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Budaun News: महिला अस्पताल में फार्मासिस्ट की जगह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बांट रहा दवाएं
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फार्मासिस्ट की जगह दवा बाटता चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी। संवाद
- फोटो : 1
बदायूं। महिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्टाफ को लेकर एक और गंभीर लापरवाही सामने आई है। आरोप है कि अस्पताल में फार्मासिस्ट की जगह वार्ड में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मरीजों को दवाएं बांट रहा है। इससे मरीजों को गलत दवाएं मिलने और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की आशंका बढ़ गई है।
जिला महिला अस्पताल में डॉक्टर से लेकर स्टाफ तक भरपूर है। बावजूद इसके कई बार मरीजों को समय पर डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं हो पाते। अब दवा वितरण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी गैर-प्रशिक्षित कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दी गई है। मरीजों और उनके तीमारदारों का कहना है कि दवा काउंटर पर अक्सर फार्मासिस्ट मौजूद नहीं रहता और वार्ड बॉय या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर्ची देखकर दवाएं दे देते हैं, जबकि चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, दवा वितरण एक तकनीकी और जिम्मेदारीपूर्ण कार्य है। इसमें फार्मासिस्ट की भूमिका बेहद अहम होती है।
गैर-प्रशिक्षित व्यक्ति की ओर से दवा देने से डोज में गलती, गलत दवा या एक्सपायरी दवा दिए जाने की आशंका बनी रहती है। इससे मरीजों की हालत और बिगड़ सकती है, खासकर गर्भवती महिलाओं और नवजातों के मामले में यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
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तीमारदार सुनीता देवी का आरोप है कि शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती। अस्पताल प्रशासन की ओर से व्यवस्था सुधारने के बजाय लापरवाही को नजरअंदाज किया जा रहा है। हाल के दिनों में महिला अस्पताल में हुई घटनाओं ने पहले ही स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और अब दवा वितरण में अनियमितता ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।
फार्मासिस्ट ही दवाएं बांटते हैं। इसके अलावा किसी को अधिकार नहीं दिया गया है कि वह दवाइयों का वितरण करें। अगर ऐसा है कि उसको दिखवाया जाएगा। -डॉ. शोभा अग्रवाल, सीएमएस, महिला अस्पताल
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जिला महिला अस्पताल में डॉक्टर से लेकर स्टाफ तक भरपूर है। बावजूद इसके कई बार मरीजों को समय पर डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं हो पाते। अब दवा वितरण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी गैर-प्रशिक्षित कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दी गई है। मरीजों और उनके तीमारदारों का कहना है कि दवा काउंटर पर अक्सर फार्मासिस्ट मौजूद नहीं रहता और वार्ड बॉय या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर्ची देखकर दवाएं दे देते हैं, जबकि चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, दवा वितरण एक तकनीकी और जिम्मेदारीपूर्ण कार्य है। इसमें फार्मासिस्ट की भूमिका बेहद अहम होती है।
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गैर-प्रशिक्षित व्यक्ति की ओर से दवा देने से डोज में गलती, गलत दवा या एक्सपायरी दवा दिए जाने की आशंका बनी रहती है। इससे मरीजों की हालत और बिगड़ सकती है, खासकर गर्भवती महिलाओं और नवजातों के मामले में यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
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तीमारदार सुनीता देवी का आरोप है कि शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती। अस्पताल प्रशासन की ओर से व्यवस्था सुधारने के बजाय लापरवाही को नजरअंदाज किया जा रहा है। हाल के दिनों में महिला अस्पताल में हुई घटनाओं ने पहले ही स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और अब दवा वितरण में अनियमितता ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।
फार्मासिस्ट ही दवाएं बांटते हैं। इसके अलावा किसी को अधिकार नहीं दिया गया है कि वह दवाइयों का वितरण करें। अगर ऐसा है कि उसको दिखवाया जाएगा। -डॉ. शोभा अग्रवाल, सीएमएस, महिला अस्पताल