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Budaun News: बदलता मौसम गर्भवतियों पर पड़ रहा भारी, खांसी-बुखार के बढ़े मामले
Tue, 02 Jun 2026 01:07 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 02 Jun 2026 01:07 AM IST
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बदायूं। जिले में मौसम के लगातार बदलते मिजाज का असर अब गर्भवती महिलाओं की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। कभी तेज गर्मी तो कभी आंधी-बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण महिलाओं में खांसी, बुखार, गले में संक्रमण और कमजोरी की शिकायतें बढ़ रही हैं। जिला महिला अस्पताल में पहले 30 से 40 गर्भवती महिलाएं आ रही थीं। अब इनकी संख्या बढ़कर 70 के आसपास हो गई है।
जिला महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रुचि गुप्ता का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य लोगों की तुलना में कुछ कम हो जाती है। ऐसे में मौसम में अचानक बदलाव होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इन दिनों अस्पतालों में जांच के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, शरीर दर्द और थकान जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिल रही हैं।
डॉक्टर का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को मौसम के अनुसार विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, पौष्टिक भोजन लेना चाहिए और भीगने या तेज धूप में अधिक देर तक रहने से बचना चाहिए। किसी भी प्रकार का बुखार या संक्रमण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। उनका कहना है कि गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच कराई जा रही है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक परामर्श भी दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने भी आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को गर्भवती महिलाओं की निगरानी रखने और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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जिला महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रुचि गुप्ता का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य लोगों की तुलना में कुछ कम हो जाती है। ऐसे में मौसम में अचानक बदलाव होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इन दिनों अस्पतालों में जांच के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, शरीर दर्द और थकान जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिल रही हैं।
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डॉक्टर का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को मौसम के अनुसार विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, पौष्टिक भोजन लेना चाहिए और भीगने या तेज धूप में अधिक देर तक रहने से बचना चाहिए। किसी भी प्रकार का बुखार या संक्रमण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। उनका कहना है कि गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच कराई जा रही है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक परामर्श भी दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने भी आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को गर्भवती महिलाओं की निगरानी रखने और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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