बिसौली। श्रीराम कथा के समापन पर कथा व्यास देशपाल भारद्वाज ने धनुष यज्ञ की लीला का वर्णन किया। कथा प्रसंग सुन श्रोता भाव-विभोर हो गए।
कथा व्यास ने कहा कि गुरु विश्वामित्र श्रीराम-लक्ष्मण को अपने साथ ले जाते हैं। वनों में वह ताड़का सुबाहु आदि का वध करके मुनियों की रक्षा करते हैं। वहां से वह राजा जनक के यहां मिथिला पुरी में जाते हैं। जनक की प्रतिज्ञा के अनुसार श्रीराम शिव के धनुष को भंग कर देते हैं। माता सीता भगवान श्रीराम के गले में जयमाला डालती हैं। इसी बीच चारों ओर भगवान श्रीराम की जय जयकार गूंज उठती है। इस मौके पर डॉ. प्रवीण शर्मा, सूर्यकांत पाठक, अशोक शर्मा, मधु शर्मा, विपनेश शर्मा, सीमा, नीलम शंखधार, इंदु शर्मा, सोनी पाठक, रुचि सिंह, आदि मौजूद रहे। संवाद