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सीवर लाइन पड़े तब सुधरे शहर की सूरत, कीचड़ जल भराव से मिले छुटकारा
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बदायूं। एक दशक से शहर की दशा लगातार बिगड़ती जा रही है। मामूली बारिश में ही शहर के तमाम इलाके जलमग्न हो जा रहे हैं। कई स्थानों पर तो दो से तीन फीट तक जलभराव हो रहा है। शहर के लोग लंबे समय से सीवर लाइन की मांग कर रहे हैं। नगर विकास राज्यमंत्री महेश गुप्ता के भी मंत्री मंडल में चार साल पूरे हो गए हैं, लेकिन अब तक शहर को सीवर लाइन नहीं मिल सकी है। इससे लोगों में मायूसी है।
नगर पालिका के रिकॉर्ड की बात करें तो नगर में 10 बड़ेे और 70 छोटे नाले हैं। ज्यादातर बड़े नाले चोक हैं। छोटे नालों की दशा भी किसी से छिपी नहीं है। एक दशक में शहर काफी विस्तार ले चुका है। कई बड़ी और पॉश कॉलोनियां तो अब तक नगर पालिका में भी शामिल नहीं हो सकी हैं। शहर के आबादी वाले इलाकों का पानी चंदोखर और सोत नदी की ओर जाता है। किसी भी स्थान पर पानी निकासी की ठीक व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में सोत नदी भी नाले में तब्दील हो गई है। गौर करने वाली बात यह है कि शहर का एक हिस्सा ऊंचाई पर है और दूसरा हिस्सा नीचा है। ऐसे में निचलते इलाकों सुभाष चौक, छह सड़का, तोताराम मार्केट, टिकटगंज, शहवाजपुर, कल्याण नगर, लोची नगला, नई सराय, नई बस्ती, आदर्श नगर, शिवपुरम, विजय नगर, पटियाली सराय, आर्य समाज, नेकपुर आदि इलाकों में मामूली बारिश में ही जलभराव हो जाता है। इतना ही नहीं नाले और नालियों का गंदा पानी घरों में घुसने से समस्या होती है।
अगर शहर में सीवर लाइन पड़ती है तो जल भराव की यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। हालांकि, पिछली सरकार में सीवर लाइन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। नगर विकास राज्यमंत्री महेश गुप्ता भी करीब चार साल से योगी मंत्रिमंडल का हिस्सा है। इसके बाद भी सीवर लाइन को अब तक मंजूरी न मिलने से लोगों में मायूसी है।
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शहर की आबादी- 1.59 लाख
वार्ड -29
मोहल्ले - 65
कॉलोनी - 20
कमर्शियल भवन - 65
सरकारी भवन - 115
नोट- ग्राम पंचायतों में आने वाली कॉलोनियां शामिल नहीं।
यह बोले लोग
अगर पिछले दो दशक की बात करें तो शहर की आबादी भी दोगुनी हो गई है। चारो दिशाओं में शहर बढ़ा है। सिर्फ सीवर लाइन ही नहीं नगर पालिका क्षेत्र के विस्तार की जरूरत भी है। तमाम शहरी इलाके ग्राम पंचायतों में शामिल होने से भी समस्या होती है। - प्यारे सिंह यादव, रिटायर्ड कर्मचारी
सीवर लाइन शहर की जरूरत है। नगर विकास राज्यमंत्री के कार्यकाल के करीब चार साल पूरे हो चुके हैं। लोगों को उम्मीद थी कि नगर विकास राज्यमंत्री शहर में सीवर लाइन का काम कराएंगे। चुनाव में भी ज्यादा वक्त शेष नहीं बचा है। सीवर लाइन लटकती दिख रही है। - महेश चंद्र शर्मा, वरिष्ठ नागरिक
चुनावों के दौरान सीवर लाइन समेत अन्य कई मुद्दे उठते हैं। चुनाव निपटने के बाद एक बार फिर से यह मुद्दे गर्त में चले जाते हैं। सीवर लाइन शहर की जरूरत है। नगर विकास राज्यमंत्री को चाहिए कि सीवर लाइन के लिए शासन स्तर पर मजबूरी से पैरवी करें। - सचिन वर्मा, व्यापारी
सीवर लाइन की मांग काफी समय से उठ रही है। नाले चोक होने और सीवर लाइन न होने के कारण शहर दुर्दशा का शिकार है। बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा समस्या होती है। सीवर लाइन शहर की जरूरत है। नगर विकास राज्यमंत्री से शहर के लोगों को काफी उम्मीदें हैं। - केबी गुप्ता, टैक्स कंसलटेंट
सीवर लाइन संबंधी लोगों की मांग जल्द पूरी हो जाएगा। इस संबंध में प्रक्रिया चल रही है। सीवर लाइन को लेकर मेरी बात मुख्यमंत्री से भी हुई है। भाजपा सरकार में सबसे ज्यादा विकास हुए हैं। सीवर लाइन की मांग भी भाजपा सरकार में ही पूरी होगी। - महेश गुप्ता, नगर विकास राज्यमंत्री
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नगर पालिका के रिकॉर्ड की बात करें तो नगर में 10 बड़ेे और 70 छोटे नाले हैं। ज्यादातर बड़े नाले चोक हैं। छोटे नालों की दशा भी किसी से छिपी नहीं है। एक दशक में शहर काफी विस्तार ले चुका है। कई बड़ी और पॉश कॉलोनियां तो अब तक नगर पालिका में भी शामिल नहीं हो सकी हैं। शहर के आबादी वाले इलाकों का पानी चंदोखर और सोत नदी की ओर जाता है। किसी भी स्थान पर पानी निकासी की ठीक व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में सोत नदी भी नाले में तब्दील हो गई है। गौर करने वाली बात यह है कि शहर का एक हिस्सा ऊंचाई पर है और दूसरा हिस्सा नीचा है। ऐसे में निचलते इलाकों सुभाष चौक, छह सड़का, तोताराम मार्केट, टिकटगंज, शहवाजपुर, कल्याण नगर, लोची नगला, नई सराय, नई बस्ती, आदर्श नगर, शिवपुरम, विजय नगर, पटियाली सराय, आर्य समाज, नेकपुर आदि इलाकों में मामूली बारिश में ही जलभराव हो जाता है। इतना ही नहीं नाले और नालियों का गंदा पानी घरों में घुसने से समस्या होती है।
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अगर शहर में सीवर लाइन पड़ती है तो जल भराव की यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। हालांकि, पिछली सरकार में सीवर लाइन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। नगर विकास राज्यमंत्री महेश गुप्ता भी करीब चार साल से योगी मंत्रिमंडल का हिस्सा है। इसके बाद भी सीवर लाइन को अब तक मंजूरी न मिलने से लोगों में मायूसी है।
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शहर की आबादी- 1.59 लाख
वार्ड -29
मोहल्ले - 65
कॉलोनी - 20
कमर्शियल भवन - 65
सरकारी भवन - 115
नोट- ग्राम पंचायतों में आने वाली कॉलोनियां शामिल नहीं।
यह बोले लोग
अगर पिछले दो दशक की बात करें तो शहर की आबादी भी दोगुनी हो गई है। चारो दिशाओं में शहर बढ़ा है। सिर्फ सीवर लाइन ही नहीं नगर पालिका क्षेत्र के विस्तार की जरूरत भी है। तमाम शहरी इलाके ग्राम पंचायतों में शामिल होने से भी समस्या होती है। - प्यारे सिंह यादव, रिटायर्ड कर्मचारी
सीवर लाइन शहर की जरूरत है। नगर विकास राज्यमंत्री के कार्यकाल के करीब चार साल पूरे हो चुके हैं। लोगों को उम्मीद थी कि नगर विकास राज्यमंत्री शहर में सीवर लाइन का काम कराएंगे। चुनाव में भी ज्यादा वक्त शेष नहीं बचा है। सीवर लाइन लटकती दिख रही है। - महेश चंद्र शर्मा, वरिष्ठ नागरिक
चुनावों के दौरान सीवर लाइन समेत अन्य कई मुद्दे उठते हैं। चुनाव निपटने के बाद एक बार फिर से यह मुद्दे गर्त में चले जाते हैं। सीवर लाइन शहर की जरूरत है। नगर विकास राज्यमंत्री को चाहिए कि सीवर लाइन के लिए शासन स्तर पर मजबूरी से पैरवी करें। - सचिन वर्मा, व्यापारी
सीवर लाइन की मांग काफी समय से उठ रही है। नाले चोक होने और सीवर लाइन न होने के कारण शहर दुर्दशा का शिकार है। बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा समस्या होती है। सीवर लाइन शहर की जरूरत है। नगर विकास राज्यमंत्री से शहर के लोगों को काफी उम्मीदें हैं। - केबी गुप्ता, टैक्स कंसलटेंट
सीवर लाइन संबंधी लोगों की मांग जल्द पूरी हो जाएगा। इस संबंध में प्रक्रिया चल रही है। सीवर लाइन को लेकर मेरी बात मुख्यमंत्री से भी हुई है। भाजपा सरकार में सबसे ज्यादा विकास हुए हैं। सीवर लाइन की मांग भी भाजपा सरकार में ही पूरी होगी। - महेश गुप्ता, नगर विकास राज्यमंत्री