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माखन चोर की लीलाओं का बखान, श्रद्धालु भावविभोर
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बिल्सी के बांस बरोलिया में भागवत कथा सुनाते दीपक शास्त्री।
- फोटो : BADAUN
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बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव बांस बरोलिया स्थित वृद्धाश्रम पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन मध्य प्रदेश से पधारे कथावाचक दीपक शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला, माखन चोरी व गोवर्धन पूजा की कथा श्रद्धालुओं को सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान की लीलाएं मानव जीवन के लिए प्रेरणा दायक हैं।
कहा-बालक कृष्ण सभी का मन मोह लिया करते थे। नटखट स्वभाव के चलते यशोदा मां के पास उनकी हर रोज शिकायत आती थी। मां उन्हें कहती थीं कि प्रतिदिन तुम माखन चुरा के खाया करते हो तो वह तुरंत मुंह खोलकर मां को दिखा दिया करते थे कि मैंने माखन नहीं खाया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण अपनी सखाओं और गोप-ग्वालों के साथ गोवर्धन पर्वत पर गए थे। वहां पर गोपिकाएं विभिन्न प्रकार के भोजन रखकर नाच गाने के साथ उत्सव मना रहीं थीं। श्री कृष्ण के पूछने पर उन्होंने बताया कि आज के ही दिन व्रसासुर को मारने वाले तथा मेघ एवं देवों के स्वामी इंद्र का पूजन होता है। इससे प्रसन्न होकर इंद्र ब्रज में वर्षा करते हैं। इससे प्रचुर अन्न पैदा होता है।
भगवान कृष्ण ने कहा कि इंद्र में क्या शक्ति है। उनसे अधिक शक्तिशाली तो हमारा गोवर्धन पर्वत है। इसके कारण ही वर्षा होती है। हमें इंद्र से बलवान गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए। तभी से दिवाली के बाद सभी घरों में गोवर्धन की पूजा की जाती है।
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कथावाचक ने अन्य प्रसंगों को भी सुनाया। इस मौकेपर त्रिदंडी स्वामी दामोदार दास महाराज, आश्रम के संचालक उमाशंकर शास्त्री, वेदव्यास शर्मा, शिव गौड़, धनेश्वर सिंह पुंडीर, रा मकिशोर शर्मा, ह रिओम, खेमपाल, यादकिशोर माथुर, राजाराम, बंटी माथुर आदि मौजूद रहे। संवाद
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कहा-बालक कृष्ण सभी का मन मोह लिया करते थे। नटखट स्वभाव के चलते यशोदा मां के पास उनकी हर रोज शिकायत आती थी। मां उन्हें कहती थीं कि प्रतिदिन तुम माखन चुरा के खाया करते हो तो वह तुरंत मुंह खोलकर मां को दिखा दिया करते थे कि मैंने माखन नहीं खाया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण अपनी सखाओं और गोप-ग्वालों के साथ गोवर्धन पर्वत पर गए थे। वहां पर गोपिकाएं विभिन्न प्रकार के भोजन रखकर नाच गाने के साथ उत्सव मना रहीं थीं। श्री कृष्ण के पूछने पर उन्होंने बताया कि आज के ही दिन व्रसासुर को मारने वाले तथा मेघ एवं देवों के स्वामी इंद्र का पूजन होता है। इससे प्रसन्न होकर इंद्र ब्रज में वर्षा करते हैं। इससे प्रचुर अन्न पैदा होता है।
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भगवान कृष्ण ने कहा कि इंद्र में क्या शक्ति है। उनसे अधिक शक्तिशाली तो हमारा गोवर्धन पर्वत है। इसके कारण ही वर्षा होती है। हमें इंद्र से बलवान गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए। तभी से दिवाली के बाद सभी घरों में गोवर्धन की पूजा की जाती है।
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कथावाचक ने अन्य प्रसंगों को भी सुनाया। इस मौकेपर त्रिदंडी स्वामी दामोदार दास महाराज, आश्रम के संचालक उमाशंकर शास्त्री, वेदव्यास शर्मा, शिव गौड़, धनेश्वर सिंह पुंडीर, रा मकिशोर शर्मा, ह रिओम, खेमपाल, यादकिशोर माथुर, राजाराम, बंटी माथुर आदि मौजूद रहे। संवाद