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आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना को लग रहा पलीता
बदायूं
Updated Mon, 22 Feb 2016 08:21 PM IST
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना लक्ष्य पूरा करती नहीं दिख रही है। हर महीने करीब 20 लाख रुपये का बजट खर्च होने के बाद भी परिषदीय स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के नाम पर सिर्फ कागजों का पेट भरा जा रहा है। विद्यालयों में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग भी गंभीर नहीं है। स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम के सहयोग से चल रही इस योजना का भी अन्य योजनाओं की तरह बुरा हाल है।
एनएचएम के तहत परिषदीय स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में छह से 14 साल तक के बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण व्यवस्था है। परिषदीय विद्यालयों में साथ में एक आर और आंगनबाड़ी केंद्रों में साल में दो बाद बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण होना चाहिए। इसके लिए जिले के हर विकास खंड में दो टीमें और एक चार पहिया वाहन मुहैया कराया गया है। प्रत्येक टीम में एक डॉक्टर सहित तीन लोगों का स्टाफ है। 15 ब्लाकों में 30 स्वास्थ्य टीमों के वेतन पर हर महीने करीब 17 लाख और वाहनों पर 3.57 लाख रुपया खर्च हो रहा है। इसके बावजूद योजना लक्ष्य पूरा करती नहीं दिख रही। बच्चों की सेहत सुधारने के लिए जिन टीमों को जिम्मेदारी दी गई है वह कहां हैं। योजना में लगे चार पहिया वाहन लाखों रुपये के डीजल का धुआं जरूर उड़ा रहे हैं, लेकिन यह विद्यालयों तक नहीं पहुंचते।
नहीं बांटे गए स्वास्थ्य कार्ड
बदायूं। आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को स्वास्थ्य कार्ड भी दिए जाने थे। बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी सूचनाएं इसमें अंकित की जानी थीं। स्वास्थ्य कार्ड छपवाने के नाम पर भी बजट को ठिकाने लगाया जा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि जिले के किसी भी विद्यालय या आंगनबाड़ी केंद्र पर स्वास्थ्य कार्ड बांटे ही नहीं गए हैं।
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स्वास्थ्य टीमें स्कूलों तक पहुंच रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी कहा गया है कि वह भी नजर रखें। अगर समय पर टीम न पहुंचे तो इस बारे में जानकारी दें। स्वास्थ्य विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों को भी इस बारे में निर्देशित किया गया है।
-डॉ. अनीता दत्ता, एडी हेल्थ
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एनएचएम के तहत परिषदीय स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में छह से 14 साल तक के बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण व्यवस्था है। परिषदीय विद्यालयों में साथ में एक आर और आंगनबाड़ी केंद्रों में साल में दो बाद बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण होना चाहिए। इसके लिए जिले के हर विकास खंड में दो टीमें और एक चार पहिया वाहन मुहैया कराया गया है। प्रत्येक टीम में एक डॉक्टर सहित तीन लोगों का स्टाफ है। 15 ब्लाकों में 30 स्वास्थ्य टीमों के वेतन पर हर महीने करीब 17 लाख और वाहनों पर 3.57 लाख रुपया खर्च हो रहा है। इसके बावजूद योजना लक्ष्य पूरा करती नहीं दिख रही। बच्चों की सेहत सुधारने के लिए जिन टीमों को जिम्मेदारी दी गई है वह कहां हैं। योजना में लगे चार पहिया वाहन लाखों रुपये के डीजल का धुआं जरूर उड़ा रहे हैं, लेकिन यह विद्यालयों तक नहीं पहुंचते।
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नहीं बांटे गए स्वास्थ्य कार्ड
बदायूं। आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को स्वास्थ्य कार्ड भी दिए जाने थे। बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी सूचनाएं इसमें अंकित की जानी थीं। स्वास्थ्य कार्ड छपवाने के नाम पर भी बजट को ठिकाने लगाया जा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि जिले के किसी भी विद्यालय या आंगनबाड़ी केंद्र पर स्वास्थ्य कार्ड बांटे ही नहीं गए हैं।
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स्वास्थ्य टीमें स्कूलों तक पहुंच रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी कहा गया है कि वह भी नजर रखें। अगर समय पर टीम न पहुंचे तो इस बारे में जानकारी दें। स्वास्थ्य विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों को भी इस बारे में निर्देशित किया गया है।
-डॉ. अनीता दत्ता, एडी हेल्थ