फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   agricultur

हरियाणा-पंजाब के भूसे ने पशुपालकों को चारे के संकट से उबारा

Wed, 09 Feb 2022 01:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 09 Feb 2022 01:24 AM IST
विज्ञापन
agricultur
उझानी पुरानी अनाज मंडी में बिक्री को लगीं हरियाणा-पंजाब के भूसे की गांठें। संवाद - फोटो : BADAUN
उझानी (बदायूं)। दो-तीन महीने से चारे के संकट का सामना कर रहे पशुपालकों को पंजाब और हरियाणा के भूसे ने उबारना शुरू कर दिया है। दोनों राज्यों से रोजाना ही यहां कई ट्रक अनलोड हो रहे हैं। भूसे को बाकायदा गांठ के रूप में पैक करके पहुंचाया जाता है। करीब एक क्विंटल वजन की गांठ 15 सौ रुपये तक की बनती है। यहां के भूसे का रेट भी पंजाब और हरियाणा के मुुकाबले सौ रुपया प्रति क्विंटल अधिक है। ऐसे में पशुपालक पंजाब और हरियाणा के भूसे को ही तरजीह दे रहे हैं।
विज्ञापन

पशुओं के चारे में भूसा प्रमुख है। पशुओं को भूसे में हरा चारा मिलाकर खिलाया जाता है। भूसे की किल्लत को लेकर चंद्रपाल सिंह और बदन सिंह बताते हैं कि गेहूं के रकबे में गिरावट से दिक्कत सामने आई है। इस बार गेहूं की नई फसल आने से दो-ढाई महीने पहले ही किसानों की बुर्जियां खाली होने लग गईं। देहात क्षेत्र में हालांकि थोड़ा-बहुत भूसा बचा है लेकिन कस्बाई इलाकों में भूसा खत्म होने के बाद चारा व्यापारियों ने हरियाणा और पंजाब की ओर रुख किया। इस महीने कस्बे समेत आसपास इलाके में दर्जनों की संख्या में ट्रकों से भूसे की गांठें अनलोड हो चुकी हैं। करीब एक क्विंटल वजन की गांठों के भूसे की गुणवत्ता बदायूं समेत आसपास इलाके के भूसे की तरह नहीं बताई जा रही है लेकिन संकट से उबरने के लिए पशुपालक इसी को खरीद रहे हैं।
विज्ञापन

-
थोड़ा मोटा है पंजाब-हरियाणा का भूसा
पंजाब और हरियाणा से ट्रकों के जरिये जिले में पहुंच रही भूसे की गांठों की गुणवत्ता को लेकर कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि यहां थ्रेसिंग के जरिये भूसा बनता है। थ्रेसिंग का भूसा पशुओं के लिए फायदेमंद रहता है। पशुओं की पाचन क्रिया भी ठीक रहती हे लेकिन पंजाब और हरियाणा से भूसा थ्रेसिंग वाले के मुकाबले थोड़ा मोटा है। थ्रेसिंग वाले भूसे को पशु सूखा भी खा सकते हैं लेकिन कंबाइन मशीन से तैयार पंजाब-हरियाणा के भूसे का हरा चारा मिलाए बिना नहीं खिलाया जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन

-
यह बोले भूसा विक्रेता
पंजाब और हरियाणा के भूसे की डिमांड काफी है। यह रेट में प्रति क्विंटल सौ रुपया कम है। इलाके में भूसा खत्म हो जाने की वजह से कोई और विकल्प भी नहीं है। एक ट्रक भूसा तीन-चार दिनों में बिक जाता है। कई पशुपालक तो पूरी गांठ ही खरीदकर ले जाते हैं।
- नक्से अली, भूसा विक्रेता
-
पिछले महीने भूसे की गांठें अनलोड हुईं तो पशुपालकों को थोड़ा अचरज जरूर हुआ लेकिन चार-छह दिनों में ही पशुपालकों को इस भूसे की ओर रुझान बढ़ता गया। पंजाब और हरियाणा से भूसे की गांठें आनी बंद हो जाएं तो पशुओं के सामने चारे का संकट पैदा हो जाएगा। दिक्कत भी बढ़ेगी।

- इंतजार अली, भूसा व्यापारी
-
पंजाब और हरियाणा का भूसा खराब नहीं है। जब भी चारे का संकट आया है, तब-तब जिले में बाहर से भूसा खरीद लाया जाता है। इस बार तो जल्दी ही भूसे की किल्लत हो गई। पशुओं को भूसे में हरा चारा मिलाकर दिया जाए। केवल सूखा भूसा पशुओं की पाचन क्रिया बिगाड़ सकता है।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed