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शराब, अशिक्षा और गरीबी बनी जानलेवा

Sat, 19 Aug 2017 12:21 AM IST
मूसाझाग/बदायूं।
मूसाझाग/बदायूं। Updated Sat, 19 Aug 2017 12:21 AM IST
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Alcohol, illiteracy and poverty became dead
बुखार - फोटो : अमर उजाला
जगत ब्लाक क्षेत्र के ललबुझिया गांव में बुखार से चार लोगों की मौत का मामला
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संजय श्रीवास्तव 

जगत ब्लॉक की ललबुझिया बसईयाखेड़ा ग्राम पंचायत में 11 मजरे हैं। ललबुझिया में अधिकतर परिवार गरीब और अशिक्षित हैं, जिनमें कई परिवार छप्परों में गुजारा करते हैं। रोजगार न होने से कई लोग बाहर रहकर मजदूरी करते हैं। गरीबी और अशिक्षा की एक अहम वजह गांव में कच्ची शराब का चलन है। यहां के करीब 30 प्रतिशत घरों के लोग कच्ची शराब बनाते और बेचते हैं। गांव में बनने की वजह से कई लोग चौबीस घंटे नशे में धुत रहते हैं।
बुखार से मौत का शिकार हुईं मिथलेश और कुसुमा देवी के पिता रामकिशोर के नाम दो बीघा जमीन है। उनके घर पर छप्पर पड़ा है। घर में पढ़ा लिखा कोई नहीं। मृतका गीता के पति अर्जुन के पास एक बीघा जमीन है। अर्जुन भी अनपढ़ है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस गांव में छापेमारी करती है। शराब बनाने वाले पकड़े भी जाते हैं, लेकिन गांव के बाहर ले जाकर छोड़ दिए जाते हैं। धनाभाव में लोग अच्छे डॉक्टर को दिखाने के बजाय झोलाछाप के भरोसे रहते हैं, जिसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकाना पड़ती है। मौत का शिकार हुई गीता देवी, मिथलेश और कुसुमा देवी भी अपना इलाज झोलाछाप से करा रहीं थीं।
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गंदगी का दूसरा नाम है लालबुझिया
किसी को नरक देखना है तो ललबुझिया गांव जाइए। नालियों में भरी कीचड़ में बजबजाती सूड़ियां, जगह-जगह लगे गोबर और कूड़े के ढेर इस गांव की पहचान हैं। यहां तैनात सफाई कर्मी सत्यनारायण कश्यप का अपना घर शहर में है। ग्रामीणों के मुताबिक सफाई कर्मी गांव में कभी-कभार ही आता है। उसने अपने एवज में दूसरा लड़का लगा रखा है, जो चार-छह दिन में ललबुझिया पहुंचता है। सफाई के नाम पर स्कूल और उसके सामने सड़क पर झाड़ू लगाकर लौट जाता है। सफाई कर्मी सत्यनारायण शुक्रवार को भी गांव में नहीं था।  
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केवल पांच परिवारों के पास हैं शौचालय
केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक सबका गांवों में शौचालय बनवाने पर जोर है। ललबुझिया के केवल पांच परिवारों में शौचालय है, जो लोगों ने खुद बनवाए हैं। सरकारी मदद से एक भी शौचालय नहीं बना। बाकी पूरा गांव खुले में शौच करने जाता है। सार्वजनिक शौचालय पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।  
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पूरे गांव में फैला है बुखार
पूरे ललबुझिया गांव में बुखार का प्रकोप है। हर घर में कोई न कोई मरीज है। शुक्रवार को चार लोगों की बुखार से मौत होने की सूचना मिलने पर नोडल अधिकारी डॉ. हरदत्त कुमार के नेतृत्व में टीम पूर्वाह्न 11.30 बजे ललबुझिया पहुंची। टीम ने प्राथमिक विद्यालय में शिविर लगाकर चेकअप शुरू किया तो मरीजों की भीड़ जुट गई। शाम तक कुल 268 मरीजों का चेकअप कर दवाएं दी गईं। 64 लोगों की स्लाइड बनाई गई और छह ब्लड सैंपल लिए गए। दो लोग तेजपाल और ओमशंकर की हालत गंभीर देखकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
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गांव में गम और गुस्से का माहौल
बुखार से चार लोगों की मौत का पता लगने पर पूरे गांव में मातम छा गया। कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। इस घटना के बाद से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति ग्रामीणों में खासा गुस्सा है। 
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क्या कहते हैं लोग
यहां कूढ़े के ढेर लगे हैं। सफाई कर्मचारी आता नहीं है। मच्छरों का जबरदस्त प्रकोप है। आधे से ज्यादा लोग बीमार हैं। आज से पहले कोई अधिकारी यहां खबर लेने नहीं आया। 
-राम सेवक
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पूरा गांव गरीब है। फिर भी यहां एक भी शौचालय नहीं बनवाया गया। पूरा गांव खुले में शौच करने जाता है। इससे बीमारियां नहीं फैलेंगी तो क्या होगा?  इस गांव की कोई खबर नही लेने वाला है। 
-फूल सिंह 
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अभी रुखड़ाखौला गांव में प्राइवेट डॉक्टर से दवाई लेकर आया हूं। पांच-छह दिन से रोज बुखार आ रहा है। जब गांव के चार लोगों की जान चली गई तब आज दवाइयां बांटी जा रही हैं। 
-सत्यापाल             
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 हर घर में बुखार से पीड़ित लोग हैं। हम लोगों के पास इतना पैसा भी नही जो इलाज करवा सकें। अधिकारी कुछ इस गांव की तरफ देखें तो कुछ भला हो सकता है। अब तक तो इस गांव में कोई आया नही है। -राम विला
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हमारे यहां दोनों लड़कियां बेहोशी की हालत में आई थीं। हमने परिवार वालों से बाहर ले जाने को कहा था। मगर परिवार वालों ने जिद करके भर्ती करा दिया। जांच कराने पर दोनों लड़कियों को मलेरिया पॉजिटिव पाया गया। उसी के आधार पर इलाज किया गया था।
- डॉ. वीपी सिंह सोलंकी, शिव नर्सिंग होम
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गीता में हीमोग्लोबिन की कमी थी। परिवार वालों से बरेली ले जाने को कहा था, लेकिन उन्होंने इतने रुपये न होने की बात कहकर भर्ती करा दिया। परिवार वाले ब्लड की व्यवस्था भी नहीं कर पाए। बच्ची मरी हुई पैदा हुई थी। रेफर करने पर परिवार वाले बरेली ले जाने के बजाय अपने घर ले गए। रास्ते में उसकी मौत हो गई। 

- के सिद्दीकी, मेट्रो अस्पताल  
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पहले भी जा चुकी है कई लोगों की जान
मूसाझाग। ललबुझिया में बुखार का कहर पहली बार नहीं बरपा। बल्कि इससे पहले भी कई लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है।
करीब दो महीने पहले इसी गांव के बहादुर के 18 वर्षीय पुत्र रामगोपाल की बुखार से मौत हो गई थी। पिछले साल ललबुझिया गांव में बुखार से 13 लोगों की मौत हुई थी। इनमें रामेश्वर, द्वारिकादास, श्याम बिहारी, शर्बती, सुम्मेर, रेश्मा, शिवलाल, बसंती, नन्हे, महारानी, कुसुमा पत्नी दीनदयाल, मौसमी शामिल हैं। दो साल पहले भी बुखार से चार-पांच लोगों की मौत हुई थी। बुखार से हर साल हो रही मौतों से गांव वाले खासे दहशत में हैं।
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