देते हैं, जलने के बाद जो कुछ बचता है केवल उसे ही उठाकर बाद में ले जाते हैं, ऐसे मेें कूड़ा जलने पर उससे उठने वाली गैस वातावरण को प्रदूषित कर देती है, जिसकी वजह से लोगों को सांस लेने में दिक्कतों को सामना करना पड़ता है।
सरकार को चाहिए इस पर भी एजेंडा लाए
जिस हिसाब से प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, उसको देखते हुए सरकार को जल्द ही इस पर एजेंडा लाना चाहिए। आज के समय में ये बेहद जरूरी है, क्योंकि जिस तेजी से पेड़ों के कटान हुए हैं और पटाखों आदि के धुआं से जो प्रदूषण हुआ उसे रोकना बेहद जरूरी है। अन्यथा आने वाली पीढ़ी के लिए ये बहुत ही दुखदायी हो जाएगा।
- विजय कुमार गौतम, जीव विज्ञान प्रवक्ता, एसके इंटर कॉलेज
मास्क लगाना केवल बचाव है उपाय नहीं
मास्क लगाना केवल बचाव है, ये इस गंभीर समस्या से निजात का उपाय नहीं है। इस ओर सभी को गंभीर होकर सोचना पड़ेगा। लोगों में अभी जागरूकता की कमी है। उन्हें खुद इस बारे में सोचना होगा। जब डॉक्टर से लेकर अन्य लोग इसको हानिकारक बता रहे हैं, तब भी लोग कुछ भी मानने के लिए तैयार नहीं है।
-आरके वर्मा, जीव विज्ञान प्रवक्ता/ प्रधानाचार्य, जीआईसी
कर्मचारियों को साफ निर्देशित किया है कि वे ये ध्यान रखे कि नियमित रूप से कूड़ा उठता रहे, साथ ही इस बात का खास ख्याल रखा जाए कि कहीं पर भी कूूड़ा नहीं जलना चाहिए।
-दीपमाला गोयल, पालिकाध्यक्ष
जिले में कहीं पर पराली न जलाई जाए। इसको लेकर टास्क फोर्स बनाया जाएगा। इसके लिए सभी एसडीएम को लगाया जाएगा, साथ ही शहर में जो निर्माण कार्य चल रहे हैं, फिलहाल उन्हें प्रतिबंधित किया जाएगा। ईट-भट्टों को भी समय- समय देखा जाएगा। उनके चलने का समय भी निर्धारित किया जाएगा।
-कुमार प्रशांत, डीएम
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अमूमन दीपावली की रात आतिशबाजी के कारण अगले दिन प्रदूषण की मात्रा कुछ बढ़ी रहती थी। बाद में वातावरण सामान्य हो जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। दीपावली के बाद एक-दो दिन तो माहौल हल्का सामान्य रहा, लेकिन इसके बाद से वातावरण ने धुंध की चादर ओढ़ ली। पहले तो लोग इसे कोहरा समझकर चौंक गए, लेकिन जब सांस लेने में परेशानी शुरू हुई तो अहसास हुआ कि ये कोहरा नहीं कुछ और ही है। जानकारों की मानें तो यह स्मॉग (एक प्रकार का वायु प्रदूषण) है जो आने वाले समय में और भी ज्यादा दिक्कत पैदा कर सकता है।
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क्या है स्मॉग
दरअसल, स्मॉग वायु प्रदूषण की एक अवस्था है जो स्मोक यानी धुआं और और फॉग यानी कोहरा को मिलकर बनती है। निरंतर बढ़ रहे प्रदूषण के बाद कुछ समय पहले ही यह शब्द प्रचलन में आया। जानकारों के अनुसार धूल, धुआं और कोहरे का मिश्रण ही स्मॉग कहलाता है। धुएं में उपस्थित राख, गंधक व अन्य हानिकारक रासायन जब कोहरे के संपर्क में आते हैं तो स्मॉग का निर्माण होता है। यह स्मॉग इस रूप में वायु प्रदूषण जनित अनेक बीमारियों का कारण बन जाता है।
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प्रदूषण से हृदय और सांस रोगियों को ज्यादा खतरा, बरतें सावधानी
बदायूं। आसमान में छाया स्मॉग लोगों की परेशानी का सबब बन रहा है। इससे सांस, हृदय और दमा रोगियों के लिए ज्यादा खतरा हो सकता है। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों को खासतौर पर सावधानी बरतने की जरूरत है। इस प्रदूषण की चपेट में आए कई मरीज जिला अस्पताल में भर्ती हुए हैं। उन्हें सांस लेने में सबसे ज्यादा दिक्कत महसूस हो रही है।
वैसे तो जिला अस्पताल में हर बीमारियों के मरीज पहुंच रहे हैं और उनका इलाज भी चल रहा है लेकिन इस समय सबसे ज्यादा सांस रोगी पहुंच रहे हैं। अकेले इमरजेंसी वार्ड की बात करें तो यहां करीब 80 प्रतिशत मरीज सांस, दमा, हृदय रोग से पीड़ित भर्ती हैं। बाकी पेइंग और, मेडिकल वार्ड में भी मरीज भर्ती हो रहे हैं। इसके अलावा रोजाना दर्जनों मरीज ऐसे पहुंच रहे हैं, जो डॉक्टर से दवा लेकर चले जाते हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा सांस, दमा और हृदय रोगियों की संख्या बताई जा रहा है।
बताते हैं कि इस तरह की परेशानी चार-पांच दिन से ज्यादा हो रही है, जब से आसमान में धुंध सी छाई हुई है। विशेषज्ञों की माने तो आसमानी धुंध (स्मॉग) में नमी, प्रदूषण और पटाखों से निकला धुआं शामिल हो गया है, जो कि पर्यावरण और लोगों के खतरा साबित हो सकता है। इससे तमाम बीमारियां पैदा हो सकती हैं। वहीं बच्चों और बुजुर्गों को दिल, दमा और सांस के अलावा अन्य बीमारियां हो सकती हैं। चिकित्सक लोगों को सुबह-शाम मास्क लगाकर घर से निकलने की सलाह दे रहे हैं।
क्या कहते हैं चिकित्सक
आसमान में छाई धुंध को ध्रूम कोहरा या स्मॉग कह सकते हैं। इसमें नमी, पॉल्यूशन, पटाखों का धुआं और पराली जलाने से निकला धुआं शामिल है। इससे हृदय रोग हो सकता है। सांस और दमा की शिकायत हो सकती है। आंखों में जलन, धुंधला दिख सकता है। ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। निमोनिया, एलर्जी, खुजली और शरीर पर दाने पड़ सकते हैं। ऐसे में लोग मास्क लगाकर चलें। बच्चे और बुजुर्ग सावधानी रखें। सुबह-शाम घर से निकलने से परहेज करें।
-डॉ. राजेश कुमार वर्मा, चिकित्सक जिला अस्पताल
इस समय जो स्मॉग आसमान में छाया है वह आंखों के लिए बेहद नुकसानदायक है। इससे आंखों में जलन, सूखापन, लालिमा और एलर्जी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में केवल बचाव ही एकमात्र उपाय है। दिन में बाइक पर हेलमेट पहनकर निकलें या फिर अच्छे सन ग्लास का प्रयोग करें। यदि फिर भी आंखों में एलर्जी हो जाती है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। खुद कोई दवा आंखों में न डालें। यदि आंख को धोना पड़े तो साफ पानी से ही धोएं
-डॉ. रितुज चंद्रा, नेत्र रोग विशेषज्ञ
बुजुर्गों और बच्चों का रखें विशेष ध्यान
चूंकि बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है इसलिए उनका ऐसे समय पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। उनको सुबह और शाम के समय न निकलनें दें, साथ ही पौष्टिक आहार दें। मौसम बदल रहा है इसलिए पूरी आस्तीन के हल्के गर्म कपड़े पहनाएं।
धुंध से दिक्कत
जब से आसमान में धुंध छाई है। तब से ज्यादा परेशानी हो रही है। सांस लेने में दिक्कत हो रही है। गांव में तो हर काम करने पड़ते हैं। सुबह शाम की दिक्कत ज्यादा है। दवा ले रहे हैं। देखते हैं कि फायदा होता है या नहीं।
-भीकम, फरीदपुर सानी
हालत ज्यादा बिगड़ी
मुझे सांस की बीमारी तो पहले से है। उसकी दवा भी खा रहा हूं, लेकिन चार-पांच दिन से ज्यादा हालत बिगड़ रही है। जो दवा खा रहा हूं, उससे कोई फायदा नहीं हो रहा है। सुबह शाम ज्यादा दिक्कत हो रही है।
-गुरुप्रसाद, लोची नगला
ये रखें सावधानियां
- यदि मॉर्निंग वॉक करते हैं तो फिलहाल भूल जाएं, ज्यादा जरूरी हो तो सुबह आठ बजे के बाद ही घर से निकलें
- यदि मास्क का उपयोग कर सकते हों, तो जरूर करें।
-सुबह और शाम के समय घर से निकलने से बचें। कोशिश करें कि हल्की धूप निकलने के बाद घर से निकलें
- बच्चों को बाइक पर लेकर न निकलें और उन्हें हल्के गर्म कपड़े पहनाएं
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर रखने के लिए पौष्टिक आहार लें।
- आंखों में जलन होने पर पानी से अच्छी तरह से धोएं।
पराली न जलाएं किसान
जिले में हर वर्ष किसान धान की फसल को ज्यादा अहमियत देते हैं। वहीं अब खेतों में धान की कटाई शुरू हो गई है। ऐसे में धान की निकासी के बाद खेत में पराली भी होगी। पिछले वर्षों में देखने को मिला है कि इस पराली को अधिकतर किसान खेत में जला देते हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है। इतना ही नहीं इससे उठने वाला धुआं स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होता है। साथ ही खेत की उर्वरा शक्ति कम होने के साथ मिट्टी के मित्रकीट भी मर जाते हैं। ऐसे में जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने अलर्ट जारी किया है कि जिले में कोई भी किसान इसे नहीं जलाएगा। अगर ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उठाया नहीं, जलाया जा रहा कूड़ा
शहर में गंदगी से बुरा हाल है। जब कई कई दिनों तक कूड़ा नहीं उठता तो दुर्गंध से परेशान लोग उसमें आग लगाकर जला देते हैं। कई मर्तबा यह भी देखने को मिलता है कि सफाई कर्मचारी खुद ही कूड़े के ढेर में आग लगा देते हैं, जलने के बाद जो कुछ बचता है केवल उसे ही उठाकर बाद में ले जाते हैं, ऐसे मेें कूड़ा जलने पर उससे उठने वाली गैस वातावरण को प्रदूषित कर देती है, जिसकी वजह से लोगों को सांस लेने में दिक्कतों को सामना करना पड़ता है।
सरकार को चाहिए इस पर भी एजेंडा लाए
जिस हिसाब से प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, उसको देखते हुए सरकार को जल्द ही इस पर एजेंडा लाना चाहिए। आज के समय में ये बेहद जरूरी है, क्योंकि जिस तेजी से पेड़ों के कटान हुए हैं और पटाखों आदि के धुआं से जो प्रदूषण हुआ उसे रोकना बेहद जरूरी है। अन्यथा आने वाली पीढ़ी के लिए ये बहुत ही दुखदायी हो जाएगा।
- विजय कुमार गौतम, जीव विज्ञान प्रवक्ता, एसके इंटर कॉलेज
मास्क लगाना केवल बचाव है उपाय नहीं
मास्क लगाना केवल बचाव है, ये इस गंभीर समस्या से निजात का उपाय नहीं है। इस ओर सभी को गंभीर होकर सोचना पड़ेगा। लोगों में अभी जागरूकता की कमी है। उन्हें खुद इस बारे में सोचना होगा। जब डॉक्टर से लेकर अन्य लोग इसको हानिकारक बता रहे हैं, तब भी लोग कुछ भी मानने के लिए तैयार नहीं है।
-आरके वर्मा, जीव विज्ञान प्रवक्ता/ प्रधानाचार्य, जीआईसी
कर्मचारियों को साफ निर्देशित किया है कि वे ये ध्यान रखे कि नियमित रूप से कूड़ा उठता रहे, साथ ही इस बात का खास ख्याल रखा जाए कि कहीं पर भी कूूड़ा नहीं जलना चाहिए।
-दीपमाला गोयल, पालिकाध्यक्ष
जिले में कहीं पर पराली न जलाई जाए। इसको लेकर टास्क फोर्स बनाया जाएगा। इसके लिए सभी एसडीएम को लगाया जाएगा, साथ ही शहर में जो निर्माण कार्य चल रहे हैं, फिलहाल उन्हें प्रतिबंधित किया जाएगा। ईट-भट्टों को भी समय- समय देखा जाएगा। उनके चलने का समय भी निर्धारित किया जाएगा।
-कुमार प्रशांत, डीएम