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कुदरत की मार पे मार! न आशियां बचा न कपड़े

Mon, 11 May 2015 08:19 PM IST
Ujani
Ujani Updated Mon, 11 May 2015 08:19 PM IST
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Bash Bash on nature ! Do not save Asian
भीषण अग्निकांड में तबाही के मंजर से रूबरू ननाखेड़ा वालों ने दंश तो बाढ़ के दिनों में खेतीबाड़ी चौपट हो जाने का भी झेला। दो महीना पहले आसमान से आपदा बरसी तो घरों तक इतना अनाज नहीं पहुंच पाया, जो पूरे साल की रोटी के लिए पर्याप्त साबित होता। एक बार फिर कुदरत की मार के रूप में आग की लपटों ने ऐसा कहर बरपाया कि आशियां और कपड़े-लते भी नहीं बच पाए।
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सोमवार को आग से तबाही के बाद ननाखेड़ा के ज्यादातर लोगों की जुबां पर तकदीर से जुड़े किस्से ही थे। ननाखेड़ा के ज्यादातर परिवारों की जमीन गंगा की तलहटी में है। दो साल पहले बाढ़ की विभीषिका ने काश्तकारों की फसल ही नहीं बची बल्कि खेत भी गंगा में समां गए थे। अहमद शेर कहते हैं कि तबाही के मंजर से रूबरू होने की आदत सी बन गई है, लेकिन आग के कहर ने दो महीना पहले आपदा से बचे अनाज के दाने भी राख के ढेर में तब्दील कर दिए। कार्तिक की फसलों की फसलों की क्या उम्मीद, बीच में बाढ़ भी आएगी।
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तबाही के मंजर से महिला क्या पुरुष, बच्चे भी बदहवास नजर आए। मोहम्म्द उमर के बच्चों की रोजी-रोटी के लिए कमाई का जरिया ट्रैक्टर भी क्षतिग्रस्त हो गया। घर में कुछ भी नहीं बचा। नये पहिए खरीदकर ट्रैक्टर ठीक कराएं या फिर बच्चों के लिए संसाधन जुटाएं। अब वह इसी उधेड़-बुन में लग गउ हैं। नेक मोहम्मद और छिद्दा की तो दुधारू भैंस भी नहीं बची, जो दूध बेचकर गुजर-बसर में सहायक बन जाती। ज्यादतर परिवार के सदस्यों को तो सिर छिपाने के लिए झोपडिय़ां भी तैयार करनी होगीं। कई लोगों को तो अभी आपदा के सहायता राशि चेक भी नहीं मिल पाए हैं।
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नेकसी ने बाहर फेंक दी बालिका
उझानी। ननाखेड़ा में भीषण अग्निकांड की भेंट चढ़ी वृद्धा नेकसी बानो की गोद में उसकी तीन साल की नातिन भी थी। झोपड़ी में नेकसी जब आग की लपटों से घिर गईं, तो उन्होंने मासूम को बाहर फेंक दिया, लेकिन मासूम बालिका के खरोंच तक नहीं आई। नेकसी ने मासूम को तो बचा लिया, लेकिन खुद मौत की शिकार बन गईं।

पांच राजस्व कर्मियों से कराया आकलन
उझानी। आग की भेंट चढ़े घरों के स्वामियों की सूची तैयार कराने के लिए एसडीएम प्रदीप कुमार ने राजस्व निरीक्षक इरफान के जरिए कछला से लेखपाल ओमबाबू नागेंद्र और रामनरेश को भी बुलवा लिया। इरफान के नेतृत्व में पांच राजस्व कर्मियों की टीम ने प्रत्येक घर तक पहुंचकर नुकसान का आकलन किया। राजस्व निरीक्षक ने बताया कि अग्नि पीड़ितों को जल्द ही मुआवजा राशि मुहैया करा दी जाएगी।


शाम को खाना लेकर पहुंचे रिश्तेदार
उझानी। आग की भेंट चढ़े घरों में चूल्हा जलाने तक को कुछ नहीं बचा है। भूखे-प्यासे बच्चों के लिए हालांकि गांव के ही कुछेक लोगों ने खाना मुहैया करा दिया, लेकिन शाम को नाते-रिश्तेदार भी पहुंचने लगे। रिश्तेदार अपने साथ खाना भी बनवा कर लाए थे। पड़ोस के गांव से भी मदद को लोग पहुंचे।
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