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इस्तीफा देने के बाद कर्मचारी ने शुरू किया था फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने का फर्जीवाड़ा

Fri, 26 Aug 2022 12:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 26 Aug 2022 12:27 AM IST
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ayushman
बदायूं। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत फर्जीवाड़ा कर आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी करने के मामले में नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। दरअसल, जिस कर्मचारी ने एक ही मोबाइल नंबर पर 150 से ज्यादा आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी कर डाले, वह एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) के तहत जिला महिला अस्पताल में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर तैनात था।
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वर्ष 2020 में इस्तीफा देने के बाद उसने यह रैकेट शुरू किया था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस्तीफे के बाद भी प्रमोद कुमार संत नाम के कर्मचारी की आईडी बंद नहीं कराई। ऐसे में तत्कालीन सीएमओ, नोडल अधिकारी और जिला समन्वयक की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
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पिछले दिनों मध्यप्रदेश के भोपाल में एक ही मोबाइल नंबर पर 150 से ज्यादा आयुष्मान गोल्डन कार्ड का मामला पकड़े जाने के बाद राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने इसका संज्ञान लिया। मामले में रिपोर्ट तलब करने के साथ जांच और एफआईआर का आदेश भी दिया। जिम्मेदारों ने यहां भी गुमराह करने का काम किया। गलत सूचनाएं दी गईं कि संबंधित कर्मचारी का स्थानांतरण 2020 में सिद्धार्थनगर हो गया था, जबकि प्रमोद कुमार संत नाम के कर्मचारी ने 2020 में इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद भी उसकी गोल्डन कार्ड जारी करने संबंधी आईडी को अधिकारियों ने बंद करना जरूरी नहीं समझा। मामला बढ़ने पर जिम्मेदार अब पत्रावलियां तलाश रहे हैं कि किसी अधिकारी ने उसकी आईडी बंद कराने के संबंध में लिखा या नहीं।
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दरअसल, कर्मचारी की आईडी बंद ही नहीं कराई गई थी। ऐसे में इस्तीफा देने के बाद उसने फर्जी आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी करने का रैकेट शुरू कर दिया। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस की ई-मेल आईडी और एक अन्य मोबाइल नंबर का वह इस्तेमाल करता रहा। आईडी बंद कराने संबंधी अब तक कोई प्रमाण नहीं मिला है। ऐसे में तत्कालीन सीएमओ, नोडल अधिकारी और जिला समन्वयक की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।
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आगरा का निकला मोबाइल नंबर, जांच के बाद कई फंसेंगे
- मध्य प्रदेश के भोपाल में जिस एक ही मोबाइल नंबर पर 150 से ज्यादा आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए गए, वह मोबाइल नंबर आगरा का है। यह किसी महिला के नाम से जारी हुआ है। बताते हैं कि संबंधित कर्मचारी मूल रूप से सिद्धार्थ नगर का निवासी है। एक अन्य अनूप द्विवेदी नाम के कर्मचारी का नाम भी प्रकाश में आया है। दरअसल, कार्ड प्रमोद कुमार संत जारी करता था और उसको एप्रूव्ड करने का काम अनूप द्विवेदी करता था। लंबे समय से यह रैकेट चल रहा था। कुछ निजी अस्पतालों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। ऐसे में जांच आगे बढ़ने के स्थान पर उलझती हुई नजर आ रही है। दरअसल, आयुष्मान गोल्डन कार्ड धारक को साल में पांच लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा है। यह इलाज वह निजी अस्पताल में भी करा सकता है।
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मामले में जांच चल रही है, कुछ तथ्य प्रकाश में आए हैं। जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। संबंधित कर्मचारी के बारे में भी सभी जानकारियां जुटाई जा रही हैं।

- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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यह बात सही है कि संबंधित कर्मचारी ने 2020 में नौकरी से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद भी उसकी आईडी बंद नहीं की गई। जिस मोबाइल नंबर पर कार्ड जारी किए गए हैं, वह आगरा में किसी महिला के नाम पर है। एक अन्य अनूप द्विवेदी नाम के कर्मचारी का नाम भी प्रकाश में आया है। जांच जारी है, जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
-नितिन वर्मा, जिला समन्वयक जिला समन्वयक पीएम आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना
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