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बिना लाइसेंस हो रहा जहर का कारोबार
badaun
Updated Fri, 03 Jul 2015 08:30 PM IST
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बिना लाइसेंस के जिले में जहर का कारोबार हो रहा है। परचून की दुकानों पर जहर बिक रहा है। अक्सर लोग इसी जहर का सेवन करके जान दे रहे हैं। पेस्टीसाइड, इंसेक्टीसाइड समेत दूसरे विषाक्त पदार्थ बिना लाइसेंस भी बेचे जा रहे हैं। मक्खी, मच्छर, काकरोच मारने की दवाओं की बिक्री के लिए दुकानदारों को कृषि विभाग से लाइसेंस लेना होता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं हो रहा है। जानकारों की मानें तो जिले में सालाना डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक का जहर बिक रहा है।
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नियमानुसार मक्खी, मच्छर, कॉकरोच और चूहा मार दवा बेचने के लिए कृषि विभाग से हाउस होल्ड का लाइसेंस लेना होता है। औसतन हर तीसरे घर में पेस्टीसाइड, इंसेक्टीसाइड विषाक्त का इस्तेमाल होता है। परचून की दुकानों पर यह जहर बच्चों को भी असानी से मिल जाता है। कुछ दुकानदार विभागीय उदासीनता का फायदा उठाकर नकली उत्पादन भी बेच रहे हैं। यह कारोबार तो फैल रहा है लेकिन लाइसेंस की तादाद नहीं बढ़ रही। जिले में हाउस होल्ड और जनरल 300 लाइसेंस हैं। इस नाजायज कारोबार को किस तरह नजरअंदाज किया जा रहा है सभी के सामने है।
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ऐसे हो रहा नाजायज कारोबार
मक्खी, काकरोच, चूहा और मच्छर मारने वाली दवाओं की बिक्री के लिए हाउस होल्ड लाइसेंस की जरूरत होती है। कृषि विभाग यह लाइसेंस जारी करता है। लाइसेंस हर साल रिन्यू भी कराना होता है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो जिले में हाउस होल्ड और जनरल 300 लाइसेंस हैं। हालांकि यह बात किसी से नहीं छिपा है कि पेस्टीसाइड, इंसेक्टीसाइड जहर गलियों में परचून की दुकानों पर बिक रहा है। चोरी छिपे भी इस कारोबार को किया जा रहा है।
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राजस्व का भी हो रहा नुकसान
कृषि विभाग को हाउस होल्ड लाइसेंस जारी करने और इसके रिन्यूवल पर राजस्व मिलता है। जिले के गली-कूंचों में बिना लाइसेंस पेस्टीसाइड, इंसेक्टीसाइड जहर बिक रहा है, इससे कृषि विभाग को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। विभाग इन स्थानों पर आसानी से अपनी पहुंच नहीं बना पाता। कई बार लोग इसी जहर का सेवन कर खुदकुशी भी कर लेते हैं।
जिले में हाउस होल्ड और जनरल 300 लाइसेंस हैं। जहां बिना लाइसेंस के पेस्टीसाइड, इंसेक्टीसाइड विषाक्त की बिक्री हो रही है वहां कृषि विभाग छापेमारी कर कार्रवाई करता है। टीम बनाकर पूरे जिले में ऐसे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जो बिना लाइसेंस इन विषाक्त की बिक्री कर रहे हैं।
-आरके सिंह, जिला कृषि अधिकारी/कृषि रक्षा अधिकारी