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Budaun News: अंबे तू है जगदंबे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली...

Sun, 22 Oct 2023 01:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 22 Oct 2023 01:08 AM IST
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Ambe, you are Jagdambe Kali, Jai Durga Khappar wali...
बिल्सी के हनुमानगढ़ी मंदिर पर पूजा-अर्चना करते भक्त। संवाद
बदायूं। शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की गई। मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लाइन लग गई। भक्तों ने घरों पर मां की पूजा कर आशीर्वाद लिया और चुनरी चढ़ाई।
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शहर के नगला मंदिर पर शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा अर्चना की। भक्तों ने देवी मंदिर में पहुंचकर माता के सातवें स्वरूप से आशीर्वाद लिया। सभी ने माता को चुनरी, मिष्ठान्न, फल-फूल व अन्य सामग्री चढ़ाकर पूजा अर्चना की और घर परिवार में सुख शांति बनाए रखने की कामना की। इसके अलावा घरों में महिलाओं ने भजन कीर्तन करके मां का गुणगान किया। शहर के अलावा देहात क्षेत्र के मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने माता रानी की पूजा की।
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बिल्सी। हनुमानगढ़ी देवी एवं मोहल्ला संख्या दो स्थित मां शीतला देवी मंदिर पर सबसे अधिक भक्त पहुंचे। मंदिर में सुबह महाआरती में लोगों ने भाग लेकर मनोकामना पूर्ण होने की कामना की। सुबह से ही मंदिरों में माता के जयकारों की गूंज रही। लोगों ने मां के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया। इसके अलावा नगर के कुटी, नील कंठेश्वर महाराज, नवदुर्गा मंदिर, भवन मंदिर में भी पूजा अर्चना की गई। संवाद
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आज ऐसे करें देवी महागौरी की पूजा

पंडित गिरीश शर्मा ने बताया कि देवी का अष्टम स्वरूप महागौरी का है। यह देवी बहुत सौम्य और सरल हैं। उनका वाहन बैल है। अष्टमी तिथि के दिन सुबह स्नान-ध्यान के बाद कलश पूजन कर मां की विधि-विधान से पूजा करें। मां को सफेद पुष्प अर्पित करें। हलुआ, पूड़ी, सब्जी, काले चने और नारियल का भोग लगाएं। माता रानी को चुनरी अर्पित करें। अगर घर में अष्टमी पूजी जाती है, तो पूजा के बाद कन्याओं को भोजन भी करा सकते हैं। ये शुभ फल देने वाला माना गया है।

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कादराबाद पर बरस रही मां की कृपा
फाेटो-65
दहगवां। कादराबाद के मां काली मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। मंदिर के पुजारी श्याम बाबू ने बताया कि किवदंतियाें के अनुसार, हजारों वर्ष पहले मां गंगे बारह कोस में बहती थी। कालांतर में शिरोमणि श्री हरि बाबा ने 40 मील लंबा बांध बनाकर इस क्षेत्र को पूर्णतया बाढ़ से मुक्त कर दिया था। वहीं गंगा का एक स्रोत कादराबाद के नजदीक होकर निकला, इसे महावा नदी के नाम से जाना जाता है।

यहां एक संत भोले बाबा काली मां की तपस्या किया करते थे। एक दिन एक हांडी गंगा में विपरीत दिशा में तैरती हुई बाबा के पास पहुंची। एक भक्त हांडी को अपने घर ले गया और उसकी पूजा करने लगा। हांडी में से हुंकार की आवाज आने पर एक महिला ने डर के कारण हांडी को फोड़ दिया। इस पर महिला के घर परिवार में मौत होने लगीं। बाद में लोग बाबा को खोजकर लाए। बाबा ने मां काली से क्षमा याचना की तब माता रानी का क्रोध शांत हुआ। इसके बाद यहां मंदिर का निर्माण हुआ। मान्यता है कि मां गांव वालों की हर विपत्ति से रक्षा करती हैं और उन पर अपनी कृपा बनाए रहती हैं।

बिल्सी के हनुमानगढ़ी मंदिर पर पूजा-अर्चना करते भक्त। संवाद

बिल्सी के हनुमानगढ़ी मंदिर पर पूजा-अर्चना करते भक्त। संवाद

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