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सोत सूखी तो किसानों का तीन गुना बढ़ गया डीजल खर्च
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उसहैत (बदायूं)। सोत के लगभग सूख जाने से सिंचाई के लिए किसान परेशान हैं। उनका कहना है कि नदी के रहते आसपास वाटर लेवल पांच-छह फुट था जो अब 40-45 फुट पहुंच गया है। पहले एक लीटर डीजल में एक बीघा फसल की सिंचाई कर लेते थे अब एक बीघा जमीन की सिंचाई के लिए तीन लीटर डीजल लगता है।
बुजुर्ग ग्रामीण बताते हैं कि पहले पूरे गांव की जमीन की सिंचाई नदी के पानी से होती थी। लोग नदी में पाइप डालकर पंपिंग सेट लगाकर खेतों की सिंचाई करते थे, लेकिन अब यह एक सपना सरीखा हो गया है। लोगों का कहना है कि अमर उजाला की सोत नदी को पुनर्जीवित करने को चलाई जा रही मुहिम से यदि सरकार जाग उठी तो नदी किनारे के गांवों की फिर कायाकल्प हो जाएगा। उन्होंने बताया कि लोग पालतू पशुओं को तो पानी पिलाने और नहलाने का इंतजाम कर लेते हैं, लेकिन जंगली जानवरों का तो बुरा हाल है। हालांकि अधिकतर जंगली जानवर अब दूर चले गए हैं और अब क्षेत्र में बहुत कम ही दिखते हैं। उसहैत कस्बे में सोत नदी बिल्कुल नजदीक से बहती थी जो कस्बे की शान होती थी। बाहर के आने वाले लोग भी गर्मियों में खूब मजे लेते थे। अब कहीं-कहीं यह नाले का रूप ले चुकी है तो कहीं बिल्कुल लापता हो चुकी है।
जाने किसकी नजर लग गई हमारी सोत नदी को
कई साल पहले तक नदी में पानी रहता था तब नदी किनारे के ग्रामों का वाटर लेवल पांच-छह फुट रहता था परंतु अब 40-45 फुट पहुंच गया है। किसानों के लिए फसल की सिंचाई बहुत महंगी हो गई है। पहले से तीन गुना अधिक डीजल खर्च होता है।
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-किशनसेवक , ग्राम प्रधान शाहपुर
सोत नदी में पानी नहीं रहने से सबसे अधिक परेशानी किसानों के सामने आ गई है। उनके लिए सिंचाई को नदी का पानी बहुत आसान साधन हुआ करता था वहीं अब सिंचाई को इस इलाके में सरकार ने कोई व्यवस्था नहीं की है।
-रामपाल सिंह, सेवानिवृत्त शिक्षक
कभी सोत नदी में इतना पानी हुआ करता था कि उसहैत जाने के लिए सोचना पड़ता था क्योंकि जाने के लिए नाव का सहारा लेना होता था। अब आने जाने में परेशानी तो नहीं होती, परंतु नदी की हालत देखकर बहुत अखरता है कि आखिर हमारी नदी को किसकी नजर लग गई है।
-कृष्ण पाल सिंह, सरेली
सोत नदी में पानी क्या समाप्त हुआ, उसहैत के इलाके से जंगली जानवर भी गायब हो गए। दु:खद यह है कि किसी भी सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। अमर उजाला की सोत नदी को पुनर्जीवित करने की मुहिम तारीफ के काबिल है।
-नरेश चन्द्र , खेड़ाजलालपुर
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बुजुर्ग ग्रामीण बताते हैं कि पहले पूरे गांव की जमीन की सिंचाई नदी के पानी से होती थी। लोग नदी में पाइप डालकर पंपिंग सेट लगाकर खेतों की सिंचाई करते थे, लेकिन अब यह एक सपना सरीखा हो गया है। लोगों का कहना है कि अमर उजाला की सोत नदी को पुनर्जीवित करने को चलाई जा रही मुहिम से यदि सरकार जाग उठी तो नदी किनारे के गांवों की फिर कायाकल्प हो जाएगा। उन्होंने बताया कि लोग पालतू पशुओं को तो पानी पिलाने और नहलाने का इंतजाम कर लेते हैं, लेकिन जंगली जानवरों का तो बुरा हाल है। हालांकि अधिकतर जंगली जानवर अब दूर चले गए हैं और अब क्षेत्र में बहुत कम ही दिखते हैं। उसहैत कस्बे में सोत नदी बिल्कुल नजदीक से बहती थी जो कस्बे की शान होती थी। बाहर के आने वाले लोग भी गर्मियों में खूब मजे लेते थे। अब कहीं-कहीं यह नाले का रूप ले चुकी है तो कहीं बिल्कुल लापता हो चुकी है।
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जाने किसकी नजर लग गई हमारी सोत नदी को
कई साल पहले तक नदी में पानी रहता था तब नदी किनारे के ग्रामों का वाटर लेवल पांच-छह फुट रहता था परंतु अब 40-45 फुट पहुंच गया है। किसानों के लिए फसल की सिंचाई बहुत महंगी हो गई है। पहले से तीन गुना अधिक डीजल खर्च होता है।
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-किशनसेवक , ग्राम प्रधान शाहपुर
सोत नदी में पानी नहीं रहने से सबसे अधिक परेशानी किसानों के सामने आ गई है। उनके लिए सिंचाई को नदी का पानी बहुत आसान साधन हुआ करता था वहीं अब सिंचाई को इस इलाके में सरकार ने कोई व्यवस्था नहीं की है।
-रामपाल सिंह, सेवानिवृत्त शिक्षक
कभी सोत नदी में इतना पानी हुआ करता था कि उसहैत जाने के लिए सोचना पड़ता था क्योंकि जाने के लिए नाव का सहारा लेना होता था। अब आने जाने में परेशानी तो नहीं होती, परंतु नदी की हालत देखकर बहुत अखरता है कि आखिर हमारी नदी को किसकी नजर लग गई है।
-कृष्ण पाल सिंह, सरेली
सोत नदी में पानी क्या समाप्त हुआ, उसहैत के इलाके से जंगली जानवर भी गायब हो गए। दु:खद यह है कि किसी भी सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। अमर उजाला की सोत नदी को पुनर्जीवित करने की मुहिम तारीफ के काबिल है।
-नरेश चन्द्र , खेड़ाजलालपुर