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Budaun News: पति की हत्यारोपी महिला के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
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बदायूं। इस्लामनगर थाना क्षेत्र के महेश हत्याकांड में पुलिस ने उसकी हत्यारोपी पत्नी के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी। उसकी पत्नी ने हत्या करने के बाद शोर मचा दिया था कि उसके घर में कुछ बदमाश घुस आए। वह उसके पति की हत्या करने के बाद रुपये और जेवर लूटकर ले गए हैं। छानबीन में उसके ही घर से रुपये और जेवर बरामद हो गए थे। बाद में उसकी पत्नी ममता ने भी अपना जुर्म कबूल कर लिया था। इसमें पुलिस ने एक माह बाद आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गांव अल्लैहपुर में 23 मई 2024 की रात 35 वर्षीय महेश की उसके ही घर में सिर कुचलकर हत्या कर दी गई थी। रात करीब दो बजे उसकी पत्नी ममता ने घर से बाहर निकलकर शोर मचाया था कि उसके घर में कुछ बदमाश घुस आए और उसके पति पर हमला कर दिया। वह अपने घर में सो रही थी। उसने बदमाशों को महेश के सिर में लोहे की रॉड मारते हुए देखा था, जिससे वह डर गई थी और उसे 40 हजार नकद व सोने-चांदी के जेवर खुद निकालकर बदमाशों को दे दिए थे।
सुबह जब पुलिस को इसकी जानकारी हुई तो मामले की छानबीन शुरू कर दी गई। शुरुआती दौर से ही ममता के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, जिससे पुलिस का शक लगातार उसके ही ऊपर जा रहा था। इससे लगातार उससे पूछताछ की जा रही थी। उसने कई बार अपने बयान बदले, जिससे पुलिस को यकीन हो गया कि महेश का हत्यारा कोई और नहीं बल्कि ममता है।
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26 मई की सुबह उसे हिरासत में ले लिया गया। उसकी निशानदेही पर घर से जेवर और रुपये बरामद हो गए। ममता ने भी स्वीकार कर लिया था कि उसने ही महेश की हत्या की है। इससे पुलिस ने दूसरे दिन 27 मई को उसे जेल भेज दिया। इसमें पुलिस ने विवेचना पूरी करते हुए ममता के खिलाफ चार्जशीट लगा दी है।
इंस्पेक्टर ने ही कराया था महेश की बेटी का दाखिला
महेश के दो बच्चे हैं। उनमें छह साल का साजन और चार साल की ऋचा है। साजन पहले से स्कूल में पढ़ रहा है। ऋचा का दाखिला नहीं हुआ था। पिता महेश की हत्या और मां ममता के जेल जाने के बाद बच्चों का भविष्य अंधेरे में जाता दिखाई दे रहा था। इससे इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह ने ऋचा का दाखिला कराया और उसको पढ़ाने की जिम्मेदारी ली। आज कई लोग दोनों बच्चों की मदद करने के लिए तैयार हैं।
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इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गांव अल्लैहपुर में 23 मई 2024 की रात 35 वर्षीय महेश की उसके ही घर में सिर कुचलकर हत्या कर दी गई थी। रात करीब दो बजे उसकी पत्नी ममता ने घर से बाहर निकलकर शोर मचाया था कि उसके घर में कुछ बदमाश घुस आए और उसके पति पर हमला कर दिया। वह अपने घर में सो रही थी। उसने बदमाशों को महेश के सिर में लोहे की रॉड मारते हुए देखा था, जिससे वह डर गई थी और उसे 40 हजार नकद व सोने-चांदी के जेवर खुद निकालकर बदमाशों को दे दिए थे।
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सुबह जब पुलिस को इसकी जानकारी हुई तो मामले की छानबीन शुरू कर दी गई। शुरुआती दौर से ही ममता के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, जिससे पुलिस का शक लगातार उसके ही ऊपर जा रहा था। इससे लगातार उससे पूछताछ की जा रही थी। उसने कई बार अपने बयान बदले, जिससे पुलिस को यकीन हो गया कि महेश का हत्यारा कोई और नहीं बल्कि ममता है।
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26 मई की सुबह उसे हिरासत में ले लिया गया। उसकी निशानदेही पर घर से जेवर और रुपये बरामद हो गए। ममता ने भी स्वीकार कर लिया था कि उसने ही महेश की हत्या की है। इससे पुलिस ने दूसरे दिन 27 मई को उसे जेल भेज दिया। इसमें पुलिस ने विवेचना पूरी करते हुए ममता के खिलाफ चार्जशीट लगा दी है।
इंस्पेक्टर ने ही कराया था महेश की बेटी का दाखिला
महेश के दो बच्चे हैं। उनमें छह साल का साजन और चार साल की ऋचा है। साजन पहले से स्कूल में पढ़ रहा है। ऋचा का दाखिला नहीं हुआ था। पिता महेश की हत्या और मां ममता के जेल जाने के बाद बच्चों का भविष्य अंधेरे में जाता दिखाई दे रहा था। इससे इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह ने ऋचा का दाखिला कराया और उसको पढ़ाने की जिम्मेदारी ली। आज कई लोग दोनों बच्चों की मदद करने के लिए तैयार हैं।