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आगरा जाते समय भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को वार्डर पर रोका

Sat, 27 Feb 2016 07:36 PM IST
उझानी (बदायूं)।
उझानी (बदायूं)। Updated Sat, 27 Feb 2016 07:36 PM IST
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BJP state president stopped at the border on the way to Agra
आगरा में मारे गए विहिप नेता अरुण माहौर के घरवालों से पत्नी के साथ मिलने जा रहे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने बदायूं-कासगंज वार्डर पर कछला पुल के पास रोक लिया। इस दौरान पुलिस और वाजपेयी के बीच नोकझोंक हुई, लेकिन वह अपनी कार से बाहर नहीं निकले। करीब तीन घंटे तक वार्डर पर पसोपेश का माहौल रहा। कासगंज के डीएम विजेंद्र पांड्यान और एसपी सुनील कुमार सिंह वार्ता की बात कहकर उन्हें सोरों के गेस्ट हाउस ले गए। वहां दो घंटे हिरासत में रखने के बाद उन्हें बरेली लौटा दिया गया। वाजपेयी ने प्रशासन के रवैया की आलोचना की। बोले, किसी से मिलने पर पाबंदी लगाना गलत है।
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वाजपेयी के आगरा जाने की भनक बदायूं और कासगंज के प्रशासन को शनिवार तड़के ही लग गई थी। बदायूं के एसपी सिटी अनिल यादव और सीओ जेएस पाटनी मय फोर्स के सुबह ही कछला पुल पार करके कासगंज के वार्डर पर पहुंच गए। कासगंज से डीएम और एसपी भी बार्डर पर आकर डट गए। करीब पौने नौ बजे वाजपेयी यहां पहुंचे। पुलिस ने यह कहते हुए उन्हें रोक लिया कि आगरा में माहौल ठीक नहीं है। उनके जाने से हालात बिगड़ सकते हैं। हालांकि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पीड़ित परिवार से मिलने की बात कही, लेकिन उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया गया। प्रदेश अध्यक्ष वाजपेयी ने इसे लेकर फोन पर केंद्रीय नेताओं से भी बात की। तब तक बदायूं और कासगंज से पार्टी के कई नेता भी मौके पर पहुंच गए।
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करीब तीन घंटा की जद्दोजहद के बाद कासगंज के डीएम और एसपी उन्हें सोरों गेस्ट हाउस ले गए। गेस्ट हाउस से निकलते वक्त भी वाजपेयी ने आगरा जाने की जिद की। वाजपेयी के साथ उनकी पत्नी भी थीं। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर उन्हें पार्टी की ओर से जाना था, तो फैमिली के साथ नहीं निकलते। पुलिस ने उन्हें आगरा जाने की बजाय बरेली लौटा दिया। दोपहर बाद करीब दो बजे वह उझानी के रास्ते बरेली को निकल गए, तब कहीं जाकर पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने राहत की सांस ली। बता दें कि गोकशी के मामले की पुलिस से शिकायत करने पर आगरा महानगर के विहिप उपाध्यक्ष अरुण माहौर की गुरुवार दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद वहां बवाल हो गया था।
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बदायूं और कासगंज के प्रशासन ने प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को जिस तरह से रोका, वह लोकतंत्र के लिहाज से अच्छी बात नहीं है। यह सब प्रदेश सरकार के इशारे पर किया गया है। आने वाले दिनों में प्रदेश सरकार को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा।
- बीएल वर्मा, क्षेत्रीय अध्यक्ष, पांचाल प्रदेश।
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