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Budaun News: बदलते मौसम में बच्चों में निमोनिया, डायरिया का बढ़ता खतरा
Thu, 19 Feb 2026 01:57 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Thu, 19 Feb 2026 01:57 AM IST
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जिला अस्पताल में बच्चे का इलाज करते डॉ. कप्तान सिंह। संवाद
बदायूं। बदलते मौसम में बरती जा रही लापरवाही अब बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। तापमान में उतार-चढ़ाव, खानपान में गड़बड़ी और साफ-सफाई की अनदेखी के चलते जिले में निमोनिया और डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। इसका असर यह है कि जिला अस्पताल में रोजाना ऐसे बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
मौसम परिवर्तन के दौरान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इससे वे जल्दी निमोनिया और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। खुले में बिकने वाला खाद्य पदार्थ, दूषित पानी, हाथों की सही तरीके से सफाई न होना और ठंड-गर्मी से बचाव में लापरवाही बीमारियों का प्रमुख कारण बन रही है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन आठ से दस बच्चों में बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी-दस्त और कमजोरी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। डॉक्टर के अनुसार बच्चों को आवश्यक जांच के बाद दवाएं देकर घर भेज रहे हैं। राहत की बात यह है कि अभी किसी भी बच्चे को भर्ती करने की आवश्यकता नहीं पड़ी है। डॉ. कप्तान सिंह ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को उबला हुआ या शुद्ध पानी ही पिलाएं, बाहर का तला-भुना और खुले में रखा भोजन न दें। इसके साथ ही बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं और हाथ धोने की आदत डालें। सांस संबंधी परेशानी, तेज बुखार या लगातार दस्त की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाने की बात कही।
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मौसम परिवर्तन के दौरान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इससे वे जल्दी निमोनिया और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। खुले में बिकने वाला खाद्य पदार्थ, दूषित पानी, हाथों की सही तरीके से सफाई न होना और ठंड-गर्मी से बचाव में लापरवाही बीमारियों का प्रमुख कारण बन रही है।
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन आठ से दस बच्चों में बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी-दस्त और कमजोरी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। डॉक्टर के अनुसार बच्चों को आवश्यक जांच के बाद दवाएं देकर घर भेज रहे हैं। राहत की बात यह है कि अभी किसी भी बच्चे को भर्ती करने की आवश्यकता नहीं पड़ी है। डॉ. कप्तान सिंह ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को उबला हुआ या शुद्ध पानी ही पिलाएं, बाहर का तला-भुना और खुले में रखा भोजन न दें। इसके साथ ही बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं और हाथ धोने की आदत डालें। सांस संबंधी परेशानी, तेज बुखार या लगातार दस्त की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाने की बात कही।
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